CJP Protest Supreme Court: विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर दिल्ली को बंधक बनाए जाने और आम जनजीवन ठप करने की प्रशासनिक कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राजधानी में लगाई गई सख्त पाबंदियों पर अहम दिशा-निर्देश जारी करते हुए साफ किया है कि कानून-व्यवस्था के नाम पर नागरिकों की बुनियादी आजादी और सामान्य आवाजाही को मनमाने ढंग से नहीं छीना जा सकता. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत लोक-व्यवस्था बिगड़ने की सीधी और अनिवार्य आशंका न हो, तब तक दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित की जाएं.
पीठ ने शहर में लोगों की निर्बाध आवाजाही और सुगम यातायात सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि राजधानी भर में लगाए गए भारी-भरकम बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जाए. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि इंटरनेट सेवाएं कानून के दायरे में बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि इससे आईटी एक्ट के कानूनी अधिकार खत्म नहीं होते, लेकिन सामान्य स्थिति में इंटरनेट बंद करने की मनमानी इजाजत नहीं दी जा सकती.
शांतिपूर्ण जमावड़े और गैरकानूनी हिरासत पर सख्त हिदायत
नागरिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए पीठ ने रेखांकित किया कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा जाएगा. अदालत ने कहा कि जिन इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं है, वहां नागरिकों को कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और प्रदर्शन करने की पूरी आजादी है.
सुप्रीम कोर्ट के 5 निर्देश
1. मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी, सिवाय तब जब संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था में खलल को देखते हुए नियम लागू करने की जरूरत हो.
2. शहर में लोगों और ट्रैफिक की आवाजाही… इसी तरह, ट्रैफिक नियमों के अधीन शहर में लोगों की आवाजाही की अनुमति होगी. लगाए गए बैरिकेड्स की समीक्षा की जाएगी. कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की अन्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, बैरिकेड्स लगाने की जरूरत की तुरंत समीक्षा की जाएगी.
3. कानून के अनुसार इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी… जब हम कहते हैं कि इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी, तो हम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत मिली शक्तियों को वापस नहीं ले रहे हैं. शहर में लोगों की सुचारू आवाजाही में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी; कानून के अनुसार इसकी अनुमति होगी.
4. कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना किसी को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर उन लोगों के मामले में जो उस इलाके के बाहर जमा होते हैं जहां ये नियम लागू हैं. कानून के अनुसार लोगों के जमा होने की अनुमति होगी, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां शांतिपूर्ण तरीके से लोग जमा हो रहे हों और जहां BNSS की धारा 163 लागू नहीं है.
5. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमें बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट और उसके आस-पास के इलाकों में BNSS की धारा 163 लागू होने के बारे में एक नोटिस बोर्ड लगाया गया है. हम संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि अगर ऐसा नहीं किया गया है तो वे इस बोर्ड को हटा दें… ताकि नागरिकों और वकीलों को न्याय मिल सके.”

