QUAD Meeting 2025 News: अमेरिका-भारत, अमेरिका-जापान के बीच संबंधों में तनाव को देखते हुए इस साल होने वाले क्वाड समिट पर खतरा मंडरा रहा है. इस मामले के जानकार लोगों का कहना है कि इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन (QUAD Summit) आयोजित होने की संभावना नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सदस्य देशों के घरेलू मुद्दे और अमेरिका-भारत और अमेरिका-जापान के बीच ट्रेड टेंशन के कारण नई दिल्ली में आयोजित की जाने वाली यह महत्वपूर्ण बैठक स्थगित हो सकती है.
इस गर्मी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगा दिया था, जिससे भारत और अमेरिका के रिश्तों में पहली बार इतना तनाव आया. इससे पहले, क्वाड के सदस्य देश- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया इस साल नवंबर में शिखर सम्मेलन की संभावना पर नजर बनाए हुए थे. ऐसा माना जा रहा है कि अब शायद ही क्वाड की बैठक संभव हो पाए, जो दिल्ली में आयोजित होने वाली है.
समिट असंभव लग रहा
अगर क्ववाड की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की मानें तो ‘इस साल शिखर सम्मेलन का होना बहुत ही असंभव लग रहा है. ऐसी बैठकों के लिए हफ्तों की तैयारी की जरूरत होती है, जबकि अभी तक बुनियादी तौर-तरीकों पर भी काम शुरू नहीं हुआ.
ट्रंप भी नहीं आएंगे दिल्ली
वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स के हवाले से एक दूसरे अधिकारी ने बताया, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नवंबर में दिल्ली आना बहुत मुश्किल है, खासकर तब जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर बातचीत चल रही हो. उसे देखते हुए, ऐसा लग रहा है कि व्यापार मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति होने पर ही यह दौरा संभव होगा.’
अमेरिका में हुई थी मुलाकात मगर…
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लिया था. कुछ नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं, लेकिन क्वाड पर पर बात नहीं हुई, कम से कम मीडिया में तो इसे लेकर बात नहीं ही हुई. वहीं, क्वाड के दो देशों के अधिकारियों ने कहा कि शिखर सम्मेलन के लिए होटल के कमरों तक की बुकिंग अभी तक नहीं हुई है.
रिश्ते हुए कंप्लीकेटेड
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच तनाव के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत और वरिष्ठ भारतीय एवं अमेरिकी अधिकारियों के बीच बैठकों के बाद संबंधों में नरमी आई है. यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के अपने प्रयासों के तहत, अमेरिका रूसी तेल और रक्षा हार्डवेयर की खरीद को लेकर भारत पर दबाव बना रहा है. वाशिंगटन ने हाल ही में प्रतिबंधों में दी गई छूट को रद्द कर दिया है, जिससे नई दिल्ली को ईरानी बंदरगाह चाबहार विकसित करने की अनुमति मिली थी. साथ ही ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर कर दिया था, जिससे भारत को तगड़ा झटका लगा था क्योंकि भारतीय ही सबसे ज्यादा एच-1बी वीजा धारक हैं.

