वाइट हाउस ने अपने बयान में कहा है कि सऊदी अरब अमेरिका में 600 बिलियन का निवेश करेगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और भी मजबूत होंगे। इन सौदों में सऊदी अरब की नई सरकारी AI कंपनी, हुमैन का एक बड़ा समझौता भी शामिल है। हुमैन अगले पांच सालों में आधुनिक चिप्स का इस्तेमाल करके AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगी। ट्रंप के रियाद दौरे पर ये समझौता हुआ है।
अमेरिका में होगा भारी निवेश
व्हाइट हाउस ने बताया है कि सऊदी अरब को 142 अरब डॉलर के स्टेट-ऑफ-द-आर्ट वॉरफाइटिंग इक्विपमेंट दिए जाएंगे। यह सौदा कई अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ किया गया है। इसके तहत सऊदी अरब को एयर फ़ोर्स, स्पेस कैपेबिलिटी, मिसाइल डिफेंस, समुद्री और सीमा सुरक्षा, लैंड फोर्स मॉडर्नाइजेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम अपग्रेड जैसी चीजें मिलेंगी।
डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार से सऊदी अरब, कतर और यूएई के चार दिन के दौरे पर हैं। उनके इस दौरे में का मकसद एक ट्रिलियन से ज्यादा के सौदे और निवेश हासिल करना हैं। कतर, सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात अमेरिकी हथियारों के सबसे बड़े खरीदार हैं और अमेरिका से अच्छे संबंध रखते हैं। इन सभी देशों ने AI में भारी निवेश करने की योजना बनाई है।
मंत्रियों के साथ रियाद पहुंचे हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप के साथ रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऊर्जा सचिव क्रिस राइट और वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक भी आए हैं। ट्रंप सऊदी अरब के बाद कतर और यूएई का दौरा करेंगे। ट्रंप के इस दौरे का उद्देश्य अमेरिका में इन खाड़ी देशों से निवेश लाना है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि वह इस यात्रा का उपयोग सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों के साथ आर्थिक समझौते शुरू करने के लिए करना चाहता है।

