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Monsoon Gardening Tips: बारिश का मौसम गुलाब के पौधे लगाने के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है. इस मौसम में हाइब्रिड टी, फ्लोरिबुंडा, देसी गुलाब, मिनिएचर और क्लाइम्बिंग रोज़ जैसी किस्में तेजी से बढ़ती हैं और लंबे समय तक खूबसूरत फूल देती हैं. अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी, पर्याप्त धूप और समय-समय पर जैविक खाद देने से पौधे स्वस्थ रहते हैं. नियमित छंटाई और कीटों से सुरक्षा भी जरूरी है. यदि सही देखभाल की जाए तो ये गुलाब न केवल आपके घर और गार्डन की खूबसूरती बढ़ाएंगे, बल्कि पूरे वातावरण को रंगों और मनमोहक खुशबू से भी महका देंगे.
भीलवाड़ा: बारिश का मौसम पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. इस मौसम में मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से फैलती हैं और उनका विकास बेहतर होता है. अगर आप अपने घर के किचन गार्डन या आंगन को रंग-बिरंगे फूलों से सजाना चाहते हैं, तो गुलाब का पौधा सबसे बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. गुलाब न केवल अपनी खूबसूरती और खुशबू के लिए जाना जाता है, बल्कि इसकी कई ऐसी वैरायटी भी हैं जो कम देखभाल में अच्छी तरह बढ़ती हैं.
बारिश के मौसम में हाइब्रिड टी रोज, फ्लोरिबुंडा, डेसी रोज, मिनीएचर रोज और क्लाइंबर रोज जैसी वैरायटी लगाना अच्छा माना जाता है. हाइब्रिड टी गुलाब अपने बड़े और खूबसूरत फूलों के लिए मशहूर है, जबकि फ्लोरिबुंडा एक साथ कई फूल देता है और लंबे समय तक बगीचे की सुंदरता बनाए रखता है. अगर आपके पास कम जगह है तो मिनीएचर गुलाब गमलों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है. वहीं क्लाइंबर रोज दीवार, गेट या जाली पर चढ़कर पूरे घर की शोभा बढ़ा देता है. इन किस्मों के पौधे अलग-अलग रंगों में उपलब्ध होते हैं, जिससे आपका किचन गार्डन और भी आकर्षक दिखाई देता है.
गुलाब का पौधा लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां रोजाना कम से कम पांच से छह घंटे धूप आती हो. बारिश के समय पानी की निकासी का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि गमले या क्यारी में पानी भरने से जड़ें सड़ सकती हैं. पौधा लगाने से पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद, वर्मी कम्पोस्ट और थोड़ी रेत मिलाने से मिट्टी हल्की और उपजाऊ बन जाती है. इससे पौधे की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधा तेजी से बढ़ता है. पौधा लगाने के बाद शुरुआती दिनों में हल्की सिंचाई करें और जरूरत पड़ने पर पौधे को सहारा भी दें. स्वस्थ पौधा ही ज्यादा शाखाएं और अधिक फूल देता है.
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बारिश के मौसम में पौधों में फफूंद और कीट लगने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए समय-समय पर पौधों की जांच करते रहें. यदि पत्तियों पर काले धब्बे, सफेद परत या कीड़े दिखाई दें तो तुरंत जैविक उपाय अपनाएं. नीम का तेल या नीम आधारित घोल का छिड़काव करने से कई प्रकार के कीटों से बचाव किया जा सकता है. सूखी और खराब टहनियों की समय-समय पर छंटाई करने से नई शाखाएं निकलती हैं और फूलों की संख्या भी बढ़ती है. पौधों के आसपास खरपतवार न उगने दें और मिट्टी को हल्का ढीला करते रहें, ताकि जड़ों तक हवा और नमी आसानी से पहुंच सके. इससे पौधा लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है.
गुलाब के पौधे पर ज्यादा फूल आएं तो हर 20 से 25 दिन में जैविक खाद देना लाभदायक रहता है. गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, सरसों की खली का घोल और केले के छिलकों से बनी खाद पौधों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है. इनसे पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और फूलों का आकार भी अच्छा होता है. बारिश के दौरान जरूरत से ज्यादा खाद नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि अधिक नमी में पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं.
गुलाब का पौधा हर बगीचे की शान माना जाता है. इसकी रंग-बिरंगी वैरायटी न केवल घर की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि वातावरण को भी खुशबूदार बना देती है. बारिश का मौसम नए पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है, इसलिए अगर आप भी अपने घर, छत, बालकनी या आंगन को खूबसूरत बनाना चाहते हैं, तो इस मौसम में गुलाब की अच्छी किस्मों के पौधे जरूर लगाएं. थोड़ी सी देखभाल, सही मिट्टी और संतुलित खाद के साथ ये पौधे जल्दी बढ़ेंगे और आपके किचन गार्डन की सुंदरता में सचमुच चार चांद लगा देंगे.

