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Indian Air Force: भारतीय वायुसेना और IIT-मद्रास मिलकर लड़ाकू विमानों के लिए एक अभेद्य डिजिटल संचार प्रणाली विकसित कर रहे हैं. इस स्वदेशी तकनीक का मुख्य उद्देश्य युद्ध के दौरान दुश्मन की जैमिंग और साइबर हमलों को नाकाम करना है. उन्नत एन्क्रिप्शन और सुरक्षित नेटवर्किंग के जरिए विमानों के बीच डेटा साझा करना अब और भी सुरक्षित होगा. यह पहल आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देगी और विदेशी संचार प्रणालियों पर हमारी निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देगी.
भारत अपना कम्यूनिकेशन सिस्टम तैयार कर रहा है. (X/DRDO)नई दिल्ली. आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन या हवा में गोलियों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गए हैं. आज का युद्ध इलेक्ट्रॉनिक और सूचना के स्तर पर लड़ा जा रहा है. भारतीय वायुसेना (IAF) ने इसी चुनौती को भांपते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. IAF के बेंगलुरु स्थित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (SDI) ने IIT-मद्रास के साथ हाथ मिलाया है. यह साझेदारी आसमान में उड़ते विमानों के लिए एक अभेद स्वदेशी डिजिटल कम्यूनिकेशन सिस्टम विकसित करने के लिए हुई है. यह स्वदेशी तकनीक चीन और पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और साइबर सेंधमारी को पूरी तरह नाकाम कर देगी. उन्नत एन्क्रिप्शन के जरिए विमानों का संपर्क अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित होगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह डिजिटल कवच न केवल आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देगा बल्कि भविष्य के युद्धों में भारत की हवाई संप्रभुता को भी सुनिश्चित करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा सीक्रेट फॉर्मूला तैयार करना है जिससे दुश्मन की कोई भी जैमिंग तकनीक हमारे विमानों के संपर्क को न तोड़ सके.
क्या है यह सीक्रेट डिजिटल कवच?
जब एक लड़ाकू विमान मिशन पर होता है तो उसका अपने बेस और अन्य विमानों से संपर्क बेहद जरूरी होता है. अक्सर दुश्मन देश इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए इन सिग्नल्स को ब्लॉक करने की कोशिश करते हैं.
· उन्नत एल्गोरिदम: IIT-मद्रास के वैज्ञानिक ऐसे जटिल एल्गोरिदम विकसित कर रहे हैं,जो सिग्नल्स को जैम करना असंभव बना देंगे.
· उन्नत एन्क्रिप्शन: यह प्रणाली क्वांटम रेसिस्टेंट एन्क्रिप्शन पर आधारित होगी जिसे तोड़ना किसी भी सुपरकंप्यूटर के लिए भी नामुमकिन होगा.
· डायनेमिक नेटवर्किंग: हवा में उड़ते हुए विमान एक-दूसरे के साथ एक गतिशील नेटवर्क बनाएंगे जो पल-पल अपनी फ्रीक्वेंसी बदलेगा.
नेटवर्क-केंद्रित युद्ध में भारत की बढ़त
आज के दौर में नेटवर्क्ड वॉरफेयर का महत्व बढ़ गया है. इसमें सभी लड़ाकू विमान, रडार और कमांड सेंटर एक साथ जुड़े होते हैं. रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह नई तकनीक भारतीय वायुसेना को एक एकीकृत और वितरित कॉम्बैट नेटवर्क में बदल देगी. इसका मतलब है कि अगर एक विमान दुश्मन को देखता है तो उसकी जानकारी तुरंत पूरे बेड़े को सुरक्षित तरीके से मिल जाएगी. यह डेटा एक्सचेंज इतना तेज और सुरक्षित होगा कि दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा.
विदेशी निर्भरता का अंत
अभी तक भारत कई संचार प्रणालियों के लिए विदेशी वेंडर्स पर निर्भर रहता था. विदेशी प्रणालियों में हमेशा बैकडोर एंट्री या डेटा लीक का खतरा बना रहता है. स्वदेशी विकास के जरिए भारत अब अपनी तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित कर रहा है. एयर वाइस मार्शल आर. गुरुहरि के अनुसार, यह साझेदारी अकादमिक शोध और जमीनी अनुभव का अद्भुत मेल है. यह प्रोजेक्ट न केवल वायुसेना को मजबूत करेगा बल्कि भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई ऊर्जा देगा.
अभेद्य होगी भारत की हवाई सुरक्षा
IIT-मद्रास और वायुसेना का यह संयुक्त अभियान भविष्य के युद्धों की तैयारी है. जब हमारे विमानों का संचार अभेद्य होगा, तभी हमारी मारक क्षमता भी अचूक होगी. यह सीक्रेट फॉर्मूला भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास अपनी खुद की सुरक्षित संचार तकनीक है. आने वाले समय में इसके वर्किंग प्रोटोटाइप तैयार होंगे जो भारतीय आसमान की सुरक्षा को और भी सख्त बना देंगे.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

