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Women Welfare Schemes: कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना, मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना, महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना और बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी योजनाओं ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा असर डाला है. इन योजनाओं के जरिये राज्य सरकारें महिलाओं तक सीधी आर्थिक मदद पहुंचा रही हैं, जिससे एक तरफ़ महिला मतदाताओं में सीधा जुड़ाव बढ़ा है, तो दूसरी ओर सरकारी खजाने पर बोझ भी बढ़ा है.
तमाम राजनीतिक दल महिला वोट बैंक को रिझाने के लिए पैसे बांटने में जुटे हैं.देश के राज्यों में महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर (Direct Cash Transfer) देना अब नई राजनीतिक और सामाजिक नीति का हिस्सा बन गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर में पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि अब 12 राज्य ऐसी योजनाएं चला रहे हैं, जबकि 2022-23 में यह संख्या सिर्फ दो थी. के अनुसार, इन योजनाओं पर इस वर्ष कुल 1.68 लाख करोड़ रुपये यानी देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.5% खर्च होने का अनुमान है. दो साल पहले यह आंकड़ा 0.2% से भी कम था.
कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना, मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना, महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना और बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी योजनाओं ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा असर डाला है. इन योजनाओं के जरिये राज्य सरकारें महिलाओं तक सीधी आर्थिक मदद पहुंचा रही हैं, जिससे एक तरफ़ महिला मतदाताओं में सीधा जुड़ाव बढ़ा है, तो दूसरी ओर राजकोषीय बोझ भी बढ़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए असम और पश्चिम बंगाल ने भी अपने-अपने बजट में इन योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर आवंटन बढ़ाया है.
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें
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