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Patna NEET student death case : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालों की परतें खुलती जा रही हैं. ताजा खुलासा यह है कि जिस बेडशीट पर छात्रा बेहोश हुई थी और उल्टी की थी, वही बेडशीट धुली हालत में फॉरेंसिक साइंस लैब को सौंप दी गई. इस एक लापरवाही ने पूरे केस की दिशा और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत, FSL को धुली बेडशीट भेजने पर पुलिस जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं.पटना. बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पटना पुलिस ने फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) को जांच के लिए धुली हुई बेडशीट सौंप दी थी. यही वह बेडशीट बताई जा रही है जिस पर छात्रा बेहोश हुई थी और उल्टी की थी. सूत्रों के मुताबिक जब FSL की टीम ने बेडशीट की जांच शुरू की तो यह स्पष्ट हुआ कि चादर पहले ही धोई जा चुकी है. जांच के दौरान उसमें डिटर्जेंट पाउडर के अंश पाए गए. FSL विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह से धुली हुई चादर पर जैविक साक्ष्य मिलने की संभावना बेहद कम हो जाती है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जिस साक्ष्य से छात्रा की हालत और मौत की वजहों को समझने में मदद मिल सकती थी, उसे पहले ही नष्ट क्यों किया गया.
उसी बेडशीट पर बेहोश हुई थी छात्रा
बताया जा रहा है कि छात्रा उसी बेडशीट पर सो रही थी जहां उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी. वह बेहोश हुई और उसने उल्टी की थी. यही कारण था कि इस बेडशीट को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा था. लेकिन पुलिस ने इसे सुरक्षित रखने के बजाय धोने के बाद FSL को सौंप दिया. सूत्रों का कहना है कि धोने के बाद इस बेडशीट का दोबारा इस्तेमाल भी नहीं किया गया था, इसके बावजूद इसे जांच के लिए भेज दिया गया.
सबूतों से छेड़छाड़ या लापरवाही?
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि यह महज लापरवाही थी या फिर सबूतों से छेड़छाड़ की गई. मिली जानकारी के अनुसार, आपराधिक मामलों में किसी भी वस्तु को बिना सील किए और बिना छेड़छाड़ के फॉरेंसिक जांच के लिए भेजना एक बुनियादी नियम है. लेकिन इस मामले में उसी नियम का उल्लंघन होता दिख रहा है. जानकारों का कहना है कि यदि बेडशीट बिना धुली अवस्था में भेजी जाती तो उल्टी, शरीर से निकले द्रव या अन्य रासायनिक संकेतों की जांच संभव थी.
पहले भी उठ चुके हैं पुलिस पर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब इस केस में पटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों. इससे पहले भी पोस्टमार्टम में देरी, हॉस्टल को देर से सील करना और शुरुआती जांच में आत्महत्या की थ्योरी पेश करने को लेकर पुलिस की आलोचना हो चुकी है. अब धुली हुई बेडशीट का मामला सामने आने के बाद यह आलोचना और तेज हो गई है. जाहिर है अब यह खुलासा जांच की पारदर्शिता और गंभीरता पर सीधा सवाल बन गया है.
पीड़ित परिवार की बढ़ती बेचैनी
बता दें कि छात्रा के परिजन पहले से ही पुलिस जांच को लेकर असंतुष्ट हैं और पटना पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है. इनका कहना है कि हर नए खुलासे के साथ यह साफ होता जा रहा है कि शुरुआती दौर में मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया. परिवार को डर है कि अहम सबूतों के नष्ट होने से सच सामने आने में मुश्किल हो सकती है. परिजन निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग लगातार कर रहे हैं. पटना पुलिस की लापरवाहियों के सामने आने के बाद यह पुलिस जांच की गंभीरता और जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है.
अब जांच का रुख क्या होगा?
बहरहाल, एसआईटी के सामने अब यह भी जांच का विषय है कि बेडशीट किसके आदेश पर धोई गई और किस स्तर पर यह चूक हुई. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस लापरवाही से जांच को अपूरणीय नुकसान पहुंचा है. FSL की रिपोर्ट और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन धुली हुई बेडशीट का तथ्य इस केस में एक स्थायी सवाल बन चुका है. NEET छात्रा की मौत का मामला अब सिर्फ संदिग्ध हालात तक सीमित नहीं रहा. धुली हुई बेडशीट को FSL भेजने का खुलासा बताता है कि कहीं न कहीं सिस्टम से बड़ी लापरवाही हुई है.
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