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Cadila Drug Ban : भारतीय फार्मा कंपनी कैडिला ने बिना अनुमति समान दवा के नाम से प्रोडक्ट बनाकर बाजार में बेचना शुरू कर दिया. महाराष्ट्र के एफडीए ने कंपनी पर कार्रवाई करते हुए प्रोडक्ट बेचने पर रोक लगा दी और 2.45 करोड़ की दवाएं जब्त भी कर ली हैं.
भारतीय कंपनी कैडिला की एसीलॉक दवा की बिक्री पर रोक लगा दी गई है.
नई दिल्ली. अल्सर, एसिडिटी और सीने में जलन जैसे लक्षणों पर इस्तेमाल होने वाली जानी-मानी दवा पर महाराष्ट्र सरकार ने रोक लगा दी है. कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की इस दवा के नाम से मिलती जुलती कई दवाएं बाजार में बिक रही हैं. इससे उपभोक्ताओं को होने वाले नुकसान को देखते हुए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बिक्री पर रोक लगा दी है. साथ ही एफडीए ने 2.45 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त भी किया है.
एफडीए के अधिकारियों ने बताया कि कैडिला की दवाओं के ब्रांड नाम में समानता के कारण कंपनी की कुछ दवाओं की बिक्री एवं वितरण पर रोक लगा दी है और राज्यभर में करीब 2.45 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त किया है. यह कार्रवाई ‘एसीलॉक 150’, ‘एसीलॉक 150 प्लस’, ‘एसीलॉक 300’ और ‘एसीलॉक 300 प्लस’ नाम की दवाओं से जुड़ी है, जिनमें सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) रैनिटिडीन एवं फैमोटिडीन का इस्तेमाल किया गया है.
कंपनी को निर्देश, वापस मंगाएं दवा
एफडीए ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह इन सभी दवाओं के उपलब्ध स्टॉक को तत्काल बाजार से वापस मंगाए. साथ ही ‘एसीलॉक 150 प्लस’ और ‘एसीलॉक 300 प्लस’ की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि दवा के ब्रांड नाम में किसी भी तरह की समानता, जिससे डॉक्टर, फार्मासिस्ट या मरीज को गलत दवा मिलने की आशंका हो, जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है. लिहाजा मामले समाधान होने तक इन दवाओं की बिक्री पर रोक रहेगी.
कंपनी ने अपनी मर्जी से बना लिए प्रोडक्ट
एफडीए ने बताया कि कंपनी को पहले रैनिटिडीन आधारित ‘एसीलॉक 150’ और ‘एसीलॉक 300’ के विनिर्माण की मंजूरी मिली थी, लेकिन बाद में उसने ‘एसीलॉक 150 प्लस’ और ‘एसीलॉक 300 प्लस’ नाम से फैमोटिडीन आधारित दवाएं लगभग समान ब्रांडिंग के साथ बाजार में उतार दीं जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई. एफडीए निरीक्षण के दौरान 9-10 जुलाई को पुणे, नागपुर और ठाणे जिले के भिवंडी स्थित गोदामों से कुल 2,45,37,490 रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं.
डायरेक्शन के खिलाफ है कंपनी का कदम
एफडीए ने कहा कि बदली हुई संरचना वाली दवाओं को लगभग समान ब्रांड नाम से बाजार में उतारना दिशानिर्देशों के खिलाफ है. इस मामले की जांच जारी है और निष्कर्ष के आधार पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कंपनी को सिर्फ एक ही प्रोडक्ट बनाने की अनुमति मिली थी, लेकिन कैडिला ने बाद में अपनी मर्जी से इसी नाम से मिलती-जुलती दवा बनाकर बाजार में बेचनी शुरू कर दी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

