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JEE Main vs Advanced: जेईई मेन परीक्षा का पहला सेशन 21 जनवरी 2026 से शुरू होगा. आईआईटी में एडमिशन के लिए जेईई मेन के बाद जेईई एडवांस भी पास करना जरूरी है. जानिए जेईई मेन और जेईई एडवांस के बीच खास अंतर.
JEE Main vs Advanced: जेईई मेन और एडवांस्ड के बीच कई बड़े अंतर हैंनई दिल्ली (JEE Main vs Advanced). इंजीनियरिंग की दुनिया में कदम रखने की चाह रखने वाले हर स्टूडेंट के लिए जेईई मेन्स और जेईई एडवांस्ड दो ऐसे मील के पत्थर हैं, जो देखने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन असल में बिल्कुल अलग हैं. जेईई मेंस में स्पीड, एक्यूरेसी और बेसिक समझ की परीक्षा ली जाती है, वहीं जेईई एडवांस्ड गहरी वैचारिक स्पष्टता और कठिन परिस्थितियों में समस्या सुलझाने की क्षमता परखता है. जेईई मेंस पास करने के बाद ही जेईई एडवांस में शामिल हो सकते हैं.
जेईई मेन और जेईई एडवांस में क्या अंतर है?
जेईई की तैयारी करने वाले हर स्टूडेंट को समझना चाहिए कि मेंस क्लियर करना और एडवांस्ड में रैंक लाना, दो अलग-अलग बातें हैं.
जेईई मेन और जेईई एडवांस में किस पर फोकस होता है?
- जेईई मेंस का मुख्य फोकस ‘एप्लिकेशन’ पर होता है. यहां सवाल सीधे फॉर्मूले पर आधारित या थोड़े घुमावदार हो सकते हैं. आपको 3 घंटे में 75 सवाल (90 में से) हल करने होते हैं यानी यहां स्पीड और एक्यूरेसी का खेल सबसे बड़ा है.
- जेईई एडवांस्ड का कोई फिक्स्ड पैटर्न नहीं होता. यह ‘कॉन्सेप्ट्स का कॉम्बिनेशन’ है यानी एक ही सवाल में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के कई कॉन्सेप्ट एक साथ उलझा सकते हैं. इसके सवाल हल करने से ज्यादा जरूरी यह चुनना है कि कौन सा सवाल छोड़ना है.
जेईई मेन और जेईई एडवांस की तैयारी कैसे करें?
कई कैंडिडेट्स को समझ में नहीं आता है कि दोनों परीक्षाओं की तैयारी का तरीका कब बदलें. इसका सही समय जेईई मेंस के पहले सत्र के ठीक बाद होता है.
- मेंस के लिए: आपका फोकस एनसीईआरटी (NCERT) की हर लाइन, पिछले वर्षों के मेंस पेपर और मॉक टेस्ट पर होना चाहिए. यहां आपको ‘सिलेबस कवरेज’ पर ध्यान देना चाहिए.
- एडवांस्ड के लिए: जैसे ही आपका मेंस का स्कोर सुरक्षित हो जाए, तुरंत ‘मल्टी-कॉन्सेप्ट’ सवालों की प्रैक्टिस शुरू कर दें. अब 1 सवाल पर 15-20 मिनट खर्च करने की आदत डालें. एडवांस्ड के लिए गहराई (Depth) जरूरी है, न कि केवल सिलेबस को ऊपर-ऊपर से पढ़ना.
समस्या सुलझाने का नजरिया
- जेईई मेंस- अगर आपको फॉर्मूला याद है और आपने प्रैक्टिस की है तो आप सफल हो जाएंगे. लेकिन एडवांस्ड में हर साल ‘अनदेखे’ सवाल आते हैं.
- जेईई एडवांस- इसमें ऑन-द-स्पॉट नया लॉजिक डेवलप करना जरूरी है. इसलिए एडवांस्ड की तैयारी करते समय ‘क्यों और कैसे’ पर ज्यादा ध्यान दें, न कि केवल ‘क्या’ पर.
मार्किंग स्कीम और जोखिम
जेईई एडवांस्ड परीक्षा ‘नेगेटिव मार्किंग’ और ‘पार्शियल मार्किंग’ के लिए जानी जाती है. यहां ‘मल्टीपल करेक्ट’ (एक से अधिक सही विकल्प) वाले सवाल छात्रों को उलझाते हैं. जेईई मेंस में रिस्क लेना कभी-कभी फायदेमंद होता है, लेकिन एडवांस्ड में एक गलत कदम आपकी पूरी रैंक बिगाड़ सकता है.
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