Opertion Sindoor: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पाकिस्तान के समर्थन में बोलने वालों पर तीखा हमला बोला है. पार्टी के आईटी सेल प्रमुख और वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने दावा किया है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान बुरी तरह दबाव में आ गया था और उसने अमेरिका में सीजफायर के लिए बड़े पैमाने पर लॉबिंग की. मालवीय ने अमेरिकी सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने इस दौरान अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों से लगभग 60 बार संपर्क किया और करीब 45 करोड़ रुपये लॉबिंग पर खर्च किए.
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह जानकारी अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत जारी दस्तावेजों से सामने आई है. उन्होंने कहा कि ये खुलासे “पाकिस्तान के पक्षधर लोगों” के लिए बुरी खबर हैं, क्योंकि इससे साफ होता है कि भारत के सैन्य अभियान ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया था. मालवीय के अनुसार, अप्रैल में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी राजनयिकों ने अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया. इसका मकसद भारत की कार्रवाई को आगे बढ़ने से रोकना और किसी तरह युद्धविराम की स्थिति बनाना था. उन्होंने कहा कि ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने बैठकों के जरिए यह प्रयास कई दिनों तक चलता रहा.
अमित मालवीय का क्या है दावा?
बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान तक तेजी से पहुंच बनाने के लिए छह लॉबिंग फर्मों को नियुक्त किया. इन पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए. मालवीय ने कहा कि यह दिखाता है कि पाकिस्तान भारत की सैन्य ताकत और राजनीतिक नेतृत्व से कितना घबराया हुआ था. उन्होंने भारत के भीतर सरकार और सेना पर सवाल उठाने वालों को भी निशाने पर लिया. मालवीय ने कहा कि अब उन सभी लोगों की पहचान होनी चाहिए जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संदेह किया था. उनके मुताबिक, ऐसे लोगों को जनता के सामने बेनकाब किया जाना चाहिए.
पाकिस्तान पर क्या है रिपोर्ट?
इससे पहले, मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह बात सामने आई थी कि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी लॉबिंग फर्म स्क्वायर पैटन बोग्स (यूएस) ने ये जानकारियां दर्ज कराई थीं. इन दस्तावेजों में बताया गया कि पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद अमेरिकी अधिकारियों, मध्यस्थों और यहां तक कि अमेरिकी मीडिया के कुछ हिस्सों से भी संपर्क किया. एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अप्रैल और मई के महीनों में पाकिस्तान ने अपनी लॉबिंग पर खर्च को अचानक काफी बढ़ा दिया था. इससे यह संकेत मिलता है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने और भारत की कार्रवाई को रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा था.
ब्रह्मोस की मार से सहम गया था पाकिस्तान
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया था. 6 और 7 मई की रात भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए. कुल नौ स्थानों को निशाना बनाया गया. इस ऑपरेशन में भारत ने अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीकों का इस्तेमाल किया. इनमें सटीक निशाने वाले मिसाइल सिस्टम, लंबी दूरी के हथियार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खुफिया और लक्ष्य पहचान प्रणाली, सैटेलाइट और ड्रोन से रियल टाइम निगरानी, तथा मजबूत एयर डिफेंस और काउंटर-ड्रोन नेटवर्क शामिल थे.
आतंकी संगठनों पर प्रचंड प्रहार
भारतीय सेना ने यह सुनिश्चित किया कि हमले केवल आतंकवादी ढांचे तक सीमित रहें. जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें बहावलपुर, मुरिदके, मुजफ्फराबाद और कोटली जैसे इलाके शामिल थे. आम नागरिकों और सामान्य सैन्य ठिकानों को नुकसान न पहुंचे, इसका खास ध्यान रखा गया. बीजेपी का कहना है कि इन खुलासों से यह साफ हो गया है कि ऑपरेशन सिंदूर न केवल सैन्य रूप से बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत की बड़ी सफलता थी, जिसने पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बचाव की मुद्रा में ला दिया.

