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दिल्ली हाईकोर्ट से एक चौकाने वाला मामला आया है. बेंच के सुनवाई को विरोध में एक वकील मुंह पर टेप लगाकर कोर्ट में पहुंच गया. दिल्ली हाई कोर्ट ने वकील के व्यवहार पर कड़ी नाराज़गी जताई, दो जस्टिस की बेंच खरी खोटी सुनाते हुए कहा, ‘आपसे ये उम्मीद नहीं थी.’ वकील कोर्ट ने आरोप लगाया कि पिछली सुनवाई के दौरान उसे चुप करा दिया गया था.
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस ने वकील के सांकेतिक विरोध पर सुनाई खरीखोटी. (फाइल)Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को उस समय खलबली गई, जब एक वकील मुंह पर लाल टेप लगाए कोर्ट की सुनवाई में पहुंच गए. जस्टिस नितिन संबरे और जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने वकील की इस हरकत पर नराजगी जताई. उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदराना बताया. साथ ही उन्होंने बताया कि सीनियर वकील आरके. सैनी मुंह पर लाल रंग का टेप लगा कर जब कोर्टरूम में दाखिल हुए तो लगा वकील साहब को कोई चोट लगी है. उन्होंने सैनी से उनका हाल लिया, लेकिन उनको पता चला कि वे सांकेतिक विरोध कर रहे हैं. सैनी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि पिछली सुनवाई में उनको बोलने नहीं दिया गया था, जिसके विरोध में वे कोर्ट रूम में ऐसे पहुंचे. यह उनका ‘प्रतीकात्मक विरोध’ था. कोर्ट ने उनके इस रवैये पर सख्त लहजे में फटकार लगाई.
वकील की गरिमा के खिलाफ: हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच सीनियर वकील की इस हरकत से आहत हुई. उन्होंने विरोध के चुनाव को बेकार बताया. साथ ही कहा कि ये वकीलों के गरिमा के अनुसार नहीं था. हालांकि, वकील सैनी ने भी सफाई देते हुए कहा कि पिछली दो सुनवाइयों में उन्हें बार-बार टोका गया. पूरी बात रखने नहीं दी गई. कोर्ट ने ऑर्डर में लिखा- ‘सैनी 25 साल से ज्यादा के स्टैंडिंग वकील हैं. उनसे इस तरह का व्यवहार उम्मीद नहीं थी. हमने सिर्फ इसलिए टोका था क्योंकि दलीलें बहुत लंबी और दोहराव वाली हो रही थीं.’
PIL का चलन शुरू करने वाले वकील का अनोखा विरोध
आर.के. सैनी दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं का चलन शुरू करने वाले वकील माने जाते हैं. उनके इस तरह के विरोध से सभी हतप्रभ हैं. दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एमसीडी) से अवैध निर्माण हटाने वाली ऐतिहासिक PIL भी इन्हीं की थी. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में सैनी ने कहा- ‘पिछली सुनवाई में मुझे लगभग कार्यवाही से बाहर कर दिया गया था. इसलिए मैंने प्रतीकात्मक विरोध किया.’
कोई बोला सही किया, कोई बोला कोर्ट की तौहीन
वीडियो वायरल होने के बाद लोग दो गुटों में बंट गए. एक पक्ष कह रहा है कि वकील ने अपनी बात रखने का हक जताया. दूसरा पक्ष इसे कोर्ट की अवमानना बता रहा है. कोर्ट ने सैनी को अगली सुनवाई में सामान्य तरीके से दलील देने को कहा है. वहीं, कोर्ट ने सीनियर वकील को चेतावनी देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन कोर्ट की मर्यादा भी जरूरी है. बेंच ने कहा कि कोर्ट की गरिमा बनाए रखना पहली जिम्मेदारी है.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

