India
oi-Divyansh Rastogi
Adani
Carmichael
Coal
Mine:
ऑस्ट्रेलिया
के
क्वींसलैंड
सर्वोच्च
न्यायालय
ने
अडानी
ग्रुप
की
सहायक
कंपनी
ब्रावस
माइनिंग
एंड
रिसोर्सेज
के
पक्ष
में
ऐतिहासिक
फैसला
सुनाया
है।
कोर्ट
ने
जीवाश्म
ईंधन
विरोधी
प्रमुख
कार्यकर्ता
बेन
पेनिंग्स
को
कंपनी
के
कारमाइकल
कोयला
खदान
से
जुड़े
गोपनीय
व्यावसायिक
डेटा
को
प्राप्त
करने
या
उसके
दुरुपयोग
से
स्थायी
रूप
से
रोक
दिया
है।
यह
निर्णय
कई
वर्षों
से
चली
आ
रही
कानूनी
जंग
का
अंत
करता
है,
जिसमें
पर्यावरण
सक्रियता
और
कॉर्पोरेट
हितों
के
बीच
तनाव
उभरकर
सामने
आया।
ब्रावस
ने
बयान
जारी
कर
कहा
कि
यह
कदम
कंपनी
के
कर्मचारियों,
ठेकेदारों
और
वैध
संचालन
की
सुरक्षा
सुनिश्चित
करेगा,
बिना
किसी
राजनीतिक
अभिव्यक्ति
पर
पाबंदी
लगाए।

कारमाइकल
खदान,
जो
गैलिली
बेसिन
में
स्थित
है,
भारत
की
अडानी
ग्रुप
का
ऑस्ट्रेलिया
में
सबसे
बड़ा
निवेश
है।
यह
खदान
प्रतिवर्ष
लगभग
1
करोड़
टन
कोयला
उत्पादन
करती
है,
जो
मुख्य
रूप
से
एशियाई
बाजारों
(चीन,
जापान
और
कोरिया)
के
लिए
निर्यात
किया
जाता
है।
ब्रावस
के
मुख्य
परिचालन
अधिकारी
मिक
क्रो
ने
फैसले
का
स्वागत
करते
हुए
कहा,
‘
हमारा
उद्देश्य
कभी
पैसे
का
पीछा
नहीं
था।
हम
बस
चाहते
थे
कि
पेनिंग्स
गोपनीय
जानकारी
हासिल
कर
ठेकेदारों
को
धमकाने
या
परेशान
करने
का
खेल
बंद
करें।’
कंपनी
ने
कानूनी
खर्च
की
वसूली
न
करने
पर
सहमति
जताई,
जो
विवाद
को
सौहार्दपूर्ण
समाप्ति
देता
है।
विवाद
:
2020
से
चली
आ
रही
कानूनी
जंग
यह
मामला
2020
में
तब
शुरू
हुआ
जब
ब्रावस
ने
पेनिंग्स
के
खिलाफ
सिविल
मुकदमा
दायर
किया।
पेनिंग्स,
जो
गैलिली
ब्लॉकेड
ग्रुप
के
राष्ट्रीय
प्रवक्ता
हैं,
पर
आरोप
था
कि
उन्होंने
खदान
के
संचालन,
आपूर्तिकर्ताओं
और
ठेकेदारों
को
बाधित
करने
के
लिए
‘डायरेक्ट
एक्शन’
कैंपेन
चलाए।
इनमें
ब्लॉकेड,
कार्यालयों
में
घुसपैठ,
और
इंसाइडर
लीक्स
के
लिए
प्रोत्साहन
शामिल
थे।
अदालत
में
पेश
सबूतों
से
पता
चला
कि
पेनिंग्स
के
अभियानों
के
कारण
कई
प्रमुख
व्यवसायों
ने
ब्रावस
के
साथ
संबंध
तोड़
लिए,
जबकि
बाकी
को
अतिरिक्त
सुरक्षा
पर
करोड़ों
खर्च
करने
पड़े।
पेनिंग्स,
जो
पूर्व
ग्रीन्स
पार्टी
प्रचारक
और
ब्रिस्बेन
मेयर
पद
के
उम्मीदवार
रह
चुके
हैं,
स्टॉप
अडानी,
गैलिली
ब्लॉकेड
और
जेनरेशन
अल्फा
जैसे
आंदोलनों
के
प्रमुख
चेहरे
हैं।
उन्होंने
कारमाइकल
प्रोजेक्ट
को
पर्यावरण
के
लिए
घातक
बताते
हुए
विरोध
किया।
एक
बार
पिंकेंबा
में
खदान
और
रेल
प्रोजेक्ट
के
खिलाफ
प्रदर्शन
के
दौरान
उनकी
गिरफ्तारी
भी
हुई
थी।
उनके
समर्थक
इसे
‘सक्रियता
पर
हमला’
बताते
हैं,
लेकिन
ब्रावस
ने
जोर
दिया
कि
कार्रवाई
विशिष्ट
अवैध
कृत्यों-
जैसे
अनुबंध
भंग
प्रेरित
करना,
धमकी
का
अपराध,
अवैध
षड्यंत्र
और
आगे
कदाचार
रोकने
वाली
क्विया
टाइमेट
निषेधाज्ञा-
के
खिलाफ
थी।
मुकदमे
से
पहले
पेनिंग्स
ने
सबूत
पेश
करने
से
छूट
मांगी,
ताकि
खुद
को
दोषी
न
ठहराएं,
लेकिन
कोर्ट
ने
इसे
खारिज
कर
दिया।
अंततः,
स्थायी
आदेश
जारी
हो
गए,
जो
पेनिंग्स
को
ब्रावस
के
कर्मचारियों,
ठेकेदारों
या
संभावित
ठेकेदारों
से
गोपनीय
डेटा
मांगने
या
दूसरों
को
प्रोत्साहित
करने
से
रोकते
हैं।
हालांकि,
वैध
विरोध
या
वकालत
पर
कोई
पाबंदी
नहीं
है।
कोर्ट
के
आदेश:
क्या
प्रतिबंध
लगे,
क्या
बचा?
