पटना. महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है. इस बात की सबको पहले से उम्मीद भी थी. लेकिन, जैसे ही मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया गया बिहार में सियासी पारा हाई हो गया है. महागठबंधन के इस फैसले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम (AIMIM) ने महागठबंधन पर करारा हमला बोला है. एआईएमआईएम ने इस बहाने बिहार चुनाव में मुस्लिमों की हिस्सेदारी और भागीदारी का सवाल उठते हुए कहा है कि 18 प्रतिशत वाल मुस्लिम समुदाय दरी बिछाने का काम करेगा और 2 प्रतिशत वाला डिप्टी सीएम बनेगा. आखिर एआईएमआईएम ने ऐसा कटाक्ष क्यों किया तो आइए इस पूरे मामले को समझते हैं, तब आगे बताएंगे कि एआईएमआईएम ने किन शब्दों से राजद-कांग्रेस पर कटाक्ष किया है.
एआईएमआईएम नेता का करारा कटाक्ष
मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक समझा जा रहा
बिहार एआईएमआईएम के अध्यक्ष का कहना है कि- हर चुनाव में उन्हें यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि-अगर सवाल पूछोगे तो बीजेपी आ जाएगी. उन्होंने कहा कि, जब भी सत्ता में भागीदारी की बारी आती है तो मुस्लिम समाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है. महागठबंधन ने फिर वही किया- बैकवर्ड समाज के नाम पर राजनीति, लेकिन मुस्लिमों को हिस्सेदारी नहीं. एआईएमआईएम नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ सत्ता का सवाल नहीं, बल्कि सम्मान और हिस्सेदारी का भी मुद्दा है. उन्होंने महागठबंधन पर प्रतीकात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि सिर्फ नारे और पोस्टर में मुसलमानों की तस्वीर लगाने से उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिलता.
बिहार चुनाव में महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को सीएम और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम घोषित किया, AIMIMने मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए हैं. उत्तर प्रदेश एआईएमआईएम अध्यक्ष शौकत अली के ट्वीट का स्क्रीनशॉट.
मुस्लिम भागीदारी पर ताजा विवाद की वजह
बता दें कि बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 17.7 प्रतिशत है. कई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोट 35 से 40 प्रतिशत तक हैं जो जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में AIMIM का तर्क है कि इतनी बड़ी आबादी को सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. दूसरी ओर, मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी का जनाधार मुख्य रूप से निषाद समाज में है जिसकी हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत मानी जाती है. हालांकि, पूरे समुदाय की उपजातियों को जोड़कर यह आबादी 8 से 9 प्रतिशथ के बीच है. इसी बात को लेकर AIMIM ने महागठबंधन पर जातिगत संतुलन के नाम पर एक वर्ग को ज्यादा तरजीह देने का आरोप लगाया है.
सीमांचल से उठी आवाज की गूंज पूरा बिहार
मुस्लिमों को BJP का डर दिखाओ, वोट ले लो
महागठबंधन के किसी बड़े नेता ने अब तक एआईएमआईएम के आरोपों पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है. हालांकि, कांग्रेस और राजद के कुछ स्थानीय नेताओं ने अनौपचारिक तौर पर कहा कि एआईएमआईएम के ऐसे बयान सिर्फ बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए दिए जा रहे हैं. इस पर एआईएमआईएम का जवाब साफ है- अगर कोई मुसलमान अपने अधिकार की बात करता है तो उसे बीजेपी का एजेंट कह दिया जाता है. एआईएमआईएम का कहना है कि मुस्लिम और वंचित समाज की आवाज बनने का दावा करने वाले दल अब वही गलती दोहरा रहे हैं जो बीजेपी के विरोध के नाम पर वर्षों से चली आ रही है-मुस्लिमों को डर दिखाओ, वोट ले लो, लेकिन सत्ता से दूर रखो. लेकिन अब यह डराने की राजनीति नहीं चलेगी.
महागठबंधन में ‘मुस्लिम प्रतिनिधित्व’ पर सवाल
राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह बयान चुनावी माहौल में बड़ा असर डाल सकता है. सीमांचल समेत कई मुस्लिम बहुल इलाकों में यह मुद्दा चर्चा में है.’अब्दुल तू चुप बैठ, वरना बीजेपी आ जाएगी’ वाली पंक्ति अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, और इसे महागठबंधन के ‘मुस्लिम प्रतिनिधित्व’ वाले दावों पर सीधा हमला माना जा रहा है. ऐसे में तेजस्वी यादव को सीएम फेस और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम चेहरा बनाए जाने के बाद एआईएमआईएम ने जो सवाल उठाया है, उसने चुनावी समीकरणों में नई बहस छेड़ दी है. अब देखने वाली बात यह होगी कि महागठबंधन इस आरोप का जवाब कैसे देता है-मुस्लिमों को भरोसे में लेकर या बीजेपी के डर का हवाला देकर!

