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तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में सांबा धान की खेती पर गंभीर संकट मंडराने लगा है. त्रिची जिले के किसानों ने राज्य सरकार से फौरन सभी 17 सिंचाई नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की गुहार लगाई है. किसानों का आरोप है कि मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने के तीन हफ्ते बाद भी कई अहम नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा है, जिससे खेतों में तैयार धान की नर्सरी सूखने लगी है.
पानी की कमी से तमिलनाडु में सांबा धान की खेती पर संकट मंडराने लगा है.
तमिलनाडु: सांबा धान की खेती पर संकट, त्रिची के किसानों ने की 17 नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की मांग
त्रिची. त्रिची जिले के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से सभी 17 सिंचाई नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि मेट्टूर से पानी के कराइकल पहुंचने के बाद सांबा धान की नर्सरी सूख सकती हैं. किसानों ने बताया कि नहरों के माध्यम से लगातार पानी की आपूर्ति की उम्मीद में उन्होंने नर्सरी लगाई थीं. कई खेतों तक अभी तक पानी नहीं पहुंचा है, जिससे किसान इस मौसम में अपनी फसल की रोपाई को लेकर अनिश्चित हैं.
मेट्टूर से पानी छोड़ने का काम 1 सितंबर को शुरू हुआ था और रविवार को पानी कराइकल पहुंचा. उन्होंने यह भी मांग की कि अगर मौजूदा बहाव को बनाए नहीं रखा जा सका, तो इसके लिए कोई वैकल्पिक योजना बनाई जाए. मंगलवार शाम को मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 84.16 फीट था और इसमें 46.228 हजार मिलियन घन फीट पानी जमा था. जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पानी की आवक 3,867 क्यूसेक थी, जबकि 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था. पानी के प्रवाह और छोड़े जाने के बीच के अंतर ने इस चिंता को बढ़ाया है कि सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति कब तक जारी रह सकती है.
किसानों ने कहा कि मौजूदा जल प्रवाह शायद सिर्फ 25 दिनों तक ही चलेगा. उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि नहरों से पानी की आपूर्ति कम होने की स्थिति में वह फसलों को कैसे बचाएगी. पिछले साल त्रिची जिले में 54,929 हेक्टेयर जमीन पर सांबा धान की खेती की गई थी. किसानों ने कहा कि कृषि विभाग ने अभी तक मौजूदा सीजन के लिए खेती का लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया है, जिससे रोपाई की योजना बनाने में मुश्किल हो रही है.
कुछ किसानों ने कहा कि बिजली कटौती के कारण वे अपनी नर्सरी की सिंचाई के लिए इलेक्ट्रिक पंपों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने ईंधन पर सब्सिडी की मांग की, ताकि नर्सरी को बचाने के लिए डीजल पंप सेट का इस्तेमाल किया जा सके. थिरुप्पराईथुरई के किसानों ने कहा कि कावेरी से पानी छोड़े जाने के तीन हफ्ते बाद भी पुथु अय्यन नहर तक पानी नहीं पहुंचा है, जो उनकी जमीन की सिंचाई करती है. उन्होंने राज्य प्रशासन से यह बताने को कहा है कि वह पूरे जिले में फसल के नुकसान को रोकने के लिए क्या कदम उठाएगा.
उधर, तमिलनाडु अखिल किसान संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष पीआर पांडियन ने सरकार से अपील की कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कावेरी के पानी में राज्य का हिस्सा हासिल करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करे. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उय्याकोंडन समेत कुछ नहरों में पानी छोड़ा गया है. उम्मीद है कि बुधवार तक यह खेतों तक पहुंच जाएगा. डेल्टा में खेती के लिए कल्लनाई से पानी छोड़े जाने के एक दिन बाद 7 सितंबर को नहरों में पानी छोड़ा गया था. अधिकारियों ने कहा कि पानी के अलग-अलग चरणों में वितरण के कारण इसे खेतों तक पहुंचने में एक या दो दिन और लग सकते हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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