क्वींसलैंड
सर्वोच्च
न्यायालय
के
स्थायी
आदेशों
की
मुख्य
शर्तें
निम्नलिखित
हैं:

ये
आदेश
कंपनी
की
गोपनीयता
की
रक्षा
करते
हैं,
बिना
अभिव्यक्ति
की
स्वतंत्रता
पर
असर
डाले।
ब्रावस
और
अडानी
का
पक्ष:
सुरक्षा
और
रोजगार
पर
जोर
ब्रावस
ने
स्पष्ट
किया
कि
कारमाइकल
खदान
और
रेल
नेटवर्क
चार
वर्षों
से
अधिक
समय
से
चालू
हैं,
जो
हजारों
क्वींसलैंड
निवासियों
को
रोजगार
देते
हैं।
निर्माण
और
कमीशनिंग
के
दौरान
पेनिंग्स
के
अभियानों
ने
भारी
व्यवधान
पैदा
किया।
मिक
क्रो
ने
कहा,
‘
कई
प्रमुख
व्यवसाय
हमारे
साथ
काम
छोड़
चुके,
जबकि
बाकी
को
सुरक्षा
पर
अतिरिक्त
खर्च
करना
पड़ा।
हम
सक्रियता
का
स्वागत
करते
हैं,
लेकिन
अवैध
धमकियां
बर्दाश्त
नहीं।’
अडानी
ग्रुप
ने
बार-बार
जोर
दिया
कि
उनकी
परियोजनाएं
ऑस्ट्रेलिया
के
सबसे
कड़े
पर्यावरण
मानकों
का
पालन
करती
हैं।
ऑस्ट्रेलिया
वैश्विक
कोयला
निर्यात
में
अग्रणी
है-
चीन
इसका
सबसे
बड़ा
खरीदार
(लगभग
50%)
है,
उसके
बाद
जापान
और
कोरिया।
यह
फैसला
विदेशी
कंपनियों,
खासकर
भारत
जैसी
उभरती
अर्थव्यवस्थाओं
के
निवेशों
को
सक्रियता
की
चुनौतियों
से
निपटने
में
मददगार
साबित
हो
सकता
है।
पेनिंग्स
का
रिएक्शन:
‘मासिव
विक्टरी’,
लेकिन
संघर्ष
जारी
पेनिंग्स
ने
फैसले
को
‘मासिव
विक्टरी’
बताया,
क्योंकि
पांच
साल
पुरानी
अस्थायी
निषेधाज्ञा
हटा
ली
गई।
उन्होंने
कहा,
‘
अडानी
का
‘अटैक
डॉग
स्ट्रैटेजी’
विफल
हो
गया।
मैं
तुरंत
कारमाइकल
के
खिलाफ
डायरेक्ट
एक्शन
पर
लौटूंगा।’
उन्होंने
अमेरिकी
सरकार
द्वारा
गौतम
अडानी
पर
लगे
गिरफ्तारी
वारंट
का
जिक्र
कर
विवाद
को
राजनीतिक
रंग
दिया।
पेनिंग्स
ने
मुकदमे
से
बचने
पर
राहत
जताई
और
क्रिसमस
को
केस
की
छाया
के
बिना
मनाने
की
बात
कही।
उनके
समर्थक
इसे
पर्यावरण
कार्यकर्ताओं
पर
दबाव
की
मिसाल
मानते
हैं,
लेकिन
ब्रावस
ने
इसे
‘विशिष्ट
अवैध
आचरण’
तक
सीमित
रखा।
व्यापक
प्रभाव:
पर्यावरण
सक्रियता
vs
कॉर्पोरेट
हित
यह
फैसला
ऑस्ट्रेलिया
की
सबसे
लंबी
पर्यावरण-कॉर्पोरेट
कानूनी
लड़ाइयों
में
से
एक
का
अंत
है।
यह
दर्शाता
है
कि
कैसे
विशिष्ट
नई
परियोजनाएं
(जैसे
कारमाइकल)
सार्वजनिक
विरोध
का
केंद्र
बन
जाती
हैं,
जबकि
व्यापक
कोयला
निर्यात
जारी
रहता
है।
विशेषज्ञों
का
मानना
है
कि
यह
भारतीय
कंपनियों
के
लिए
वैश्विक
सक्रियता
से
निपटने
का
मॉडल
सेट
कर
सकता
है।
ब्रावस
ने
कहा,
‘
हम
वैध
विरोध
का
सम्मान
करते
हैं,
लेकिन
गोपनीयता
का
उल्लंघन
नहीं।’
पेनिंग्स
का
भविष्य
अब
वैध
सीमाओं
में
संघर्ष
पर
निर्भर
करेगा।
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