Rafale Deal Big Update: फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है. इससे पहले भारत ने एयरफोर्स के लिए 36 और नौसेना के लिए 26 राफेल खरीद चुका है. बावजूद इसके फ्रांस भारत को इस डील में वह सहूलियत नहीं दे रहा है जिसका वह हकदार है. दरअसल, दुनिया के हथियार बाजार में राफेल को चमकाने वाला भारत है. भारतीय वायु सेना ने ही सबसे पहले राफेल को एक शानदार विमान बताया था. भारतीय एयरफोर्स के सर्टिफिकेशन के दम पर ही फ्रांस ने दुनिया के बाजार में अपने इस जेट की मार्केटिंग की और जमकर ऑर्डर बटोरे. लेकिन, अब भारत के साथ डील में उसने फिर एक चाल चल दी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भारत को क्यों नहीं अपने फिफ्थ जेन फाइटर जेट एम्का प्रोजेक्ट का इंतजार करना चाहिए?
भारत तेजस मार्क-1ए और तेजस मार्क-2 विमान बना रहा है जो 4.5 पीढ़ी के जेट हैं. तेजस मार्क-2 को 4.5+ पीढ़ी के राफेल के टक्कर का जेट बताया जा रहा है. लेकिन, इसका प्रोटोटाइप उड़ान अटका हुआ है. इसमें भी इंजन की सप्लाई में दिक्कत और अन्य बाहरी कारण ही सबसे बड़े रोड़ा हैं. इस बीच भारत अपना फिफ्थ जेन एम्का प्रोग्राम चला रहा है. सरकार की योजना 2035 तक इस विमान को हर हाल में एयरफोर्स के बेड़े में शामिल करने का है लेकिन यह प्रोजेक्ट भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहा है.
राफेल डील में अड़चन
अब आते हैं राफेल डील पर. इन परिस्थितियों में फ्रांस से 114 राफेल काफी अहम हो जाता है. दरअसल, यहां यह बात समझनी होगी कि फाइटर जेट खरीदना कोई कार या बाइक खरीदने जैसा नहीं है जो शोरूम गए और खरीद कर लेते आए. फाइजर जेट की खरीद एक जटिल प्रक्रिया है. क्योंकि ये बेहद संवेदनशील हथियार हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अगर नजर दौड़ाएं तो भारत के सामने बहुत सीमित विकल्प है. भारत अमेरिकी फाइटर जेट नहीं खरीदता क्योंकि उनका रख रखाव बहुत महंगा है. इतना ही नहीं भारत के पास अधिकतर हथियार रूस निर्मित हैं. इस कारण उनको अमेरिकी फाइटर जेट में फिट करना बहुत मुश्किल काम है. इसी तरह भारत चीन से भी फाइटर जेट नहीं खरीद सकता क्योंकि चीन से भारत की सीधी दुश्मनी है. बचा यूरोप तो उसके पास भी अब वो रुतबा नहीं, जो कभी हुआ करता था. उसके जेट और अन्य हथियार अब बहुत शानदार नहीं हैं. ले देकर भारत के पास दो ही विकल्प हैं- रूस और फ्रांस. रूस के यू्क्रेन युद्ध में उलझने के कारण उसका सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है. दूसरी बात की उसके आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट सुखोई-57 में कई कमियां बताई जा रही है. ऐसे में भारतीय वायु सेना के पास एक ही विकल्प बचता है वो है फ्रांसीसी राफेल विमान.
राफेल की गिनती मौजूदा वक्त में दुनिया के एक सबसे बेहतरीन विमानों में होती है. फोटो- रायटर
फ्रांस ने चली चाल
फ्रांस की एक बिजनेस न्यूज वेबसाइट L’Essentiel de l’Éco ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि कंपनी राफेल के थेल्स आरबीई2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकी स्कैंड अरे (AESA) रडार, मॉड्यूलर डाटा प्रोसेसिंग यूनिट (MDPU) और स्पेक्ट्रा (SPECTRA) इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट के सोर्स कोड शेयर नहीं करेगी. मॉड्यूलर डाटा प्रोसेसिंग यूनिट (MDPU) को फाइटर जेट का दिमाग कहा जाता है. इन तीन चीजों के बिना विमान एक डब्बे से ज्यादा कुछ नहीं बचता है.
सोर्स कोड बेहद संवेदनशील मसला
ऐसे में सवाल उठता है कि इतना महंगा विमान खरीदने के बावजूद भारत को इतनी छूट नहीं मिलेगी तो फिर हमारे लिए यह विमान किस काम के होंगे. यह ठीक है फ्रांस के साथ हमारे रिश्ते अच्छे हैं और पूर्व के अनुभवों को देखते हुए कहा जा सकता है कि भविष्य में इन विमानों में भारतीय हथियार एंटीग्रेट करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन, यह एक तकनीकी मुद्दा है. फ्रांस को ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि दुनिया में इतनी बड़ी संख्या में राफेल विमान खरीदने वाला भारत एक मात्र देश है.

