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West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. उससे पहले चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट को दुरुस्त और अपडेट करने को लेकर विशेष SIR अभियान चलाया गया. इसको लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई में विरोध प्रदर्शन भी किया गया. इससे प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया.
West Bengal SIR: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई है. (फाइल फोटो/PTI)West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) अभियान चलाया गया. अब इसकी अंतिम प्रक्रिया चल रही है. जिन वोटर्स का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया, वे SIR को लेकर चल रही सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख रहे हैं. इस दौरान दो दुखद घटनाओं में दो बुजुर्गों की मौत हो गई. अब इस मामले ने नया मोड़ आ गया है. दोनों मृतक बुजुर्गों के परिजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है. मौत के लिए इन दोनों को जिम्मेदार ठहराया गया है. इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में उबाल आने की संभावना है.
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (एसआईआर) से जुड़ी सुनवाई नोटिस मिलने के बाद दो बुजुर्ग मतदाताओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. मृतकों के परिजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. परिजनों का आरोप है कि गलत तरीके से भेजे गए नोटिस के कारण बुजुर्गों पर मानसिक दबाव पड़ा, जिससे उनकी जान चली गई. पुरुलिया जिले के 82 वर्षीय मतदाता दुर्जन मांझी के बेटे कनाई मांझी ने बताया कि उनके पिता का नाम 2002 SIR लिस्ट में दर्ज था, लेकिन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड 2002 की ऑनलाइन सूची में नाम नहीं दिखा. इसी वजह से उनके पिता को सुनवाई का नोटिस भेजा गया. कनाई के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद उनके पिता काफी घबरा गए और तय सुनवाई से कुछ घंटे पहले चलती ट्रेन के आगे कूद गए, जिससे उनकी मौत हो गई.
हावड़ा में भी मौत
इसी तरह हावड़ा के 64 वर्षीय जमात अली शेख की मौत का मामला भी सामने आया है. उनके बेटे का आरोप है कि उनके पिता वैलिड वोटर थे, फिर भी उन्हें सुनवाई का नोटिस भेजा गया. परिवार का कहना है कि नोटिस के बाद वे मानसिक तनाव में आ गए और उसी दिन उनकी मौत हो गई. परिजनों ने सीईसी और सीईओ पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है. इस बीच, चुनाव आयोग ने 27 दिसंबर को जारी एक अधिसूचना में कहा था कि ऐसे करीब 1.3 लाख मतदाता जिनके नाम 2002 की फिजिकल SIR लिस्ट में हैं, लेकिन तकनीकी खामी के कारण ऑनलाइन डेटाबेस में नहीं दिख रहे, उन्हें सुनवाई में उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी. आयोग ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया था.
क्या CEC के खिलाफ दर्ज हो सकती है FIR?
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि सीईसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती, क्योंकि कानून इस बारे में स्पष्ट है. अधिकारी ने यह भी कहा कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय किसी सीईओ को आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता. यदि पुलिस इस तरह की एफआईआर दर्ज करती है तो उसके कानूनी परिणाम होंगे. उधर, मंगलवार को एक और दुखद घटना सामने आई. पूर्व मेदिनीपुर जिले में 75 वर्षीय बिमल शी नामक बुजुर्ग, जिन्हें सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद काफी तनाव में बताया जा रहा था, अपने घर में फंदे से लटके मिले. इस घटना ने मतदाता सूची से जुड़े नोटिसों और बुजुर्गों पर पड़ने वाले मानसिक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद राज्य में चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

