India
oi-Laxminarayan Malviya
Encounter
in
Sukma
News:
छत्तीसगढ़
के
नक्सल
प्रभावित
सुकमा
जिले
के
तुमलपाड़ा
गांव
के
पास
सुरक्षा
बलों
और
नक्सलियों
के
बीच
हुई
मुठभेड़
में
तीन
कुख्यात
नक्सली
मारे
गए।
बस्तर
रेंज
के
आईजी
पी.
सुंदरराज
ने
बताया
कि
मारे
गए
तीनों
नक्सलियों
पर
प्रत्येक
के
सिर
पर
5
लाख
रुपये
का
इनाम
था।
यह
ऑपरेशन
छत्तीसगढ़
पुलिस
की
डिस्ट्रिक्ट
रिजर्व
गार्ड
(DRG)
और
कोबरा
कमांडो
की
संयुक्त
टीम
ने
अंजाम
दिया,
जो
नक्सलियों
की
खुफिया
जानकारी
पर
आधारित
था।
मुठभेड़
के
दौरान
सुरक्षा
बलों
ने
भारी
गोलीबारी
का
सामना
किया,
लेकिन
कोई
जवान
घायल
नहीं
हुआ।

IG
का
खुलासा
घटनास्थल
से
हथियार
और
गोला-बारूद
बरामद
हुए
हैं।
यह
2025
की
15वीं
बड़ी
सफलता
है,
जो
केंद्र
सरकार
के
‘नक्सल
उन्मूलन
अभियान’
को
मजबूती
दे
रही
है।
लेकिन
सवाल
यह
है
कि
नक्सलवाद
की
जड़ें
इतनी
गहरी
क्यों
हैं,
और
क्या
यह
अंतहीन
संघर्ष
कभी
खत्म
होगा?
आइए,
इस
एक्सप्लेनर
में
समझते
हैं
पूरी
घटना,
नक्सल
समस्या
की
पृष्ठभूमि
और
सरकार
की
रणनीति।
मुठभेड़
का
पूरा
घटनाक्रम:
खुफिया
जानकारी
से
शुरू
हुई
कार्रवाई
सुकमा
जिला,
जो
बस्तर
के
घने
जंगलों
से
घिरा
है,
लंबे
समय
से
नक्सलियों
का
गढ़
रहा
है।
15
नवंबर
की
सुबह
करीब
6
बजे,
DRG
और
कोबरा
(कमांडो
बटालियन
फॉर
रिसल्यूशन
एंड
अलाइड
फोर्सेस)
की
50
सदस्यीय
संयुक्त
टीम
तुमलपाड़ा
गांव
के
पास
जंगल
में
सर्च
ऑपरेशन
पर
थी।
खुफिया
एजेंसियों
से
मिली
जानकारी
के
अनुसार,
कोंटा
और
किस्टाराम
एरिया
कमिटी
के
10-12
हार्डकोर
नक्सली
वहां
छिपे
हुए
थे,
जो
हाल
ही
में
बीजापुर
मुठभेड़
(11
नवंबर)
से
बचे
हुए
थे।
जैसे
ही
टीम
ने
जंगल
में
घुसपैठ
की,
नक्सलियों
ने
अचानक
AK-47,
SLB
और
IED
से
हमला
बोल
दिया।
2
घंटे
तक
चली
गोलीबारी
में
तीन
नक्सली
मारे
गए
–
दो
पुरुष
और
एक
महिला।
आईजी
सुंदरराज
ने
बताया,
“मारे
गए
नक्सलियों
में
हिड़मा
डिवीजन
के
कमांडर
हिड़मा,
महिला
कमांडर
मलती
और
पुरुष
कैडर
सोमरू
शामिल
हैं।
प्रत्येक
पर
5
लाख
का
इनाम
था।”
घटनास्थल
से
एक
AK-47,
दो
SLB,
ग्रेनेड
और
IED
बरामद
हुए।
सर्च
ऑपरेशन
जारी
है,
क्योंकि
बाकी
नक्सली
भाग
चुके
हैं।
यह
मुठभेड़
बस्तर
में
2025
की
सबसे
सफल
कार्रवाइयों
में
शुमार
है।
जनवरी
से
अब
तक
बस्तर
डिवीजन
(सुकमा,
बीजापुर,
दंतेवाड़ा
आदि)
में
207
नक्सली
मारे
गए
हैं।
लेकिन
सुरक्षा
बलों
को
भी
नुकसान
हुआ
–
45
जवान
शहीद।
नक्सलवाद
क्या
है?
