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Risk on Hormuz Strate : परमाणु हथियारों को लेकर शुरू हुई ईरान और अमेरिका की जंग अब होर्मुज पर आकर टिक गई है. दोनों ही देशों ने इस रास्ते पर कब्जा जमा लिया है और दुनिया के तेल जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है. स्थिति यह बन गई है कि तेल और जहाज मालिक एक-दूसरे पर जोखिम की जिम्मेदारी डालने लगे हैं. जहाज मालिकों ने मोर रिस्क मोर गेन की रणनीति अपनाते हुए अपना किराया युद्ध के पहले के मुकाबले तीन गुना बढ़ा दिया है.

होर्मुज पर जोखिम बढ़ने से जहाज और तेल मालिकों में विवाद बढ़ गया है.
नई दिल्ली. भला किसे पता था कि दो देशों का युद्ध दुनिया पर इतना भारी पड़ने वाला है. ईरान और अमेरिका लड़ तो आपसी फायदे के लिए रहे, लेकिन इसका नुकसान पूरी दुनिया को उठाना पड़ रहा है. खासकर एक रास्ते के लिए, जो दुनिया को 20 फीसदी तेल सप्लाई का एकमात्र जरिया है. लड़ाई शुरू हुई थी परमाणु हथियारों को लेकर और आज ईरान व अमेरिका दोनों का ही केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य का एक संकरा रास्ता बन चुका है. इस रास्ते से तेल लेकर गुजरने वाले जहाजों पर जोखिम बढ़ा तो उनकी बुकिंग घटने लगी है. जहाज के मालिक और तेल उत्पादक के बीच इस बात पर सहमति नहीं बन पा रही कि आखिर इस रास्ते से गुजरने का जोखिम कौन उठाएगा.
आपको तो याद ही होगा कि बीते 7 सप्ताह से मिडल ईस्ट में जारी युद्ध ने किस कदर दुनिया की ऊर्जा जरूरतों और उसकी सप्लाई को प्रभावित किया है. ईरान ने दो टूक कह दिया है कि अगर कोई भी जहाज बिना उसकी अनुमति के होर्मुज को पार करेगा तो उसे जलसमाधि लेनी पड़ सकती है. इस धमकी से तेल उत्पादक और जहाज के मालिक, दोनों डरे हुए हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि स्थिति को संभाला कैसे जाए. यही वजह है कि दो कंपनियां लाखों बैरल तेल लिए फारस की खाड़ी में टैंकर का इंतजार कर रही हैं. उनका मानना है कि जहाज के मालिकों को इस बात की गारंटी लेनी चाहिए कि लोड करते अथवा होर्मुज पार करते समय कोई नुकसान होता है तो उनकी जिम्मेदारी होगी.
जहाज मालिकों का क्या कहना
जहाज के एक मालिक और कई शिप ब्रोकर्स का कहना है कि यह मांग पूरी तरह गलत है और इस पर सहमति नहीं जताई जा सकती है. शिप ब्रोकर्स ने बताया कि कुछ मालिकों ने इसे लेकर बाकायदा नियम बनाने की मांग भी उठाई है. दोनों पक्षों के बीच जारी इस खींचतान की वजह से यह मुश्किल है कि उनमें फारस की खाड़ी के बीच तेल लोड करने को लेकर कोई सहमति बन सकेगी.
एक-दूसरे के गले डाल रहे जिम्मेदारी
लंदन स्थित शिप ब्रोकर फियर्नलेस के निदेशक का कहना है कि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर जोखिम उठाने की जिम्मेदारी लेने का दबाव बना रहे हैं और कोई इस बात पर सहमत नहीं हो रहा. कुछ तेल मालिक तो शिपमेंट कैंसिल होने की स्थिति में मोटी फीस मांग रहे हैं. अब जबकि ईरान और अमेरिका दोनों ने ही होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है तो दुनिया के लिए और बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है. अब कुछ जहाज ईरान अथवा ओमान के तटों से आवाजाही बना रहे हैं अथवा वे अपने सैटेलाइट ट्रांसपोंडर्स को ऑफ कर देते हैं, ताकि उन्हें पकड़ा न जा सके.
बढ़ता जा रहा जोखिम का प्रीमियम
होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते जोखिम पर तेल और जहाजों के मालिकों के बीच जारी खींचतान के बीच इसकी फीस बढ़ती ही जा रही है. पिछले महीने लंदन में बाल्टिक एक्सचेंज पर ब्रोकर्स ने जहाजों की हायरिंग पर जोखिम फीस काफी बढ़ा दी थी. यह जहाज फारस की खाड़ी से चीन जा रहा था. जहाजों का बुकिंग रेट युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब तीन गुना बढ़ चुका है. पहले यह फीस प्रतिदिन 1.60 लाख डॉलर थी, जो अब बढ़कर 4.75 लाख डॉलर पहुंच गई है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

