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सदन के भीतर एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया है. साथ ही विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने का ऐलान किया है.

किरेन रिजीजू ने राहुल गांधी से प्रमाण देने की मांग की.
कई दिनों की जद्दोजहद के बाद राहुल गांधी लोकसभा में बोले तो हंगामा खड़ा हो गया. उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों पर आरोप लगाए, प्रधानमंत्री पर निशाना साधा. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. रिजीजू ने राहुल गांधी को ललकारते हुए कहा, ‘या तो प्रमाण दो, या फिर माफी मांगो.’ रिजीजू ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने सदन की गरिमा को ताक पर रखकर प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ सफेद झूठ बोला है, जिसके लिए बीजेपी उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने जा रही है.
किरेन रिजीजू ने राहुल गांधी के उन दावों पर कड़ा ऐतराज जताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री ने देश के राष्ट्रीय हितों को बेच दिया है. रिजीजू ने तीखे अंदाज में कहा, सदन के पटल पर मैंने खुद राहुल गांधी से अनुरोध किया था कि वे जो आरोप लगा रहे हैं, उनके आवश्यक प्रमाण पेश करें. लेकिन उन्होंने बिना किसी तथ्यात्मक आधार के निराधार और भ्रामक बातें कहीं. यह केवल प्रधानमंत्री का अपमान नहीं, बल्कि पूरे सदन को गुमराह करने की कोशिश है.
हरदीप सिंह पुरी को लेकर दिए बयान पर फंसे?
विवाद केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं रहा. रिजीजू के अनुसार, राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर उन पर जो व्यक्तिगत और गंभीर आरोप लगाए हैं, वे विशेषाधिकार का खुला उल्लंघन हैं. रिजीजू ने कहा कि किसी मंत्री के खिलाफ बिना किसी ठोस दस्तावेज के इस तरह की बयानबाजी करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले को हल्के में नहीं लेंगे. रिजीजू ने कहा, मैं स्पीकर के समक्ष इस गंभीर उल्लंघन के खिलाफ आवश्यक नोटिस दाखिल करने जा रहा हूं.”
‘झूठ बोलकर भाग गए राहुल’
बीजेपी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि जब तथ्यों पर जवाब देने और सबूत रखने की बारी आई, तो राहुल गांधी सदन से दूरी बनाकर ‘भाग’ गए. रिजीजू ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन सदन के भीतर बिना प्रमाण के किसी के चरित्र पर कीचड़ उछालने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष पर होंगी. अगर वे इस नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो राहुल गांधी को विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है, जो उनके लिए बड़ी कानूनी और संसदीय मुश्किलें पैदा कर सकता है.
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