नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में धधकती जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल लिया है. पीएम मोदी ने फ्रांस, मलेशिया, ओमान और कुवैत के शीर्ष नेताओं से फोन पर बात कर कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है. पीएम मोदी ने पिछले कुछ घंटों में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम, ओमान के सुल्तान और कुवैत के क्राउन प्रिंस से लंबी बात की है. इनका सबसे बड़ा एजेंडा था- युद्ध को रोकना और बातचीत का रास्ता साफ करना. पीएम मोदी ने साफ कहा है कि अब कूटनीति और संवाद ही शांति का एकमात्र रास्ता बचे हैं. भारत की सबसे बड़ी चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर है, जहां से भारत का तेल और गैस आता है. पीएम मोदी की इस ‘सीक्रेट डिप्लोमेसी’ का ही असर है कि युद्ध के बावजूद भारत की एनर्जी सप्लाई सुरक्षित है और भारतीय जहाज सुरक्षित वतन लौट रहे हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना जंग का अखाड़ा
दुनिया के नक्शे पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ एक छोटा सा समुद्री रास्ता है, लेकिन ग्लोबल इकॉनमी की चाबी यहीं छिपी है. ईरान और अमेरिका के बीच जंग की वजह से यह रास्ता युद्ध का अखाड़ा बन गया है. अमेरिका को अपने नाटो सहयोगियों से हाथ जोड़कर वॉरशिप भेजने की अपील करनी पड़ रही है, ताकि यह रास्ता खुला रहे. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि भारत ने अपनी जादुई कूटनीति से इसी खतरे के बीच अपने तीन बड़े जहाजों को सुरक्षित निकाल लिया है. भारत के ये शिप अब भारतीय तटों पर पहुंच चुके हैं, जो मोदी सरकार की बहुत बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है.
भारत में पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने वाली है या रेडी है बैकअप प्लान?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 से 89 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. पहले हमारी तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी खतरनाक होर्मुज मार्ग पर निर्भर था. लेकिन सरकारी आंकड़ों की मानें तो भारत ने बहुत चालाकी से अपना रूट बदल लिया है. अब भारत का 70 फीसदी कच्चा तेल उन रास्तों से आ रहा है जो होर्मुज के खतरे से बाहर हैं. रूस, इराक, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से तेल का आयात बढ़ाकर भारत ने अपनी एनर्जी सुरक्षा के चारों तरफ एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी है. दैनिक 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत वाले भारत के लिए यह किसी बड़ी कामयाबी से कम नहीं है.
ओमान और कुवैत के साथ पीएम मोदी की बातचीत में क्या था वो खास ‘ईद कनेक्शन’?
भारत बनेगा इस जंग में सबसे बड़ा शांतिदूत!
मौजूदा हालात बता रहे हैं कि भारत सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि ग्लोबल शांति के लिए काम कर रहा है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई बातचीत इस बात का सबूत है कि भारत अब पश्चिमी और खाड़ी देशों के बीच एक पुल का काम कर रहा है. जहां दुनिया के बाकी देश खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं, वहीं भारत अपनी ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति के तहत हर पक्ष से बात कर रहा है.

