8 लाख सालों में सबसे ज्यादा CO2
वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का स्तर 8 लाख सालों में सबसे ज्यादा है। साल 2024 में इन गैसों में बढ़त जारी रही। साल 1750 की तुलना में देखें तो इसमें 151% की वृद्धि हुई है। चूंकि कार्बन डाइऑक्साइड पीढ़ियों तक वायुमंडल में बनी रह सकती है। ऐसे में यह लंबे समय तक गर्मी रोके रहती है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग का बड़ा कारण है।
समुद्र 65 सालों में सबसे गर्म
महासागरों में बढ़ती गर्मी ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। दरअसल, जितनी भी गर्मी ग्रीनहाउस गैस रोकती हैं, उसका 90% हिस्सा समुद्र में समाता है। साल 2024 में समुद्री ऊष्मा 65 सालों के टॉप पर पहुंच गई। आंकड़े बताते हैं कि 1960 से 2005 की अवधि की तुलना में समुद्र दोगुनी गति से गर्म हो रहे हैं। इससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं। जब से सैटेलाइट निगरानी शुरू हुई है, समुद्र का जलस्तर दोगुना हो गया है।
भारत एशिया में 5वां सबसे गर्म देश
क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच दुनिया के हर पांच में से एक शख्स ने अत्यधिक गर्मी झेली है। क्लाइमेट चेंज के कारण दुनियाभर के 39.40 करोड़ लोगों ने 30 दिन या इससे अधिक दिन अत्यधिक गर्मी झेली। एशिया में तेजी से बढ़ते औसत तापमान वाले 10 देशों में भारत 5वें नंबर पर है। दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक देशभर के 12 राज्यों में रहने वाले 35.80 करोड़ लोगों ने रोज सामान्य से ज्यादा गर्मी का सामना किया है।

