पीओके की पूरी डेमोग्राफी क्या
पीओके और पाकिस्तान का अवैध कब्जा
पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर पाकिस्तान का राज है. पाकिस्तान ने भारत के इस हिस्से को दो भागों में बांट रखा है. एक का नाम उसने दिया है आजाद जम्मू-कश्मीर और दूसरे का नाम है गिलगित-बाल्टिस्तान. पीओके का कुल क्षेत्रफल करीब 86,000 वर्ग किलोमीटर है. यहां करीब 60 लाख से अधिक लोग रहते हैं. यहां ज्यादातर मुस्लिम आबादी रहती है. पाकिस्तान ने भले इस पर कब्जा जमा रखा है, मगर इसके साथ सौतेला व्यवहार करता है. यहां की आवाम पर जुल्म ढाता है. इस इलाके को पाकिस्तान अपने फायदे के लिए यूज करता है. पाकिस्तान पीओके गुमनामी में रखता है. यहां रहने वाले लोग भारत में मिलने को बेताब हैं. यही कारण है कि समय-समय पर पीओके में पाकिस्तान से अलग होने की मांग करते हैं और भारत में शामिल किए जाने को लेकर आंदोलन करते रहते हैं.
पीओके पर पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका ने भारत का साथ दिया है.
अब जानते हैं कि कैसे पाकिस्तान ने PoK पर कब्जा किया?
दरअसल, साल 1947 में भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था. आजादी के साथ भारत को एक दर्द भी मिला था. वो था बंटवारे का. उसी साल भारत-पाकिस्तान बंटवारा हुआ. तब जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी. यहां महाराजा हरि सिंह का राज था. जब बंटवारा हुआ तब उन्होंने न भारत में शामिल होना चाहा, न पाकिस्तान में. वे स्वतंत्र रहना चाहते थे. भारत ने उनकी भावना का सम्मान किया, मगर पाकिस्तान किसी भी कीमत पर उसे अपने में मिलाना चाहता था. इसलिए पाकिस्तान ने प्लान बनाया. तभी अक्टूबर के आसपास पाकिस्तान की तरफ वाले कबायली ने हरि सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इसे पाकिस्तान समर्थक कबायली आक्रमण कहा गया. पाकिस्तान के समर्थक कबायली (पश्तून) और पाकिस्तानी सेना के लोग छिपकर कश्मीर में घुस आए. इन पाकिस्तानी कबायलियों और सैनिकों ने मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों पर कब्जा कर लिया. महाराजा हरि सिंह को मजबूरन भारत की मदद मांगनी पड़ी. इसके बाद महाराजा ने भारत में शामिल होने का इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन साइन किया. जब तक भारत की सेना पहुंचती, तब तक जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था. भारत ने पाकिस्तान से जंग लड़ी, मगर युद्ध विराम तक जिसके हिस्से में जो कब्जा था, उसका ही हो गया. जम्मू-कश्मीर के जिस हिस्से पर पाकिस्तान ने उस वक्त कब्जा किया, उसे ही आज पीओके कहते हैं. यहां के लोग दो ही डिमांड करते हैं. या तो उन्हें आजाद कर दिया जाए या भारत में मिला दिया जाए.
पीओके के बारे में और जानिए
- पीओके में लोग कृषि पर निर्भर हैं. मक्का, गेहूं, फल, अखरोट, शहद मुख्य पैदावार है. कुछ कोयला, बॉक्साइट जैसे खनिज हैं. लेकिन विकास बहुत कम हुआ.
- पाकिस्तान ने इसके साथ सौतेला व्यवहार किया. सड़कें खराब, स्कूल-कॉलेज कम, अस्पताल कम हैं. यहां बेरोजगारी अधिक है. यहां की आवाम पाकिस्तान के चंगुल से छुटने को छटपटा रही है.
- पीओके में पश्तो, उर्दू, कश्मीरी और पंजाबी भाषाएं बोली जाती हैं.
- पीओके का एक बड़ा हिस्सा हुनज़ा गिलगिट, शक्सगाम घाटी और रक्साम है. पाकिस्तान ने बाल्टिस्तान के इलाके 1963 में चीन को सौंपे थे. इस सत्तांतरित इलाके को ट्रांस काराकोरम कहा जाता है.
- भारतीय जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहलाया, जिस पर 1947 के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान ने कब्ज़ा कर लिया था.
- पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुज़फ्फराबाद है. यहां 8 ज़िले मीरपुर, भीमबर, कोटली, मुज़फ्फराबाद, बाग, नीलम, सूधानोटी और रावलकोट के अलावा 19 तहसीलें और 182 संघीय परिषदें हैं.
भारत को अमेरिका का साथ कैसे मिला?
दरअसल, यूएसटीआर यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अंतरिम फ्रेमवर्क से जुड़ा एक पोस्ट किया. अमेरिका ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘ट्री नट्स और सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन से लेकर लाल ज्वार और ताज़े और प्रोसेस्ड फलों तक, अमेरिका-भारत एग्रीमेंट अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए नए मार्केट एक्सेस देगा.’ मगर इस पोस्ट के साथ जारी नक्शे ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. अमेरिका की ओर से जारी यह नक्शा सिर्फ एक तस्वीर नहीं है, उसकी सोच का बड़ा संकेत है. भारत हमेशा कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका भारत का अभिन्न अंग है. इसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी हैं. अब अमेरिका के आधिकारिक अकाउंट से ऐसा नक्शा आने का मतलब है कि वाशिंगटन भारत की इस बात को मान रहा है. यही कारण है कि अब पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है.

