नई दिल्ली. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अगर मौजूदा तेल और गैस उत्पादन में निवेश बंद हो जाता है तो अगले दशक में वैश्विक तेल उत्पादन में सालाना लगभग 8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. यह ब्राजील और नॉर्वे के संयुक्त वार्षिक उत्पादन के बराबर है. पुरी ने कहा कि भले ही नवीकरणीय ऊर्जा ने तेजी से विस्तार किया है और अब वैश्विक बिजली उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बदलाव केवल प्रतिस्थापन पर आधारित नहीं हो सकता. ऊर्जा का इतिहास कभी भी केवल प्रतिस्थापन के बारे में नहीं रहा. यह हमेशा वृद्धि और नए स्रोत जोड़ने के बारे में रहा है.
मंत्री ने कहा कि ऊर्जा बदलाव, ऊर्जा सुरक्षा और प्रणाली की मजबूती को एक साथ आगे बढ़ाना होगा, ताकि बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा किया जा सके. पिछले एक दशक में नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि वैश्विक बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी कम होती लागत और नीतिगत उपायों के कारण लगभग पांचवें से बढ़कर लगभग एक तिहाई हो गई है. फिर भी पारंपरिक ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. लिहाजा अगर मौजूदा तेल और गैस उत्पादन में निवेश आज बंद हो जाए, तो अगले दशक में वैश्विक तेल उत्पादन में सालाना लगभग 8 फीसदी की गिरावट आएगी, जो हर साल ब्राजील और नॉर्वे के संयुक्त वार्षिक उत्पादन से अधिक के नुकसान के बराबर है.
एशिया में है सबसे ज्यादा एनर्जी डिमांड
पुरी ने कहा कि नए ऊर्जा स्रोत हमेशा से मौजूदा स्रोतों को पूरा करते रहे हैं, जिससे ऊर्जा प्रणाली को विस्तार और अनुकूलन करने का मौका मिलता है. यह वैश्विक ऊर्जा बदलाव की परिभाषित वास्तविकता बनी हुई है. पिछले एक साल में वैश्विक ऊर्जा प्रणाली पर दबाव तेज हो गया है और ऊर्जा व्यवस्था जटिल तरीकों से विकसित हो रही है. वैश्विक ऊर्जा की बढ़ती मांग का लगभग 80 फीसदी हिस्सा उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से आया है, जिसमें करीब 60 फीसदी मांग विकासशील एशिया से है.
अभी और बढ़ेगी ऊर्जा की डिमांड
उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे ये क्षेत्र विकसित होंगे और लोगों को परिवहन, कूलिंग और डिजिटल सेवाओं तक अधिक पहुंच मिलेगी, ऊर्जा की मांग और बढ़ेगी और यह ज्यादा जटिल भी होगी. पुरी ने बताया कि दुनिया में लगभग 73 करोड़ लोग अभी भी बिजली तक पहुंच से वंचित हैं और करीब दो करोड़ लोग ऐसी खाना पकाने की विधियों पर निर्भर हैं जो उनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए हानिकारक हैं. इससे स्पष्ट होता है कि सभी के लिए सस्ती, सुरक्षित और साफ ऊर्जा उपलब्ध कराना वैश्विक विकास और समानता की बड़ी चुनौती बनी हुई है. पुरी ने कहा कि लंबे समय तक वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने अपने नागरिकों को महंगाई के तेज प्रभाव से बचाया है.
भारत में नहीं बढ़े ऊर्जा के दाम
उन्होंने कहा कि जहां साल 2021 के बाद कई बड़े देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ीं, वहीं 2025 में दिल्ली में ईंधन की कीमतें साल 2021 से भी कम रहीं. पुरी ने कहा कि 10 करोड़ से अधिक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) लाभार्थियों के लिए एलपीजी की कीमतें प्रति सिलेंडर लगभग 5.5 से छह डॉलर के बीच रखी गई हैं, जो वैश्विक स्तर पर सबसे कम दरों में शामिल हैं. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता होने और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के नाते भारत इस परिवर्तन के केंद्र में है.
35 फीसदी तक बढ़ेगी डिमांड
उन्होंने कहा कि साल 2050 तक भारत की वैश्विक ऊर्जा मांग में हिस्सेदारी 30–35 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है, जो कुल वैश्विक मांग का लगभग 10 फीसदी होगी, जबकि प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत वैश्विक औसत का लगभग 40 फीसदी ही रहेगी. भारत सरकार इस वृद्धि को सक्षम बना रही है, क्षमता बढ़ा रही है, बाजार की स्थिति सुधार रही है और पूरे ऊर्जा मिश्रण का समर्थन कर रही है. ऊर्जा क्षेत्र में हाल के सुधारों का हवाला भी दिया और तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 के पारित होने का जिक्र किया. यह कानून सभी प्रकार के हाइड्रोकार्बन के लिए एकल पेट्रोलियम पट्टे, समयबद्ध मंजूरी और दीर्घकालिक पट्टा स्थिरता प्रदान करता है.
एथनॉल का पहला लक्ष्य हासिल
पुरी ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. देश ने साल 2025 में पेट्रोल में लगभग 20 फीसदी एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे करीब 19.3 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और पिछले एक दशक में किसानों को 15 अरब डॉलर से अधिक का सीधा भुगतान किया गया है. जहाज विनिर्माण भारत के लिए वृद्धि का एक और मजबूत क्षेत्र है. तेल और गैस व्यापार के लिए करीब 60 जहाजों की तत्काल जरूरत है, जिससे निकट भविष्य में लगभग पांच अरब डॉलर के निवेश का अवसर बनता है.

