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Youth Politics: तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल करने का प्रस्ताव पास कराने जा रही है. सीएम रेड्डी ने कहा कि देश में 30% आबादी वाले जेन-जी का संसद में 1% से भी कम प्रतिनिधित्व है. दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने पीएम मोदी से केंद्रीय स्तर पर भी यह बदलाव लागू करने की अपील की. अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मानती है तो Gen Z भी 21 की उम्र में सांसद और विधायक बन पाएंगे.
जेन-जी को बड़ी ताकत मिलने वाली है.
नई दिल्ली. राजनीति के बड़े-बड़े महारथियों के पसीने छुड़ाने वाले जेन-जी के हाथों में अब सिर्फ तख्तियां नहीं बल्कि देश चलाने की असली कमान भी आ सकती है. दिल्ली की सड़कों से जब सत्ता के गलियारों तक युवाओं की हुंकार गूंजी तो सत्ता के ऊंचे एवानों में हलचल मच गई. अब 21 साल की खिलखिलाती उम्र में ही देश का युवा चुनावी समर में उतरकर सीधे विधानसभा का दरवाजा खटखटा सकेगा. तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार इस तैयारी में है. रेवंत रेड्डी सरकार अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास कराने जा रही है. इस विधेयक के जरिए विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु सीमा को 25 साल से घटाकर 21 साल करने की सिफारिश केंद्र सरकार से की जाएगी. अगर यह लागू होता है तो 21 साल के युवा भी अब चुनाव जीतकर विधानसभा और संसद पहुंच सकेंगे.
देश की 30% आबादी, लेकिन संसद में 1% से भी कम
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस कदम का ऐलान करते हुए कहा कि देश में 1998 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं यानी जेन-जी की आबादी करीब 30 प्रतिशत है लेकिन संसद में इनका प्रतिनिधित्व 1 प्रतिशत से भी कम है. रेवंत रेड्डी ने कहा कि युवाओं की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने 2021 के किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब युवा और जनता सड़कों पर उतरते हैं तो बड़ी से बड़ी सरकारों को अपने फैसले वापस लेने पड़ते हैं.
दिल्ली में प्रदर्शन और छात्रों की जीत का जिक्र
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र प्रदर्शनों और देश के राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “आज मुझे अपने जेन-जी भाइयों और बहनों के चेहरे पर जीत की मुस्कान दिख रही है. युवाओं के बुलंद इरादों ने शिक्षा मंत्री तक को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया.” हालांकि, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार पर दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों से निपटने के रवैये को लेकर तीखा हमला बोला.
युवाओं के हाथों में होगी राजनीति की कमान
तेलंगाना सरकार के इस कदम को देश भर के युवाओं के लिए एक क्रांतिकारी पहल माना जा रहा है. दिल्ली से लेकर हैदराबाद तक छात्र आंदोलनों के प्रभाव ने यह साबित कर दिया है कि युवा अब मूकदर्शक बनने को तैयार नहीं हैं. 21 साल में विधायकी का हक मिलने से देश की मुख्यधारा की राजनीति में युवाओं की भूमिका हमेशा के लिए बदल सकती है.
केंद्र सरकार और पीएम मोदी से अपील
तेलंगाना सरकार ने केंद्र से क्या मांग की है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पीएम नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे संसद में परिसीमन, सीटों की बढ़ोतरी और महिला आरक्षण के साथ-साथ युवाओं के लिए चुनाव लड़ने की उम्र 21 साल करने का केंद्रीय विधेयक भी पेश करें.
प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए सीएम ने क्या कहा?
उन्होंने मांग की कि आंदोलन के दौरान मारे गए बच्चों के परिवारों को केंद्र सरकार मुआवजा दे और छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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