परिजनों के दावे को सीबीआई ने किया था खारिज
मृतक कमलेश प्रजापति के एनकाउंटर के तीन महीने बाद इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द किया गया था। सीबीआई ने लंबे समय तक गहन जांच की। सीबीआई ने अपनी जांच में कहा कि प्राप्त किए गए सबूतों से यह कहना बहुत मुश्किल है कि कमलेश प्रजापति को फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में मृतक के परिजनों के दावे को खारिज कर दिया था। मार्च 2023 में मृतक कमलेश की पत्नी जसोदा ने कोर्ट में याचिका लगाई कि पूर्व में इस केस की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी एएसपी पुष्पेंद्र आढा का कोई पक्ष नहीं रखा गया है। ऐसे में प्रतीत होता है कि सीबीआई ने निष्पक्ष जांच नहीं की। जसोदा के इस दावे के आधार पर कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
इन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
एसीजेएम (सीबीआई) कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए 2 आईपीएस अधिकारियों सहित कुल 24 पुलिस अफसरों और कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अब बाड़मेर के तत्कालीन पाली एसपी कालूराम रावत, बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा सहित 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में केस दर्ज करके जांच की जाएगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तत्कालीन राजस्व मंत्री (वर्तमान कांग्रेस विधायक) हरीश चौधरी, उनके भाई मनीष चौधरी और तत्कालीन आईजी नवज्योति गोगोई को भी इस मामले की जांच में शामिल करते हुए घटना में उनकी भूमिका की जांच की जाए।
पुलिस ने यह दावा किया था
एनकाउंटर के बाद एडिशनल एसपी पुष्पेंद्र सिंह आढा का कहना था कि पुलिस की टीम कमलेश प्रजापति को पकड़ने के लिए उसके घर गई थी। उस समय कमलेश ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक कमलेश अपनी एसयूवी गाड़ी से गेट तोड़कर भागने लगा था। तब पुलिस टीम के कमांडो ने फायरिंग की। इस दौरान उसे गोली लगी जिसके कारण उसकी मौत हो गई। एनकाउंटर के बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन में 59 लाख 69 हजार 50 रुपए की नकदी, कई लग्जरी वाहनों सहित 11 अलग-अलग कंपनी की गाड़ियां, 5 अवैध पिस्टल, 9 मैगजीन, 121 कारतूस, 2 किलो 360 ग्राम अफीम का दूध, 1 किलो 715 ग्राम डोडा-पोस्त, 13 मोबाइल, 4 डोंगल और एक एटीएम पुलिस को मिले थे।

