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India Thailand Air Force: अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमान और थाई एयर फोर्स के SAAB Gripen जेट्स ने एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग में हिस्सा लिया. लंबी दूरी के ऑपरेशन के लिए भारतीय IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और AWACS विमान भी इस्तेमाल किए गए. भारतीय विमान अंडमान-निकोबार के एयरबेस से और थाई विमान थाईलैंड के एयरबेस से ऑपरेट हुए.

भारतीय वायुसेना और थाई एयर फोर्स ने हिंद महासागर में संयुक्त हवाई अभ्यास किया.
नई दिल्ली. हिंद महासागर का आसमान 9 से 12 फरवरी 2026 तक लड़ाकू विमानों की गर्जना से गूंजता रहा. भारतीय वायुसेना (IAF) और रॉयल थाई एयर फोर्स (RTAF) ने एक साथ मिलकर ऐसा शक्ति प्रदर्शन किया है, जिसने दक्षिण-पूर्व एशिया में शक्ति संतुलन को हिलाकर रख दिया है. अंडमान-निकोबार से लेकर थाईलैंड तक चले इस ‘हवाई युद्ध अभ्यास’ (Air Combat Exercise) का मकसद सिर्फ दोस्ती बढ़ाना नहीं, बल्कि दुश्मनों को अपनी ताकत का एहसास कराना था. भारत की ‘Act East’ पॉलिसी के तहत हुई इस ड्रिल ने थाईलैंड को एक ‘बाहुबली’ बना दिया है, और इसका सीधा असर उसके पड़ोसी और प्रतिद्वंद्वी कंबोडिया (Cambodia) पर पड़ने वाला है.
कंबोडिया पर कैसे भारी पड़ेगा थाईलैंड?
इस अभ्यास का सबसे बड़ा रणनीतिक संदेश कंबोडिया के लिए है. थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद (विशेषकर प्रीह विहार मंदिर के पास) और थाईलैंड की खाड़ी में तेल-गैस संसाधनों को लेकर पुराना तनाव है. कंबोडिया की वायुसेना के पास न तो आधुनिक फाइटर जेट्स हैं और न ही कोई खास एयर डिफेंस सिस्टम. दूसरी ओर, थाईलैंड के पास ‘SAAB Gripen’ जैसे घातक जेट्स हैं.
सुखोई का अनुभव: इस अभ्यास में थाई पायलट्स ने भारत के दुनिया के सबसे बेहतरीन फाइटर जेट्स में से एक Su-30MKI के खिलाफ और साथ में उड़ान भरी. ‘फ्लैंकर’ क्लास के इन भारी विमानों के साथ ‘डॉगफाइट’ (Dogfight) की ट्रेनिंग लेने के बाद थाई पायलट्स का कॉम्बैट लेवल बहुत हाई हो गया है.
कंबोडिया की लाचारी: अगर भविष्य में कोई टकराव होता है, तो थाईलैंड (जिसे अब भारत जैसी महाशक्ति का साथ और ट्रेनिंग मिल रही है) कंबोडिया की वायुसेना को मिनटों में घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है. यह अभ्यास कंबोडिया के लिए एक ‘चेतावनी’ है कि वह थाईलैंड से उलझने की गलती न करे.
मिड-एयर रिफ्यूलिंग और AWACS: लंबी दूरी की मार
इस अभ्यास में सिर्फ फाइटर जेट्स ही नहीं उड़े. भारत ने अपने IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को भी मैदान में उतारा. AWACS के जरिए थाईलैंड ने सीखा कि कैसे सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन को देख कर लॉक किया जाता है. हवा में ईंधन भरने की तकनीक सीखने से रॉयल थाई एयर फोर्स की मारक क्षमता (Reach) बढ़ गई है. अब वे अपनी सीमाओं से बहुत दूर जाकर भी ऑपरेशन कर सकते हैं, जो कंबोडिया के लिए एक बुरा सपना है.
अंडमान से भरी उड़ान, चीन को भी संदेश
भारतीय विमानों ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से उड़ान भरी, जो मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के मुहाने पर है. यह अभ्यास चीन के लिए भी एक संदेश है, जो कंबोडिया का समर्थन करता रहा है. भारत ने दिखा दिया है कि वह अपने दोस्तों (थाईलैंड) के साथ खड़ा है और हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर के मुहाने तक अपनी ताकत प्रोजेक्ट कर सकता है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

