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Supreme Court Verdict on West Bengal DA Case: पश्चिम बंगाल के 20 लाख लोगों को आज यानी गुरुवार को बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को झटका देते हुए सरकारी कर्मचारियों को डीए देने का आदेश दिया है.

ममता बनर्जी को डीए मामले में सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है.
Supreme Court West Bengal DA Case Verdict: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है, जो ममता सरकार के खिलाफ और बंगाल के लोगों के हक में है. जी हां, पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख लोगों को मिली सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. डीए से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले को बरकरार रखा है. गुरुवार को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता (डीए) का भुगतान करना होगा. आदेश के मुताबिक, राज्य सरकार को होली के आसपास तक बकाया डीए का 25% भुगतान करना होगा. शेष 75% किस्तों में देना होगा.
भाजपा नेता शुभेंदी की पहल पर राहत
दरअसल, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की पहल और मदद पर सरकारी कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 20 लाख लोगों को महंगाई भत्ता देना होगा. अदालत ने साल 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता दिए जाने का आदेश दिया है.
कब तक देना होगा पैसा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पहले दिए गए अंतरिम आदेश के मुताबिक बकाया DA का 25% हिस्सा 6 मार्च तक दिया जाए. इसके साथ ही बकाया का बाकी हिस्सा किस्तों मे कैसे दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत की पूर्व जज इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता मे कमेटी का गठन किया है.
अदालत ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल ने अपने फैसले में कहा कि महंगाई भत्ता (डीए) परिवर्तनशील है. डीए का भुगतान एआईसीपीआई के अनुसार होना चाहिए. अदालत ने कहा कि डीए का भुगतान दो बार नहीं किया जा सकता. हालांकि, श्रमिकों की डीए की मांग कानूनी रूप से वैध है. इसलिए, डीए में देरी नहीं होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डीए का भुगतान रोपा नियम और एआईसीपीआई के अनुसार होना चाहिए. डीए का भुगतान अवश्य होना चाहिए.
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