जड़ें
और
फैलाव
–
एक
सरल
व्याख्या
नक्सलवाद
भारत
की
सबसे
लंबी
चल
रही
आंतरिक
सुरक्षा
समस्या
है,
जो
1967
के
नक्सलबाड़ी
(पश्चिम
बengal)
विद्रोह
से
शुरू
हुई।
यह
माओवादी
विचारधारा
पर
आधारित
है,
जो
ग्रामीण
गरीबों,
आदिवासियों
और
मजदूरों
के
लिए
‘क्रांति’
की
बात
करता
है।
नक्सली
संगठन
CPI
(माओइस्ट)
2004
में
बना,
जो
10
राज्यों
के
‘रेड
कॉरिडोर’
(लाल
गलियारा)
में
सक्रिय
है।
जड़ें
क्यों
गहरी?
-
आर्थिक
असमानता:
बस्तर
जैसे
क्षेत्रों
में
खनिज
संपदा
(कोयला,
लोहा)
है,
लेकिन
आदिवासी
गरीबी
में
जी
रहे।
नक्सली
विकास
के
नाम
पर
शोषण
का
आरोप
लगाते
हैं। -
भूमि
विवाद:
वन
अधिकार
अधिनियम
2006
के
बावजूद
आदिवासियों
की
जमीनें
कंपनियों
को
दी
जा
रही।
नक्सली
इसे
‘कॉरपोरेट
हमला’
कहते
हैं। -
सुरक्षा
बलों
का
दबाव:
ऑपरेशन
ग्रीन
हंट
(2009)
से
अब
तक
हजारों
नक्सली
मारे
गए,
लेकिन
नए
कैडर
भर्ती
हो
जाते
हैं। -
फैलाव:
छत्तीसगढ़
में
90%
नक्सली
घटनाएं
बस्तर
में।
2025
में
150+
हमले,
100+
नागरिक
मौतें। -
नक्सली
अब
शहरी
नक्सल
और
सोशल
मीडिया
का
इस्तेमाल
कर
रहे।
लेकिन
सरेंडर
पॉलिसी
से
1,500+
नक्सली
मुख्यधारा
में
लौटे।
‘समर्पण-सुरक्षा-विकास’
का
त्रिशूल
केंद्र
सरकार
का
लक्ष्य:
31
मार्च
2026
तक
नक्सल-मुक्त
भारत।
गृह
मंत्री
अमित
शाह
ने
कहा,
“नक्सलवाद
विकास
का
सबसे
बड़ा
दुश्मन
है।”
छत्तीसगढ़
CM
विष्णु
देव
साय
ने
बस्तर
को
‘शांति
का
क्षेत्र’
घोषित
किया।
मुख्य
रणनीतियां:
-
सुरक्षा
अभियान:
DRG
(स्थानीय
आदिवासी
जवान),
कोबरा,
CRPF
की
संयुक्त
टीमें।
2025
में
200+
कैंप
स्थापित। -
विकास
का
दांव:
10,000
करोड़
का
बस्तर
पैकेज
–
सड़कें,
स्कूल,
अस्पताल।
नरवा,
गरवा,
घुरवा,
बारी
(NGGB)
योजना
से
सिंचाई
बढ़ी। -
समर्पण
नीति:
सरेंडर
करने
पर
2.5
लाख
+
नौकरी।
2025
में
800+
सरेंडर। -
तकनीक
का
सहारा:
ड्रोन,
सैटेलाइट
इमेजरी
से
नक्सली
कैंप
ट्रैक।
यह
मुठभेड़
स्थानीय
आदिवासियों
के
लिए
राहत
है
–
नक्सली
लेवी
वसूलते
थे।
लेकिन
चुनौतियां
बरकरार:
-
मानवाधिकार:
CRPF
पर
‘अधिक
बल
प्रयोग’
के
आरोप। -
विकास
असमान:
बस्तर
में
70%
गरीबी
दर। -
नक्सली
जवाबी
हमले:
IED
ब्लास्ट
से
20+
जवान
शहीद
2025
में।
CM
विष्णु
देव
साय:
“बस्तर
में
शांति
लौट
आई।
सुरक्षा
बलों
को
सलाम।”
-
गृह
मंत्री
अमित
शाह:
“नक्सल
उन्मूलन
की
दिशा
में
बड़ा
कदम।
2026
तक
समाप्त।” -
कांग्रेस
नेता
भूपेश
बघेल:
“सफलता
तो
है,
लेकिन
आदिवासियों
की
सुरक्षा
सुनिश्चित
करें।” -
नक्सली
संगठन:
कोई
बयान
नहीं,
लेकिन
पोस्टरों
में
‘बदले’
की
धमकी।

