International
oi-Sumit Jha
Nepal
Gen-Z
Protest:
नेपाल
इन
दिनों
भीषण
उथल-पुथल
से
गुजर
रहा
है।
राजधानी
काठमांडू
की
सड़कों
पर
हजारों
की
संख्या
में
युवा
सोशल
मीडिया
बैन
और
भ्रष्टाचार
के
खिलाफ
सड़कों
पर
उतर
आए
हैं।
प्रदर्शन
इतना
उग्र
हो
गया
कि
संसद
भवन
तक
प्रदर्शनकारी
घुस
गए
और
कई
जगह
आगजनी
की
घटनाएं
हुईं।
हालात
बेकाबू
होते
देख
नेपाल
सरकार
ने
कर्फ्यू
लगाने
के
साथ
ही
सेना
की
तैनाती
का
आदेश
दिया
है।
वहीं
भारत
ने
भी
एहतियात
बरतते
हुए
नेपाल
सीमा
पर
सुरक्षा
और
चौकसी
कड़ी
कर
दी
है।
अब
तक
इस
हिंसक
विरोध
प्रदर्शन
में
कई
लोगों
की
मौत
और
सौ
से
ज्यादा
लोगों
के
घायल
होने
की
खबर
है।

संसद
में
घुसकर
आगजनी,
पुलिस
की
गोलीबारी
में
मौतें
काठमांडू
और
कई
शहरों
में
विरोध
प्रदर्शन
लगातार
उग्र
होता
जा
रहा
है।
प्रदर्शनकारियों
ने
संसद
भवन
के
गेट
नंबर-2
के
पास
आग
लगा
दी
और
तोड़फोड़
शुरू
कर
दी।
जवाबी
कार्रवाई
में
पुलिस
ने
आंसू
गैस
और
पानी
की
बौछार
का
इस्तेमाल
किया,
लेकिन
हालात
काबू
में
न
आते
देख
गोलियां
चलाईं।
पुलिस
फायरिंग
में
अब
तक
18
लोगों
की
मौत
हो
चुकी
है
और
100
से
ज्यादा
घायल
हुए
हैं।
राजधानी
समेत
पोखरा
और
इटहरी
जैसे
शहरों
में
भी
झड़पें
हुई
हैं।
गंडकी
प्रदेश
के
मुख्यमंत्री
कार्यालय
पर
भी
प्रदर्शनकारियों
ने
पथराव
किया।
सोशल
मीडिया
बैन
बना
विरोध
का
बड़ा
कारण
नेपाल
सरकार
ने
हाल
ही
में
फेसबुक,
ट्विटर,
यूट्यूब
और
वॉट्सऐप
जैसे
26
सोशल
मीडिया
प्लेटफॉर्म्स
पर
बैन
लगा
दिया
था।
सरकार
का
कहना
है
कि
ये
बैन
तब
तक
नहीं
हटेगा,
जब
तक
कंपनियां
नेपाल
में
अपना
ऑफिस
नहीं
खोलतीं
और
सरकार
के
साथ
पंजीकरण
नहीं
करतीं।
वहीं
युवाओं
का
कहना
है
कि
सोशल
मीडिया
सिर्फ
मनोरंजन
का
जरिया
नहीं,
बल्कि
सूचना
और
अभिव्यक्ति
का
सबसे
बड़ा
माध्यम
है।
इसी
के
चलते
विरोध
पहले
ऑनलाइन
शुरू
हुआ
और
अब
सड़कों
पर
हिंसक
रूप
ले
चुका
है।
भारत-नेपाल
सीमा
पर
बढ़ी
चौकसी
नेपाल
की
बिगड़ती
स्थिति
को
देखते
हुए
भारत
ने
भी
सतर्कता
बढ़ा
दी
है।
भारत-नेपाल
बॉर्डर
की
सुरक्षा
संभाल
रही
SSB
ने
अतिरिक्त
सुरक्षाकर्मी
और
सर्विलांस
तैनात
कर
दिया
है।
सीमा
पर
हर
आने-जाने
वाले
की
सख्ती
से
जांच
हो
रही
है।
सूत्रों
के
मुताबिक
हालात
सामान्य
होने
तक
चौकसी
और
निगरानी
और
कड़ी
रहेगी।
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भारत
के
पड़ोस
में
Gen
Z
क्यों
उतर
आए
सड़कों
पर?
स्कूल
यूनिफॉर्म
में
प्रदर्शन,
खतरे
में
सरकार?
क्यों
गुस्से
में
है
Gen-Z?
सोशल
मीडिया
बैन
के
खिलाफ
Gen-Z
युवाओं
का
गुस्सा
तेजी
से
उभर
रहा
है।
1997
से
2012
के
बीच
जन्मी
यह
पीढ़ी
डिजिटल
युग
में
पली-बढ़ी
है
और
सोशल
मीडिया
उनके
जीवन
का
अहम
हिस्सा
बन
चुका
है।
मीम्स,
वीडियो,
ट्रेंडिंग
चैलेंज
और
डिजिटल
कंटेंट
क्रिएशन
में
सक्रिय
Gen-Z
अब
अचानक
इन
प्लेटफॉर्म्स
से
कट
जाने
को
अपनी
आज़ादी
पर
हमला
मान
रही
है।
यही
वजह
है
कि
सोशल
मीडिया
बैन
केवल
तकनीकी
या
प्रशासनिक
कदम
नहीं
रह
गया,
बल्कि
एक
बड़े
जन-आंदोलन
का
रूप
ले
चुका
है।
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