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Pet Health Tips: बरसात का मौसम पालतू कुत्तों के लिए कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है. बढ़ी हुई नमी, गंदगी और जलभराव के कारण त्वचा संक्रमण, फंगल इंफेक्शन, टिक और पिस्सुओं का हमला, पेट संबंधी रोग तथा अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसे देखते हुए पशुपालन विभाग ने डॉग मालिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने पालतू कुत्तों को साफ-सुथरा रखने, समय पर टीकाकरण कराने, स्वच्छ भोजन और पीने का पानी देने तथा बारिश के बाद शरीर और पंजों को अच्छी तरह सुखाने की सलाह दी है, ताकि वे मानसून में स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें.
बरसात के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कुत्तों की त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है. पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कुत्ते लंबे समय तक गीले रहते हैं तो उनकी स्किन में खुजली, लाल चकत्ते और बाल झड़ने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. कई मामलों में यह संक्रमण तेजी से फैलकर गंभीर रूप भी ले सकता है. इसलिए इस मौसम में उन्हें सूखा और साफ रखना बेहद जरूरी है. नियमित ब्रशिंग और साफ बिस्तर भी संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं.
यदि आपका कुत्ता बारिश में भीग जाए, तो उसे तुरंत साफ पानी या हल्के शैंपू से नहलाना चाहिए. नहलाने के बाद तौलिए या ठंडी हवा वाले ड्रायर से शरीर, पंजों के बीच और कानों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. शरीर में नमी रह जाने से फंगल इंफेक्शन तेजी से फैल सकता है. कई बार कानों में नमी रहने से इयर इंफेक्शन भी हो जाता है. इसलिए नहलाने के बाद पूरी तरह सुखाना सबसे जरूरी कदम माना जाता है.
बरसात में गीली मिट्टी और कीचड़ के संपर्क में आने से कुत्तों के पंजों में संक्रमण और घाव होने का खतरा रहता है. बाहर घुमाने के बाद उनके पंजों को एंटीसेप्टिक पानी से धोकर साफ करें और उंगलियों के बीच की जगह की जांच करें. वहां फंसी गंदगी या छोटे घाव नजरअंदाज नहीं करने चाहिए. जरूरत पड़ने पर सुरक्षित पंजा बाम का उपयोग भी किया जा सकता है. इससे पंजों की त्वचा नरम रहती है और क्रैकिंग से बचाव होता है.
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नमी वाले मौसम में टिक्स और पिस्सू तेजी से बढ़ते हैं, जो कुत्तों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. ये परजीवी खून चूसते हैं और कई बीमारियों को फैलाने का कारण बनते हैं. पशुपालकों को चाहिए कि वे नियमित रूप से कुत्तों के बालों की जांच करें और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह से टिक्स-रोधी दवाओं का उपयोग करें. साथ ही, कुत्तों को गंदा या ठहरा हुआ पानी पीने से रोकना चाहिए. इससे लेप्टोस्पाइरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है.
बरसात के मौसम में कुत्तों की इम्युनिटी कमजोर पड़ सकती है, जिससे पेट के कीड़े और अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए समय-समय पर डिवर्मिंग और जरूरी वैक्सीनेशन करवाना बेहद जरूरी है. संतुलित और ताजा भोजन देने से उनकी पाचन क्षमता भी बेहतर रहती है. पशुपालन विभाग भी सलाह देता है कि इस मौसम में नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से कुत्तों को स्वस्थ रखा जा सकता है. सही देखभाल से पालतू जानवर पूरे मानसून में सुरक्षित रह सकते हैं.

