विमान के टेकऑफ के समय गति लगभग 250 से 300 किमी/घंटा होती है. वहीं लैंडिंग के समय गति लगभग 230 से 260 किमी/घंटा के बीच रहती है. यह गति विमान के प्रकार, वजन और मौसम की स्थिति के आधार पर अलग भी हो सकती है.
कामर्शियल बड़े विमान आमतौर पर लैंडिंग के समय 130 से 160 मील प्रति घंटे की गति बनाए रखते हैं. वहीं टेकऑफ के समय विमान जब हवा में ऊपर उठता है तो उसकी गति 240-290 किमी/घंटा तक हो चुकी होती है. बस ये गति वो सेकेंडों में पकड़ते हैं और सेकेंडों में ही लैंडिंग के समय उन्हें विमान की गति जबरदस्त स्पीड के बाद शून्य तक लानी होती है.
छोटे निजी विमान आमतौर पर 95-130 किमी/घंटा की गति से टेकऑफ या लैंड करते हैं. तकनीकी रूप से, टेकऑफ के समय VR यानि विमान जब उड़ान भरता है तो उसकी गति को V1 कहते हैं. वहीं लैंडिंग के समय स्पीड को वैप कहते हैं.
टेकऑफ से पहले रन-वे पर विमान जिस स्पीड से भागता है और फिर देखते ही देखते ही हवा में उठकर आसमान में उड़ने लगता है, उसे V1स्पीड कहा जाता है. अगर इसमें गफलत हो तो टेकऑफ सही नहीं हो पाता. और
V1 स्पीड विमानन में एक महत्वपूर्ण गति है, जिसे “टेकऑफ डिसीजन स्पीड” कहा जाता है. यह वह अधिकतम गति है, जिस पर पायलट को यह निर्णय लेना होता है कि टेकऑफ को जारी रखना है या उसे रोकना है, यदि कोई गंभीर समस्या सामने आती है. लैंडिंग के समय विमान की स्पीड को V1 नहीं कहते. विमानन की दुनिया में हर चरण के लिए अलग-अलग ‘वी स्पीड्स’ होती हैं.
लैंडिंग के समय कैसे कम की जाती है स्पीड
लैंडिंग के समय विमान की गति को वीरेफ (Vref) कहते हैं. ये वो स्पीड है जिस पर विमान रनवे को पार करता है. ये स्पीड आमतौर पर विमान के वजन और कॉन्फ़िगरेशन पर आधारित होती है.
वैसे लैंडिंग के समय विमान की गति टेक-ऑफ की गति से काफी कम रखी जाती है ताकि वह रनवे की लंबाई के भीतर सुरक्षित रूप से रुक सके. लैंडिंग के समय विमान की गति को आमतौर पर नॉट में मापा जाता है:
कमर्शियल जेट – करीब 130 से 150 नॉट (करीब 240 से 280 किमी/घंटा).
छोटे निजी विमान – करीब 60 से 70 नॉट (करीब 110 से 130 किमी/घंटा).
बड़े मालवाहक या भारी विमान जैसे बोइंग 747 – गति 150 से 160 नॉट ( 280 से 300 किमी/घंटा)
रनवे छूने के बाद शून्य की स्पीड कितनी देर में
विमान जब हवा से उतरकर रनवे को छूता है तो उस समय भी उसकी स्पीड काफी ज्यादा होती है. लेकिन रनवे पर उसे शून्य की स्पीड तक पहुंचने में बमुश्किल 25 से 45 सेकंड का समय लगता है. इस दौरान विमान रनवे पर करीब 1.5 से 2.5 किलोमीटर तक की दूरी तय कर लेता है.
विमान को रोकने वाली तकनीकें
विमान सिर्फ टायरों के ब्रेक से नहीं रुकता. इसके लिए तीन मुख्य सिस्टम काम करते हैं.
ग्राउंड स्प्वायलर्स – पंखों के ऊपर लगे फ्लैप्स जो उठ जाते हैं. ये हवा के दबाव को कम करते हैं. विमान को जमीन से चिपकाए रखते हैं ताकि ब्रेक बेहतर काम करें.
