Delhi IGI Airport News: कभी उसकी गिनती इंटरनेशनल लेवल का कबड्डी प्लेयर के तौर पर होती थी और अब उसे कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी भी मिल गई थी. लेकिन रुपयों के लालच में वह ऐसे गंदे खेल का हिस्सा बन गया, जिसने उसे दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में डाल दिया. करीब छह साल की लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और उसे अहमदाबाद एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है.
कौन है गुरमृतपाल सिंह मुल्तानी?
डीसीपी विचित्र वीर के अनुसार, 54 वर्षीय गुरअमृतपाल सिंह मुल्तानी पंजाब का रहने वाला है, जिसने अपने करियर की शुरुआत एक कबड्डी प्लेयर के तौर पर की थी. पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने पंजाब की गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के लिए इंटरनेशनल लेवल पर कबड्डी खेली और 1996-97 में कनाडा के हैमिल्टन पंजाब स्पोर्ट्स क्लब के लिए भी मैदान में उतरा. लेकिन 1995 में वह अपने परिवार के साथ कनाडा शिफ्ट हो गया और 1999 में उसे कनाडा की परमानेंट रेजिडेंसी मिल गई.
यहीं से उसकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. पैसों की लालच में पड़कर मुल्तानी ने फर्जी दस्तावेजों का धंधा शुरू कर दिया. उसने लोगों को विदेश भेजने के लिए नकली वीजा, पासपोर्ट और सर्टिफिकेट्स मुहैया कराने शुरू कर दिए. 2019 में उसने दो लोगों के लिए फर्जी कंटीन्यूअस डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (सीडीसी) बनवाए, जिसके लिए उसने प्रति व्यक्ति 20 लाख रुपये वसूले. ये सीडीसी समोआ सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ ट्रांसपोर्ट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम से बनाए गए थे. जांच में समोआ सरकार ने सर्टिफिकेट्स को फर्जी बताया था.
इस तरह पाली की करतूतों का खुलासा
डीसीपी विचित्रवीर के अनुसार, 27 सितंबर 2019 को आईजीआई एयरपोर्ट के इमिग्रेशन डिपार्टमेंट की तरह से एक शिकायत दर्ज कराई गई थी. इस शिकायत में बताया गया था कि इथियोपिया से 9 भारतीय पैसेंजर्स को डिपोर्ट किया गया है. डिपोर्टेशन की वजह उके पास मिले फर्जी सीडीसी थे. इस शिकायत के बाद आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की. इस मामले में आरोपियों खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (फर्जीवाड़ा), 471 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज किया गया.
जांच में पता चला कि इन यात्रियों को फर्जी CDC गुरमृतपाल सिंह मुल्तानी ने अपने जालंधर के एक साथी मंजीत के जरिए बनवाए थे. जांच के दौरान दो पैसेंजर्स ने मुल्तानी का नाम लिया और बताया कि उसने हर एक से 20 लाख रुपये लिए थे. पुलिस ने तुरंत मुल्तानी को पकड़ने की कोशिश शुरू की, लेकिन तब तक वो कनाडा में था. छह साल तक वो पुलिस की पकड़ से बाहर रहा, लेकिन जैसे ही वो भारत लौटा पुलिस ने अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उसे धर दबोचा.
क्या है सीडीसी और क्यों है जरूरी?
पुलिस रिकॉर्ड्स चेक करने पर पता चला कि मुल्तानी कोई नया खिलाड़ी नहीं है. उसके खिलाफ पहले से ही सात केस दर्ज हैं, जिनमें ज्यादातर फर्जी वीजा, पासपोर्ट और दस्तावेजों से जुड़े हैं. इनमें से चार केस 2009 के हैं, एक 2012 का, एक 2019 का और एक 2021 का है. सभी केस आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं. उल्लेखनीय है कि आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने सितंबर 2025 में फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुल 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
कंटीन्यूअस डिस्चार्ज सर्टिफिकेट (CDC) एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो समुद्री जहाजों पर काम करने वाले क्रू मेंबर्स के लिए जरूरी होता है. ये सर्टिफिकेट उनके काम के रिकॉर्ड को ट्रैक करता है और उनकी पहचान को वैरिफाई करता है. लेकिन मुल्तानी जैसे एजेंट्स इस सिस्टम का गलत फायदा उठाते हैं और फर्जी सीडीसी बनाकर लोगों को विदेश भेजने का धंधा करते हैं.

