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Sikar Kanwar Yatra: सीकर से शिवभक्तों का एक जत्था एक बार फिर अनोखी आस्था के साथ गोमुख के लिए रवाना हुआ है. श्रद्धालु पिछले 16 वर्षों से नंगे पांव लगभग 1000 किलोमीटर की कठिन यात्रा कर गोमुख से पवित्र कांवड़ जल लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. यह यात्रा श्रद्धा, अनुशासन और अटूट विश्वास का प्रतीक मानी जाती है. सावन के पावन अवसर पर निकला यह आस्था का कारवां लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है. रास्ते भर श्रद्धालु भजन-कीर्तन और भगवान शिव के जयकारों के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं.
सीकर। सावन से पहले सीकर में शिवभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. सीकर के राधाकिशनपुरा स्थित मोडी कोठी से सोमवार को 20 शिवभक्तों का जत्था गंगोत्री के लिए रवाना हुआ. यह कोई सामान्य यात्रा नहीं, बल्कि करीब 1000 किलोमीटर लंबी कठिन पदयात्रा है, जिसे पूरा करने में लगभग एक माह लगेगा. सबसे खास बात यह है कि यात्रा संघ के प्रमुख सुरेश कुमार सैनी ‘अन्ना’ लगातार 16वीं बार गोमुख से पैदल कांवड़ लेकर लौट रहे हैं. तपती सड़कें हों, पथरीले रास्ते या जंगल का दुर्गम सफर पूरी यात्रा नंगे पांव पूरी करना उनकी वर्षों पुरानी साधना बन चुकी है.
रवाना होने से पहले पालवास बगीची के भगवान दास महाराज और अमरदास महाराज ने सभी शिवभक्तों का दुपट्टा ओढ़ाकर और पुष्पवर्षा कर सम्मान किया. हर-हर महादेव के जयघोष के बीच जैसे ही जत्था रवाना हुआ, पूरा माहौल शिवमय हो गया. श्रद्धालुओं ने भी शिवभक्तों का आशीर्वाद लेकर सफल यात्रा की कामना की. सुरेश कुमार सैनी ने बताया कि इस बार 20 शिवभक्त गंगोत्री और गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर लौटेंगे. लगभग एक माह की कठिन पदयात्रा के बाद यह कांवड़ सीकर पहुंचेगी, जहां हर्ष भैरूनाथ मंदिर और हर्षनाथ पर्वत पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया जाएगा.
विश्व शांति की प्रार्थना का संकल्प
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान अधिकांश समय पैदल ही चलना होता है. ऊबड़-खाबड़ रास्ते, पहाड़ी क्षेत्र, जंगल और गर्म सड़कें इस यात्रा का हिस्सा हैं, लेकिन शिवभक्ति के आगे ये सभी कठिनाइयां छोटी लगती हैं. यात्रा से जुड़े रतनलाल सैनी ने बताया कि यह केवल कांवड़ लाने की परंपरा नहीं, बल्कि समाज, परिवार और विश्व शांति की प्रार्थना का संकल्प भी है. गणेश मंदिर संत अमरदास महाराज ने कहा कि जब यह टोली गंगोत्री से कांवड़ लेकर सीकर लौटती है तो पूरा शहर शिवमय हो उठता है. एक हजार किलोमीटर की यह कठिन पदयात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन, सेवा और अटूट आस्था का जीवंत उदाहरण है.
हर्ष पर्वत पर जलाभिषेक
गणेश मंदिर संत अमरदास महराज ने बताया कि एक माह बाद शिवभक्तों का गंगोत्री से लाए जल से सीकर के प्रसिद्ध हर्ष पर्वत पर मौजूद शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाएगा. गाजे बाजे के साथ शिव भक्तों का स्वागत किया जाएगा. हर्ष पर्वत पर मौजूद शिव मंदिर देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से हैं. भगवान शिव की पांच मुखवाली दुर्लभ मूर्ति विराजित है.
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