रिवर्स थ्रस्ट – इंजन की हवा को आगे की तरफ मोड़ दिया जाता है, जिससे विमान पीछे की ओर खिंचता है. लैंडिंग के तुरंत बाद आने वाली तेज आवाज इसी की होती है.
व्हील ब्रेक्स – कारों की तरह ही डिस्क ब्रेक, लेकिन ये बहुत शक्तिशाली होते हैं और इनमें एंटी-स्किड सिस्टम होता है.
– अगर बारिश हो रही है, तो घर्षण कम होने के कारण रुकने में ज्यादा समय लग सकता है.
– पायलट लैंडिंग से पहले ही ब्रेक की तीव्रता (कम, मध्यम या ज्यादा) चुन लेते हैं. ज्यादा यानि Max सेटिंग पर विमान बहुत झटके के साथ और जल्दी रुकता है.
क्या छोटे विमानों की लैंडिंग अलग तरह से होती है
हां, छोटे विमानों की लैंडिंग बड़े जेट विमानों की तुलना में काफी अलग और सरल होती है. जहां जेट विमानों में ढेर सारे हाइड्रोलिक सिस्टम और कंप्यूटर काम में लाने होते हैं, वहीं छोटे विमान काफी हद तक मैन्युअल और एयरोडायनामिक्स पर निर्भर करते हैं.
– छोटे विमानों का वजन बहुत कम होता है, इसलिए उनकी लैंडिंग स्पीड भी बहुत कम होती है. ये विमान करीब 110 से 130 किमी/घंटा की गति पर उतरते हैं. इन्हें रुकने के लिए बहुत छोटे रनवे (300-500 मीटर) की जरूरत होती है.
– छोटे विमान हवा में बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लैंडिंग के आखिरी पलों में इनका व्यवहार अलग होता है. रनवे को छूने से ठीक पहले पायलट विमान की नाक को थोड़ा ऊपर उठाता है. इससे पंखों का ड्रैग बढ़ता है और विमान धीरे से जमीन को छूता है. यदि गति थोड़ी भी अधिक हो, तो छोटे विमान जमीन के पास हवा में तैरने लगते हैं. जल्दी नीचे नहीं आते. इसे कंट्रोल करना पायलट के कौशल पर निर्भर करता है.
– ब्रेकिंग सिस्टम भी अलग होते हैं. इनमें ब्रेक पायलट के पैरों के पंजों पर होते हैं. पायलट अपने पैरों से दबाव डालकर विमान को रोकता है.
फाइटर जेट छोटे रनवे पर जल्दी कैसे रुक जाते हैं?
फाइटर जेट को बहुत ही कम दूरी में रोकना इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है. जहां एक सामान्य पैसेंजर विमान को रुकने के लिए 2 किलोमीटर से ज्यादा का रनवे चाहिए होता है, वहीं एक फाइटर जेट मात्र 300 से 500 फीट यानि करीब 100-150 मीटर पर रुक सकता है.
1. एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंडिंग – समुद्र के बीच चलते जहाज पर रनवे बहुत छोटा होता है. यहां विमान को रोकने के लिए टेलहूक तकनीक का इस्तेमाल होता है. विमान के पीछे एक मजबूत हुक लगा होता है. लैंडिंग के समय पायलट इसे नीचे गिरा देता है. रनवे पर स्टील के चार मोटे तार बिछे होते हैं. विमान का हुक इनमें से किसी एक तार को फंसा लेता है. ये तार एक हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ा होता है जो विमान की भारी गतिज ऊर्जा को सोख लेता है और उसे 2 से 3 सेकंड के भीतर शून्य पर ले आता है.
2. जमीन पर लैंडिंग – जब फाइटर जेट छोटे या बर्फीले रनवे पर उतरते हैं, तो वे ड्रैग शूट यानि पैराशूट का उपयोग करते हैं. जैसे ही विमान के पहिए जमीन को छूते हैं, पायलट विमान के पीछे से एक छोटा लेकिन बेहद मजबूत पैराशूट खोल देता है.यह पैराशूट हवा का बहुत ज्यादा प्रतिरोध पैदा करता है, जिससे विमान की गति तेजी से कम हो जाती है. इससे ब्रेक पर दबाव कम पड़ता है.विमान कम दूरी में रुक जाता है.

