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पीएम मोदी और शरद पवार की मुलाकात से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज. NDA में शामिल होने या अजित पवार गुट से फिर से जुड़ने की अटकलें.
एनसीपी-एसपी के चीफ शरद पवार ने पीएम मोदी से मुलाकात की है.
Sharad Pawar Meet PM Modi: एक तरफ राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे विपक्षी दलों के साथ सीजेपी के बैनर तले चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे. दूसरी तरफ संसद परिसर में हुई एक मुलाकात ने पूरे राजनीतिक माहौल का फोकस बदल दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गईं. दोनों नेताओं की मुस्कुराते हुए बातचीत करती तस्वीरों ने सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे INDIA गठबंधन की बेचैनी बढ़ा दी. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पिछले कई दिनों से शरद पवार गुट के एनडीए में शामिल होने या अजित पवार गुट के साथ फिर से एक होने की अटकलें लगातार तेज हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री आवास से आई तस्वीरों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है.
तस्वीरों ने क्यों बढ़ाई हलचल?
संसद में हुई मुलाकात की तस्वीरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शरद पवार का स्वागत करते दिखाई दिए. दूसरी तस्वीर में दोनों नेता हंसते हुए बातचीत कर रहे थे. राजनीति में तस्वीरें कई बार शब्दों से ज्यादा संदेश देती हैं. यही वजह है कि इस मुलाकात को लेकर अलग-अलग तरह के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे. हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष ने इस मुलाकात को राजनीतिक समझौते से जोड़कर नहीं देखा है. लेकिन समय और परिस्थितियों ने इसे बेहद अहम बना दिया है.
क्या NDA की ओर बढ़ रहे हैं शरद पवार?
सूत्रों के मुताबिक एनसीपी (एसपी) के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर लगातार चर्चा चल रही है. एक फॉर्मूले पर भी बातचीत होने की खबर है, जिसके तहत पहले शरद पवार और अजित पवार के गुट एक हो सकते हैं. इसके बाद एनडीए में शामिल होने की संभावना पर फैसला लिया जा सकता है. अगर दोनों गुटों का विलय नहीं होता तो भी शरद पवार गुट के अलग से एनडीए में शामिल होने या बाहर से समर्थन देने जैसे विकल्पों पर चर्चा बताई जा रही है. सूत्रों का दावा है कि अगले 8 से 15 दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है.
क्यों बदल सकते हैं समीकरण?
शरद पवार गुट के कई विधायक और सांसद मानते हैं कि सत्ता से दूर रहने की तुलना में सरकार का हिस्सा बनने से संगठन को फायदा होगा. इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी को विस्तार का मौका मिलेगा. महाराष्ट्र में भी बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है. अगर शरद पवार गुट एनडीए के साथ जाता है तो इसका असर सिर्फ राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा.
परिसीमन विधेयक से भी जोड़कर देखी जा रही चर्चा
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र में परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक आगे बढ़ा सकती है. ऐसे में सरकार को विशेष बहुमत की जरूरत पड़ सकती है. शरद पवार गुट के पास लोकसभा में 8 सांसद और राज्यसभा में एक सांसद हैं. ऐसे में उनका समर्थन सरकार के लिए अहम माना जा रहा है. हालांकि, पार्टी ने अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है.
सुप्रिया सुले ने क्या कहा?
एनसीपी (एससीपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर साफ किया है कि पार्टी के रुख को लेकर चल रही कई खबरें अटकलों पर आधारित हैं. उन्होंने कहा कि संवैधानिक महत्व के किसी भी मुद्दे पर फैसला पार्टी के भीतर चर्चा और INDIA गठबंधन के सहयोगियों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा. इससे पहले उन्होंने परिसीमन को लेकर कहा था कि अगर सरकार सभी राज्यों के लिए 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की लिखित गारंटी देती है, तभी पार्टी आगे चर्चा करेगी.
शरद पवार की चुप्पी भी बनी चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया है. जब उनसे पार्टी में टूट या एनडीए में जाने की संभावना पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा- अभी इस विषय पर बात करने का समय नहीं है. राजनीति में कई बार चुप्पी भी अपने आप में एक संदेश मानी जाती है. इसलिए उनके इस जवाब के भी अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं.
INDIA गठबंधन के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान INDIA गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था और शरद पवार उसकी सबसे मजबूत कड़ियों में रहे. ऐसे में अगर उनके रुख में कोई बदलाव आता है तो इसका सीधा असर विपक्ष की एकजुटता पर पड़ सकता है. फिलहाल न तो शरद पवार ने कोई औपचारिक घोषणा की है और न ही भाजपा या एनडीए की ओर से कोई पुष्टि हुई है. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात और उसके बाद सामने आई तस्वीरों ने इतना जरूर कर दिया है कि राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र अब विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती सियासत बन गई है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

