West Bengal News: पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान के नेटवर्क को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच ने बड़े और चिंताजनक खुलासे किए हैं. बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को भारतीय पहचान उपलब्ध कराने के मामले में ईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. इसमें एक पाकिस्तानी नागरिक का नाम सामने आना इस केस को और संवेदनशील बना देता है. इसी कड़ी में सवाल उठने लगे हैं कि क्या बंगाल अवैध प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है.
क्या है पूरा मामला?
ED कोलकाता जोन ने अजद मलिक और उसके सहयोगियों के खिलाफ पहला सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया है. यह चार्जशीट 11 दिसंबर को कोलकाता स्थित विशेष ईडी अदालत में दायर की गई थी. अदालत ने आरोपियों को नोटिस भी जारी कर दिया है. ईडी ने यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा अजद मलिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. जांच में सामने आया कि अजद मलिक दरअसल पाकिस्तानी नागरिक आजाद हुसैन है, जो भारत में फर्जी पहचान के जरिए रह रहा था.
अजद मलिक कौन है और उसकी भूमिका क्या रही?
ED की जांच के मुताबिक आजाद हुसैन ने अजद मलिक नाम की फर्जी पहचान के तहत भारत में रहकर अवैध गतिविधियां कीं. उसने इंदुभूषण हलदर दुल्ला की मदद से बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के लिए भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार करवाए. इस पूरे खेल में आधार कार्ड, पैन कार्ड और भारतीय पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज फर्जी जानकारी के आधार पर बनवाए गए. हर व्यक्ति से लगभग ₹50,000 की रकम वसूली जाती थी.
कैसे बनाया गया फर्जी पहचान का नेटवर्क?
जांच में सामने आया कि आजाद मलिक और इंदुभूषण हलदर ने मिलकर बड़े पैमाने पर पासपोर्ट आवेदनों को रेफर किया.
- करीब 300 से 400 पासपोर्ट आवेदन उनके जरिए भेजे गए.
- कई मामलों में ITR और टैक्स रसीदें एक जैसी पाई गईं.
- इन दस्तावेज़ों पर आयकर विभाग की जरूरी मुहर तक नहीं थी.
कुछ मामलों में जन्मतिथि से जुड़ी गंभीर विसंगतियां मिलीं, जो साफ तौर पर जालसाजी की ओर इशारा करती हैं.
हवाला और सीमा-पार पैसे का खेल
ED जांच में यह भी सामने आया कि अजद मलिक ने भारत-बांग्लादेश के बीच अवैध धन प्रेषण के लिए हवाला नेटवर्क चलाया. नकद और UPI के जरिए भारत में पैसे जुटाए जाते थे और फिर bKash जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से बांग्लादेश में रकम ट्रांसफर की जाती थी. यह पहलू इस केस को सिर्फ फर्जी दस्तावेज़ तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे आर्थिक अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ देता है.
फॉरेक्स कंपनी की संदिग्ध भूमिका
ED ने एम/एस गोल्डेनाइज़ फॉरेक्स एंड ट्रैवल्स प्रा. लि. की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. जांच में पाया गया कि RBI से लाइसेंस प्राप्त होने के बावजूद कंपनी और उसके निदेशकों ने नियमों का उल्लंघन किया. पाकिस्तानी नागरिक अजद मलिक को बिना वैध दस्तावेज़ों के फॉरेक्स काउंटर संचालित करने की अनुमति दी गई और कमीशन के बदले विदेशी मुद्रा की बिक्री कराई गई.
क्यों गंभीर है यह मामला?
यह मामला इसलिए संवेदनशील है क्योंकि इसमें पाकिस्तानी नागरिक की संलिप्तता.m बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय पहचान, हवाला और फॉरेक्स नेटवर्क, बड़े पैमाने पर पासपोर्ट जालसाजी जैसे पहलू सामने आए हैं. ED की चार्जशीट ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ फर्जी दस्तावेजें का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है. जांच अब यह तय करेगी कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें और कौन-कौन शामिल है.

