Business
oi-Kumari Sunidhi Raj
New
Labour
Code:
भारत
में
काम
करने
वाले
लाखों
लोगों
के
लिए
सामाजिक
सुरक्षा
से
जुड़ा
बदलाव
अब
इतिहास
बनाने
जा
रहा
है।
लंबे
समय
से
कर्मचारी
मांग
कर
रहे
थे
कि
सरकारी
सामाजिक
सुरक्षा
योजनाओं
में
परिवार
की
परिभाषा
बहुत
छोटी
है
और
इससे
कई
आश्रित
सदस्य
बाहर
रह
जाते
हैं।
Code
on
Social
Security
(CSS)
2020
ने
इस
महत्वपूर्ण
चिंता
को
समझते
हुए
ऐसा
सुधार
किया
है,
जिसकी
चर्चा
देशभर
में
हो
रही
है।
यह
बदलाव
सिर्फ
कागज
पर
किया
गया
संशोधन
नहीं
है,
बल्कि
यह
उन
परिवारों
के
लिए
उम्मीद
की
एक
नई
किरण
है,
जहां
एक
ही
सदस्य
की
कमाई
पर
घर
के
कई
लोग
निर्भर
होते
हैं।
बदलती
पारिवारिक
संरचना,
शहरों
की
व्यस्त
जीवनशैली
और
महिलाओं
की
बढ़ती
भागीदारी
को
देखते
हुए
नई
परिभाषा
को
कर्मचारी
हित
में
एक
बड़ा
कदम
माना
जा
रहा
है।

नए
नियम
में
परिवार
की
परिभाषा
कैसे
बढ़ाई
गई?
नई
परिभाषा
के
तहत
अब
कर्मचारी
अपने
कई
प्रमुख
रिश्तेदारों
को
सामाजिक
सुरक्षा
लाभों
में
शामिल
कर
सकते
हैं।
इसमें
नाना-नानी
को
भी
जगह
दी
गई
है,
जिन्हें
पहले
परिवार
की
श्रेणी
में
नहीं
माना
जाता
था।
इसके
अलावा,
कर्मचारी
अपने
पूरी
तरह
आश्रित
छोटे
भाई
को
भी
जोड़
सकता
है,
बशर्ते
वह
नौकरी
न
करता
हो
और
आर्थिक
रूप
से
कर्मचारी
पर
निर्भर
हो।
इसी
तरह
अविवाहित
बहन,
जो
खुद
कमाने
में
सक्षम
नहीं
है
और
कर्मचारी
की
आय
पर
निर्भर
रहती
है,
उसे
भी
शामिल
किया
जा
सकता
है।
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किन
बुजर्गों
से
वापस
ली
जाएगी
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पेंशन
की
रकम?
किस
वजह
से
विभाग
ने
उठाया
ये
कदम?
सबसे
बड़ा
बदलाव
महिला
कर्मचारियों
के
लिए
किया
गया
है,
जिन्हें
अब
अपने
सास-ससुर
को
भी
सामाजिक
सुरक्षा
योजनाओं
में
जोड़ने
की
अनुमति
मिल
गई
है।
यह
बदलाव
खासतौर
पर
उन
महिलाओं
के
लिए
राहत
लेकर
आया
है
जो
नौकरी
के
साथ-साथ
घर
के
बुजुर्गों
की
देखभाल
भी
करती
हैं,
क्योंकि
अब
वे
अपने
सास-ससुर
को
भी
सरकारी
योजनाओं
का
सीधा
लाभ
दिला
पाएंगी।
कौन-कौन
सी
योजनाओं
में
लागू
होगा
नया
नियम?
यह
परिभाषा
अब
इन
सभी
प्रमुख
सरकारी
सामाजिक
सुरक्षा
योजनाओं
पर
लागू
होगी-
-
ESIC
(Employees’
State
Insurance
Corporation) -
EPF
(Employees’
Provident
Fund) -
ग्रेच्युटी
(Gratuity) -
दुर्घटना
मुआवजा
(Compensation
for
workplace
accidents)
चाहे
कर्मचारी
स्थायी
हो
या
फिक्स्ड
टर्म
पर
काम
करता
हो,
दोनों
को
समान
लाभ
मिलेंगे।
हालांकि,
कंपनी
की
अपनी
ग्रुप
हेल्थ
पॉलिसी
या
मेडिक्लेम
पर
यह
बदलाव
खुद-ब-खुद
लागू
नहीं
होगा।
पहले
क्या
था
और
अब
क्या
बदल
गया?
