नई दिल्ली. राजस्थान से पश्चिमी बंगाल तक लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन हवा की रफ्तार से चलती थी. इस वजह से ट्रेन का नाम पहले आम लोगों ने इसका नाम तूफान एक्सप्रेस रखा, बाद में रेलवे ने भी यही नाम रखा. 90 साल तक ट्रेन यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बन रही. आठ राज्यों में होते हुए यह ट्रेन गंतव्य तक जाती थी. आज यह ट्रेन कहां है, जानते हैं ट्रेन की पूरी कहानी.
हावड़ा से श्रीगंगानगर तक 1978 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस (13007/13008) 1 जून 1930 को शुरू हुई थी. उस समय इसकी स्पीड बहुत तेज होती थी. हवा की तरह चलने पर इसका नाम लोगों तूफान एक्सप्रेस रख दिया. अंग्रेजों के समय चली यह ट्रेन अपनी तेज रफ्तार और भरोसेमंदी के लिए मशहूर रही.
कितने राज्यों से होकर गुजरती थी ट्रेन
तूफान एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान यानी आठ राज्यों से होकर गुजरती थी. हावड़ा से श्रीगंगानगर तक की यात्रा यह 45 घंटे 25 मिनट में तय करती थी. वापसी में 46 घंटे 20 मिनट लगते थे. इसकी अधिकतम रफ्तार 110 किमी-घंटा. हालांकि इसकी औसत स्पीड 44 किमी-घंटा थी. लेकिन उस समय यह स्पीड बहुत तेज मानी जाती थी. शुरुआत में कम स्टेशनों पर रुकती थी, धीरे धीरे स्टापेज बढ़ते चले गए और कुल 110 स्टेशनों पर रुकने लगी.
कौन से प्रमुख स्टेशन
हावड़ा जंक्शन, आसनसोल, मोकामा, पटना जंक्शन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, प्रयागराज जंक्शन, सिराथू, भरवारी कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा कैंट, मथुरा जंक्शन, नई दिल्ली, रोहतक जंक्शन, भटिंडा जंक्शन रुकते हुए श्रीगंगानगर पहुंचती थी.
आज कहां है यह ट्रेन
कोरोना महामारी की पहली लहर में मार्च 2020 से लॉकडाउन के दौरान तूफान एक्सप्रेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. पूर्व रेलवे ने 19 मई 2020 से इसे स्थायी रूप से निरस्त कर दिया. 1 अक्टूबर 2022 की नई टाइम टेबल में भी जगह न मिलने से साफ हो गया कि अब यह ट्रेन कभी नहीं चलेगी. 2025 में सांसदों और यात्रियों ने बहाली की मांग की, लेकिन रेलवे ने कोई घोषणा नहीं की. इस तरह यह ट्रेन आज इतिहास बन चुकी है.
कब फिल्में बनी
इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1930 से 40 के बीच इस ट्रेन के नाम पर तीन फिल्में बनी हैं. जिनका नाम ‘तूफान मेल’ या ‘तूफान एक्सप्रेस’ रखा गया.

