नई दिल्ली. अमेरिका के एक सीनेटर मार्क केली ने दावा किया कि इजरायल ने हिज्बुल्लाह के सरगना नसरल्लाह का खात्मा करने के लिए अमेरिका में बने 900 किलोग्राम के मार्क-84 सीरिज के गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया. अमेरिकी सीनेटर के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि बेरूत में किए गए हवाई हमले में इजरायल ने जिन बमों का इस्तेमाल किया, वे बम अमेरिका में बने थे. सीनेटर मार्क केली के मुताबिक मार्क-84 सीरीज बमों को बंकर-बस्टर के रूप में भी जाना जाता है. अमेरिका का मार्क-84 अन गाइडेड बम है, मगर उनमें कुछ तकनीकी फेरबदल के साथ गाइडेड बमों में बदल दिया जाता है.
900 किलो का मार्क-84 बम गाइडेड बम में बदलते ही कितना मारक हो सकता है, इसका नमूना पिछले दिनों बेरूत में हिज्बुल्लाह के हेडक्वार्टर पर इजरायली एयरफोर्स की एयर स्ट्राइक से साफ हो गया है. जहां हमले वाली जगह पर करीब 30 फीट गहरा गड्ढा बन गया. मार्क-84 के बमों को JDAMs पंखों और GPS नेविगेशन सिस्टम का उपयोग करके एक गाइडेड बम में बदल दिया जाता है. अमेरिका, लंबे समय से इजरायल का सहयोगी है. जो उसका सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रहा है. जब 7 अक्टूबर को फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास ने इजरायल में धावा बोला और हजारों लोगों को मार डाला, तो अमेरिका ने इजरायल को बड़ी मात्रा में जंगी हथियार सप्लाई किए. व्हाइट हाउस के मुताबिक इजरायल ने उन्हें बेरूत में नसरल्लाह को मारने वाले हवाई हमले के बारे में चेतावनी नहीं दी थी. ‘द गार्जियन की रिपोर्ट’ के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को इस बारे में तभी पता चला जब इजरायली विमान पहले से ही हमला करने के लिए हवा में थे.
मार्क 84 की खासियत
मार्क 84 या 900 किलो का अमेरिका सामान्य उपयोग का बम है. यह मार्क-80 सीरीज के हथियारों में सबसे बड़ा है. वियतनाम युद्ध के दौरान इसे पहली बार इस्तेमाल किया गया था. बाद में यह आम तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला अमेरिकी भारी अन गाइडेड बम बन गया. उस समय यह 6,800 किलोग्राम के BLU-82 ‘डेजी कटर’ और 1,400 किलो के M118 ‘डेमोलिशन’ बम के बाद अमेरिका का वजन के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा बम था. 1991 में 2,300 किग्रा के GBU-28, 2003 में 10,300 किग्रा के GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बम (MOAB) और 14,000 किग्रा के मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर के शामिल होने के कारण यह मौजूदा वक्त में आकार में छठे स्थान पर है.
मार्क-84 बम में 429 KG ट्रिटोनल से होती है भारी तबाही
मार्क-84 बम में असली वजन इसके पंख, फ्यूज विकल्पों के आधार पर 894 से 945 किग्रा तक होता है. इस पर एक स्टील का कवच होता है, जिसमें 429 किग्रा ट्रिटोनल उच्च विस्फोटक भरा होता है. मार्क 84 के धमाके से 50 फीट (15 मीटर) चौड़ा और 36 फीट (11 मीटर) गहरा गड्ढा बना सकता है. यह 15 इंच (38 सेमी) धातु या 11 फीट (3.4 मीटर) कंक्रीट में घुस सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे किस ऊंचाई से गिराया गया है. यह 400 गज (370 मीटर) के दायरे में घातक विखंडन का कारण बनता है.MK-84 का इस्तेमाल अमेरिकी सेना ने वियतनाम युद्ध, ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म, इराक युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध और 1999 में यूगोस्लाविया पर बमबारी के लिए किया. 2014 के गाजा युद्ध में भी इजरायल ने इसका इस्तेमाल किया था. 2023 और 2024 में, अमेरिका ने 14,000 से अधिक मार्क 84 बम इजरायल को दिए थे.
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FIRST PUBLISHED : September 30, 2024, 17:21 IST