पहले
की
स्थिति
-
परिवार
की
परिभाषा
बहुत
सीमित
थी। -
कर्मचारी
केवल
पति/पत्नी,
बच्चे,
माता-पिता
और
अविवाहित
बेटियों
को
ही
जोड़
सकता
था। -
अदालतों
ने
भी
कई
बार
कहा
कि
इससे
बाहर
के
रिश्तेदारों
को
शामिल
नहीं
किया
जा
सकता।
अब
की
स्थिति
-
नाना-नानी
को
पहली
बार
परिवार
की
श्रेणी
में
शामिल
किया
गया। -
आश्रित
छोटा
भाई
और
अविवाहित
बहन
अब
योजनाओं
का
हिस्सा
बन
सकेंगे। -
महिला
कर्मचारी
अपने
सास-ससुर
को
भी
जोड़
सकती
हैं। -
इससे
सामाजिक
सुरक्षा
का
दायरा
पहले
से
कहीं
ज्यादा
बड़ा
और
व्यावहारिक
हो
गया
है।
आश्रितों
को
जोड़ने
के
लिए
क्या
सबूत
देने
होंगे?
किसी
भी
रिश्तेदार
को
सामाजिक
सुरक्षा
योजना
में
जोड़ने
से
पहले
कर्मचारी
को
यह
साबित
करना
होगा
कि
वह
व्यक्ति
आर्थिक
रूप
से
उन्हीं
पर
निर्भर
है।
इसके
लिए
आमतौर
पर
मांगे
जा
सकते
हैं-
-
आश्रित
का
पहचान
प्रमाण -
आय
का
हलफनामा
(अगर
हो) -
ऐसा
कोई
दस्तावेज
जो
दिखाए
कि
वह
व्यक्ति
खुद
कमाने
में
सक्षम
नहीं
है
या
उसका
खर्च
कर्मचारी
उठाता
है -
ये
दस्तावेज
योजना
के
अनुसार
बदल
भी
सकते
हैं।
तलाक
या
अलगाव
की
स्थिति
में
क्या
होगा?
अगर
किसी
कर्मचारी
का
तलाक
हो
जाता
है,
तो
महिला
के
लिए
सास-ससुर
या
पुरुष
के
लिए
ससुराल
पक्ष
के
रिश्ते
कानूनी
रूप
से
खत्म
मान
लिए
जाएंगे।
ऐसे
में
वे
सामाजिक
सुरक्षा
लाभों
के
दायरे
में
नहीं
रहेंगे।
इसीलिए
सलाह
दी
जाती
है
कि
शादी,
तलाक
या
परिवार
में
किसी
बड़े
बदलाव
के
बाद
कर्मचारी
अपनी
आश्रितों
की
सूची
तुरंत
अपडेट
कर
दें।
यह
बदलाव
क्यों
जरूरी
था?
भारत
में
पारिवारिक
संरचना
तेजी
से
बदल
रही
है।
संयुक्त
परिवारों
की
संख्या
भले
कम
हो
रही
हो,
लेकिन
कई
घरों
में
एक
कमाने
वाले
सदस्य
पर
ही
पूरा
घर
निर्भर
रहता
है।
पहले
की
सीमित
परिभाषा
से
ऐसे
परिवारों
को
काफी
मुश्किल
होती
थी।
अब
परिवार
का
दायरा
बढ़ने
से-
-
ज़्यादा
आश्रितों
को
सुरक्षा
मिलेगी -
इलाज,
दुर्घटना
या
आपात
स्थितियों
में
त्वरित
मदद
मिलेगी -
महिला
कर्मचारियों
को
ससुराल
पक्ष
के
बुजुर्गों
के
लिए
ज्यादा
सुविधा
मिल
सकेगी -
सामाजिक
सुरक्षा
योजनाओं
का
उद्देश्य
और
मजबूत
हो
सकेगा
यह
बदलाव
कर्मचारियों
के
अधिकारों
और
परिवार
की
जरूरतों
को
ध्यान
में
रखकर
बनाया
गया
है।
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