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Rohtas Bairi Famous Khurma: बिहार की यह साधारण सी दिखनी वाली मिठाई की डिमांड कई राज्यों में है. रोहतास के बैरी गांव के प्रसिद्ध हलवाई विकास कुमार साह बतलाते हैं कि खुरमे का स्वाद झारखंड और छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया है. शुद्ध देसी दूध और घर के बने पनीर से तैयार इस 300 रुपये प्रति किलो मिलने वाले खुरमे की मांग बोकारो, धनबाद और रांची जैसे शहरों में ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए लगातार बनी रहती है.
रोहतास: जिले के बैरी गांव की एक छोटी-सी मिठाई की दुकान इन दिनों अपने खुरमे के स्वाद और शुद्धता को लेकर चर्चा में है. दुकान भले ही छोटी है लेकिन यहां बनने वाले खुरमे की मांग रोहतास से निकलकर छत्तीसगढ, झारखंड के बोकारो, धनबाद और रांची तक पहुंच चुकी है. हलवाई विकास कुमार साह ने अपनी मेहनत, बेहतर सामग्री और मिठाई की गुणवत्ता के दम पर यह पहचान बनाई है. उनके खुरमे की खासियत इसका स्वाद और इसे तैयार करने में बरती जाने वाली शुद्धता है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ दूसरे शहरों के ग्राहक भी इस मिठाई को पसंद कर रहे हैं.
स्वाद और गुणवत्ता बनी इस मिठाई की पहचान
विकास कुमार साह बताते हैं कि उनकी दुकान छोटी जरूर है, लेकिन यहां बनने वाली मिठाई की गुणवत्ता किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है. उनका मानना है कि मिठाई की पहचान दुकान की सजावट या उसके आकार से नहीं बल्कि उसके स्वाद और गुणवत्ता से होती है. इसी सोच के साथ वे खुरमा बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर विशेष ध्यान देते हैं. उनके लिए ग्राहकों को अच्छी मिठाई उपलब्ध कराना सबसे जरूरी है.
जानें खुरमे की खासियत और बनाने की विधि
खुरमे की खासियत उसके स्वाद और उसे तैयार करने के तरीके में छिपी है. विकास बताते हैं कि वे मिठाई बनाने के लिए पाउडर वाले दूध का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि आसपास के गांवों से देसी दूध खरीदते हैं. बाजार से तैयार पनीर लाने के बजाय वे खुद ही दूध से पनीर तैयार करते हैं. उनका कहना है कि बाजार में मिलने वाले पनीर की शुद्धता को लेकर आशंका बनी रहती है. इसलिए वे अपनी मिठाई के लिए पनीर खुद बनाते हैं. इससे उन्हें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान रखने में मदद मिलती है.
सामग्री की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण
विकास के मुताबिक अच्छी मिठाई बनाने के लिए केवल बनाने का हुनर ही काफी नहीं है बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. इसी वजह से वे खुरमा तैयार करने में शुद्धता को प्राथमिकता देते हैं. उनका मानना है कि जब मिठाई अच्छी सामग्री से बनाई जाती है तो उसके स्वाद में भी अंतर नजर आता है. ग्राहकों को पसंद आने वाला यही स्वाद धीरे-धीरे उनकी दुकान की पहचान बन गया है.
रोहतास की मिठास झारखंड और छत्तीसगढ़ तक
बैरी गांव की इस दुकान की खास बात यह है कि इसका कारोबार केवल आसपास के गांवों तक सीमित नहीं है. विकास के खुरमे की मांग रोहतास जिले के अलावा झारखंड और छत्तीसगढ़ तक पहुंच रही है. खासकर झारखंड के बोकारो, धनबाद और रांची में उनके खुरमे की नियमित मांग रहती है. एक छोटी-सी दुकान में तैयार होने वाली मिठाई का दूसरे राज्यों तक पहुंचना विकास के कारोबार के विस्तार को दर्शाता है.
रोजाना 20 केजी तक बिक्री
विकास बताते हैं कि उनकी दुकान से प्रतिदिन करीब 15 से 20 किलो खुरमे की बिक्री होती है. इसके अलावा, हर महीने लगभग किलो खुरमा दूसरे स्थानों पर भी भेजा जाता है. लगातार मिल रही मांग से उन्हें अपने कारोबार के और आगे बढ़ने की उम्मीद है. ग्राहकों की पसंद और भरोसे ने उनकी छोटी-सी दुकान को एक अलग पहचान दिलाई है.
300 रुपये प्रति केजी दाम
कीमत की बात करें तो विकास कुमार साह अपने खुरमे को 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेचते हैं. उनका कहना है कि इस कीमत पर शुद्ध और अच्छी गुणवत्ता वाली मिठाई उपलब्ध कराने के बावजूद उन्हें कारोबार में अच्छा मुनाफा हो जाता है. वे ग्राहकों को उचित कीमत पर मिठाई देने के साथ उसकी गुणवत्ता बनाए रखने पर भी ध्यान देते हैं.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

