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Cultivation of Phut Kakdi: दिलावरपुर गांव के किसान वसीम खान इस समय करीब दो एकड़ जमीन में फूट ककड़ी की खेती कर रहे है. किसान वसीम खान बताते है कि फूट की खेती से उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और उत्पादन अच्छा होने पर किसान को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता.
बारिश का मौसम शुरू होते ही गांव-देहात की रसोई में सब्जियों के विकल्प सीमित होने लगते है. ऐसे समय में ग्रामीण इलाकों में मिलने वाली कई पारंपरिक सब्जियां लोगों के लिए स्वाद और पोषण का बेहतर विकल्प बनती है. इन्हीं में से एक है फूट ककड़ी, जिसे कभी ग्रामीण परिवारों की पसंदीदा देसी सब्जियों में गिना जाता था. खास बात यह है कि पकने के बाद यह फल अपने आप फट जाता है. इसी विशेषता के कारण स्थानीय बोलचाल में इसे ‘फूट’ कहा जाता है.
फूट ककड़ी का स्वाद हल्का खट्टा और मीठा होता है. गांवों में इसे अलग-अलग तरीके से खाया जाता है. कई जगह इसे काटकर चीनी और गुड़ के साथ भी खाया जाता है. बारिश के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है. यही वजह है कि अब किसान पारंपरिक फसल होने के बावजूद फूट ककड़ी की खेती को कमाई के एक बेहतर साधन के रूप में देख रहे है.
मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के दिलावरपुर गांव में किसान अब फूट ककड़ी की बड़े पैमाने पर खेती करने लगे है. किसानों का कहना है कि कम लागत में इसकी खेती की जा सकती है और बाजार में अच्छा भाव मिलने पर इससे बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है. फूट ककड़ी की खेती के लिए बहुत अधिक जमीन की आवश्यकता भी नहीं होती. किसान अपने खेत के एक हिस्से में इसकी खेती शुरू कर सकते है. उचित देखभाल, समय पर सिंचाई और बेलों को सहारा देने की व्यवस्था के साथ इसकी फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है.
दिलावरपुर गांव के किसान वसीम खान इस समय करीब दो एकड़ जमीन में फूट ककड़ी की खेती कर रहे है. किसान वसीम खान बताते है कि फूट की खेती से उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और उत्पादन अच्छा होने पर किसान को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता.
वसीम खान के मुताबिक फूट ककड़ी की बिक्री स्थानीय बाजारों में करीब 20 रुपये से लेकर 60 रुपये प्रति पीस तक के भाव में हो जाती है. हालांकि कीमत आकार, गुणवत्ता, मांग और बाजार के हिसाब से बदल सकती है. अच्छी क्वालिटी का फल बाजार में आसानी से बिक जाता है.
मचान विधि से कर रहे खेती
किसान वसीम खान इस बार फूट ककड़ी की खेती मचान विधि से कर रहे है. मचान विधि में बेल वाली फसल को जमीन पर फैलने देने के बजाय ऊपर तैयार किए गए सहारे पर चढ़ाया जाता है. इससे खेत में पौधों के बीच हवा का आवागमन बेहतर रहता है और फल जमीन के सीधे संपर्क में आने से बचते है.
किसान का कहना है कि मचान विधि से खेती करने पर फलों की गुणवत्ता बेहतर रहती है. जमीन से ऊपर रहने के कारण फल पर मिट्टी कम लगती है और कई तरह के कीटों व सड़न की समस्या को कम करने में भी मदद मिलती है. इसके अलावा खेत में काम करने और तैयार फलों की तुड़ाई करने में भी सुविधा रहती है.
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Manish Rai is a digital journalist with over 8 years of experience in regional and digital media. He is currently associated with News18 as the Local18 Uttar Pradesh Coordinator, where he works on planning, coo…
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