बहुत दर्दनाक था मौत का मंजर
21 मई 1991… जगह- तमिलनाडु में श्रीपेरंबदूर। लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने शबाब पर था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चुनावी रैली थी। रात के सवा 10 बजे के करीब का वक्त। अचानक थेनमोझी राजारत्नम उर्फ धनु नाम की एक लड़की राजीव के गले में फूलों की माला पहनाने के लिए जाती है। उसे पूर्व पीएम के इतना करीब जाने से सब इंस्पेक्टर अनसूया ने रोका लेकिन खुद राजीव ने कहा कि सबको स्वागत का मौका मिलना चाहिए। धनु मामला पहनाती है।
राजीव गांधी समेत 18 लोगों की मौत
इसके बाद वह जैसे ही पैर छूने के लिए झुकती है, तभी सुन्न कर देने वाला बहुत तेज धमाका होता है। राजीव गांधी समेत 18 लोगों की मौत हो जाती है। धनु कोई और नहीं एलटीटीई की आत्मघाती हमलावर थी और यह भारत में संभवतः पहला आत्मघाती हमला था। इस घटना ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था।
हजारों ने अपने सिर मुंडवाए थे
राजीव गांधी की शव यात्रा लुटियंस दिल्ली से निकलकर आईटीओ होते हुए अपने गंतव्य पर पहुंची थी। सड़क के दोनों तरफ लाखों दिल्लीवाले अपने अजीज नेता के अंतिम दर्शनों के लिए खड़े थे। दिल्ली में सूरज आग उगल रहा था। गर्मी को झेलते हुए शोकाकुल दिल्ली सड़कों से हिलने का नाम नहीं ले रही थी। सब नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दे रहे थे। इन्हीं सड़कों से पहले पंडित जवाहरलाल नेहरु, इंदिरा गांधी और संजय गांधी की शव यात्राएं निकलीं थीं। तब भी सड़कों पर लाखों लोग खड़े थे। इसी मार्ग से महात्मा गांधी की भी शवयात्रा निकली थी। तब कहते हैं कि सैकड़ों लोग अपने घरों से अंत्येष्टि के लिए घी लेकर आए थे। हजारों ने अपने सिर मुंडवाए थे।

