तेल की कीमत में गिरावट
टैक्स बढ़ने से तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का मानक है, 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। यह अक्टूबर के बाद पहली बार हुआ है। तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इससे भारत में तेल कंपनियों के लिए तेल के दाम कम करने का मौका बना है। लेकिन सरकार ने उन्हें अभी तक हरी झंडी नहीं दिखाई है। इसका फायदा तेल कंपनियां उठा रही हैं और सरकार को ज्यादा टैक्स और डिविडेंड दे रही हैं।
दुनिया के शेयर बाजार गिरे
टोक्यो से लेकर न्यूयॉर्क तक, हर जगह शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। अमेरिका के तीनों प्रमुख सूचकांक (Dow Jones, Nasdaq और S&P) मंगलवार दोपहर में ही 2% से नीचे आ गए थे।
भारत में सेंसेक्स मंगलवार को 96 अंक गिरकर 72,990 पर बंद हुआ। हालांकि, यह 72,634 के निचले स्तर से थोड़ा सुधरा। निफ्टी 37 अंक गिरकर 22,083 पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों ने करीब 3,500 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
व्यापार पर पड़ रहा असर
यह ट्रेड वॉर की आशंकाओं का ही नतीजा है। जब एक देश दूसरे देशों पर टैक्स बढ़ाता है तो दूसरे देश भी जवाबी कार्रवाई करते हैं। इससे व्यापार प्रभावित होता है और बाजारों में अनिश्चितता बढ़ जाती है। यह स्थिति सभी के लिए चिंता का विषय है। देखना होगा कि आगे क्या होता है। क्या देश बातचीत के जरिए कोई हल निकाल पाएंगे या यह टैक्स युद्ध और बढ़ेगा? इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

