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Deepjyoti Kakoti Success Story: 120 सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन, अनगिनत रिजेक्शन और फिर एक साथ 3 नौकरियों में सेलेक्शन! जानिए असम के दीपज्योति काकोटी की अनोखी कहानी, जिन्होंने अपनी जिद और मेहनत के दम पर न सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल की, बल्कि 3 रिकॉर्ड बुक्स में भी अपना नाम दर्ज कराया.
Deepjyoti Kakoti Success Story: दीपज्योति काकोटी ने 2 साल में 120 फॉर्म भरे
नई दिल्ली (Deepjyoti Kakoti Success Story). प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक या दो परीक्षाओं में रिजेक्शन मिलने के बाद खुद को दोबारा संभालना काफी मुश्किल होता है. ऐसे दौर में डिप्रेशन या हताशा हावी होने लगती है. लेकिन असम के रहने वाले दीपज्योति काकोटी की कहानी साबित करती है कि अगर आपकी जिद और हिम्मत मजबूत हो तो बार-बार मिलने वाली असफलता भी आखिरकार घुटने टेक ही देती है.
आर्थिक तंगी और लगातार असफलता का दौर
असम के शिवसागर जिले के छोटे से गांव खेमदोई के रहने वाले दीपज्योति काकोटी बेहद साधारण लोअर-मिडिल क्लास परिवार से हैं. इनके लिए सरकारी नौकरी सिर्फ एक जॉब नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का जरिया है. दीपज्योति ने 2019 से 2021 के बीच 120 भर्ती परीक्षाओं के फॉर्म भरे. इस दौरान रेलवे, SSC, बैंक और राज्य स्तरीय भर्तियों समेत कई परीक्षाओं में रिजेक्शन मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने हर रिजेक्शन को अपनी कमजोरी जानने और उसे सुधारने का मौका माना.
रिजेक्शन की रसीदें बनीं रिकॉर्ड की चाबी
दीपज्योति जितने भी फॉर्म भरते थे, उनकी एप्लिकेशन स्लिप, एडमिट कार्ड, पेमेंट रसीदें और रिजेक्शन लेटर्स संभालकर रखते गए. फिर उन्होंने अपने लंबे संघर्ष का रिकॉर्ड सबके सामने लाने का फैसला किया. रिकॉर्ड बुक्स के लिए अप्लाई किया तो अफसरों ने भी माना कि इतने आवेदन करने और हार न मानकर डेटा सुरक्षित रखने का यह पहला अनूठा मामला है. वेरिफिकेशन के बाद उनके धैर्य को मान्यता मिली और उनका नाम असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया.
3 नौकरियों के मिले लेटर, ऐसे चुना सही करियर
उनकी अटूट लगन का फल एक साथ 3 सरकारी नौकरियों के जॉइनिंग लेटर के रूप में मिला. एक समय वह नौकरी के लिए परेशान हो रहे थे और अब उनके पास 3 में से किसी 1 को चुनने की आजादी थी. उन्होंने अपनी प्रायोरिटी और करियर गोल्स के हिसाब से 2 नौकरियों से इस्तीफा दिया और सबसे उपयुक्त सरकारी नौकरी जॉइन कर ली.
दीपज्योति की कहानी से कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वालों को क्या सीख मिलती है?
- बैकअप और रिकॉर्ड्स रखें: हर एग्जाम के फॉर्म और सिलेबस का ट्रैक रखने से समझ आता है कि आपकी कहां मजबूती है और कहां कमजोरी.
- असफलता को अंतिम न मानें: कॉम्पिटिटिव वर्ल्ड में एक परीक्षा में फेल होना आपके करियर का अंत नहीं होता, हमेशा नए मौकों की तलाश जारी रखें.
- अनुशासन ही सफलता की कुंजी है: दीपज्योति की कहानी साबित करती है कि रेगुलर प्रैक्टिस और असफलता से न डरने का जज्बा ही आपको भीड़ से अलग बनाता है.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
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