Last Updated:
Timeline for President: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति को राज्यपालों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर समयसीमा तय करने का निर्देश दिया, जिससे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ नाराज हो गए. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज…और पढ़ें
पूर्व SC जज अजय रस्तोगी ने राष्ट्रपति को विधेयकों पर समयसीमा देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया. (फोटो PTI)
हाइलाइट्स
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उपराष्ट्रपति धनखड़ नाराज.
- पूर्व जज अजय रस्तोगी ने धनखड़ का समर्थन किया.
- राष्ट्रपति को मजबूर करना सही नहीं: जस्टिस रस्तोगी.
रिपोर्ट- अनन्या भटनागर
राष्ट्रपति की समयसीमा पर विवाद: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिससे सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा हो गई. कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति को राज्यपालों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर फैसला लेने के लिए एक समयसीमा तय करनी होगी. इस बात पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ नाराज हो गए. उन्होंने खुलकर अपनी असहमति जताई और कहा कि कोर्ट का यह कदम ठीक नहीं है. अब इस बहस में एक और नाम शामिल हो गया. वह नाम है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी का.
जस्टिस रस्तोगी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति के लिए समयसीमा पर दिशानिर्देश देने से बचना चाहिए था. उन्होंने साफ कहा कि संविधान में ऐसी कोई समयसीमा तय नहीं है. इसलिए कोर्ट को ऐसा निर्देश नहीं देना चाहिए था. जस्टिस रस्तोगी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को किसी काम के लिए ‘मजबूर’ करना सही नहीं है और अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति नहीं देता कि वह राष्ट्रपति को कोई खास काम करने का आदेश दे.
President of India is a very elevated position. President takes oath to preserve, protect and defend the constitution. This oath is taken only by the President and the Governors.
If you look at the Indian Constitution, the President is the first part of the Parliament. Second… pic.twitter.com/Tfr8c6dPot
— Vice-President of India (@VPIndia) April 17, 2025

