India
oi-Pallavi Kumari
Year
Ender
2025
Politics:
“चुनाव
जनता
का
होता
है,
फैसला
भी
जनता
का
ही
होता
है।”
अब्राहम
लिंकन
की
यह
बात
2025
की
भारतीय
राजनीति
पर
काफी
हद
तक
फिट
बैठती
है।
भले
ही
इस
साल
सिर्फ
दो
विधानसभा
चुनाव
हुए,
लेकिन
पूरा
साल
राजनीति
के
नाम
रहा।
सत्ता,
विपक्ष,
चुनाव
आयोग,
अदालतें
और
सड़क
से
संसद
तक
बहस,
हर
मोर्चे
पर
राजनीति
गर्म
रही।
साल
के
आखिर
तक
आते-आते
यह
साफ
हो
गया
कि
2024
के
लोकसभा
चुनाव
के
बाद
कमजोर
पड़ती
दिख
रही
भारतीय
जनता
पार्टी
ने
न
सिर्फ
वापसी
की,
बल्कि
चुनावी
नैरेटिव
पर
दोबारा
पकड़
भी
मजबूत
कर
ली।
इसके
समानांतर,
लोकतांत्रिक
प्रक्रियाओं
को
लेकर
अविश्वास
और
आरोपों
की
गूंज
भी
लगातार
सुनाई
देती
रही।

1.
दिल्ली
से
बिहार
तक
चला
भगवा
अभियान
2025
की
शुरुआत
ही
BJP
के
लिए
बड़ी
राहत
लेकर
आई।
27
साल
बाद
पार्टी
ने
दिल्ली
की
सत्ता
में
वापसी
की।
अरविंद
केजरीवाल
की
अगुवाई
वाली
आम
आदमी
पार्टी
70
में
से
सिर्फ
22
सीटों
पर
सिमट
गई,
जबकि
BJP
ने
48
सीटें
जीतकर
साफ
बहुमत
हासिल
किया।
शालीमार
बाग
से
विधायक
रेखा
गुप्ता
ने
मुख्यमंत्री
पद
की
शपथ
लेकर
दिल्ली
की
राजनीति
में
नया
अध्याय
शुरू
किया।
इसके
बाद
बिहार
में
भी
NDA
की
जीत
ने
विपक्ष
को
चौंका
दिया।
नीतीश
कुमार
ने
उम्र
और
सेहत
से
जुड़ी
तमाम
अटकलों
को
पीछे
छोड़ते
हुए
दसवीं
बार
मुख्यमंत्री
पद
की
शपथ
ली।
महागठबंधन
243
सीटों
वाली
विधानसभा
में
सिर्फ
35
सीटों
पर
सिमट
गया,
जिसमें
कांग्रेस
सबसे
कमजोर
कड़ी
साबित
हुई।
BJP
89
सीटों
के
साथ
सबसे
बड़ी
पार्टी
बनी,
जबकि
JDU
ने
85
सीटें
जीतीं।
साल
के
अंत
तक
NDA
18
राज्यों
और
दो
केंद्र
शासित
प्रदेशों
में
सत्ता
में
रही।
2.
राहुल
गांधी
का
बड़ा
आरोप,
‘वोट
चोरी’
की
बहस
तेज
2025
में
लोकतंत्र
को
लेकर
सबसे
ज्यादा
चर्चा
राहुल
गांधी
के
आरोपों
की
रही।
कांग्रेस
और
उसके
सहयोगी
दल
पहले
भी
EVM
को
लेकर
सवाल
उठाते
रहे
हैं,
लेकिन
इस
बार
लोकसभा
में
नेता
प्रतिपक्ष
राहुल
गांधी
ने
सीधे
चुनाव
आयोग
पर
ही
निशाना
साध
दिया।
राहुल
गांधी
ने
प्रेस
कॉन्फ्रेंस
कर
दावा
किया
कि
कई
सीटों
पर
वोटर
लिस्ट
में
हेरफेर
हुआ
है।
हरियाणा
चुनाव
का
जिक्र
करते
हुए
उन्होंने
कहा
कि
राय
विधानसभा
क्षेत्र
के
10
बूथों
में
एक
ही
ब्राजीलियन
मॉडल
की
तस्वीर
22
बार
इस्तेमाल
हुई।
यह
दावा
भारत
से
लेकर
अंतरराष्ट्रीय
मीडिया
तक
चर्चा
का
विषय
बन
गया।
इसी
दौरान
चुनाव
आयोग
ने
बिहार
समेत
कई
राज्यों
में
Special
Intensive
Revision
यानी
SIR
शुरू
किया।
विपक्ष
ने
इसे
‘छुपा
हुआ
NRC’
बताते
हुए
जोरदार
विरोध
किया।
3.
कर्नाटक
में
सत्ता
की
कुर्सी
और
नाश्ते
की
राजनीति
कर्नाटक
में
साल
भर
नेतृत्व
परिवर्तन
की
अटकलें
चलती
रहीं।
मुख्यमंत्री
सिद्धारमैया
और
उपमुख्यमंत्री
डीके
शिवकुमार
के
बीच
कथित
खींचतान
ने
कांग्रेस
को
मुश्किल
में
डाला।
लेकिन
दिल्ली
के
दो
‘ब्रेकफास्ट
मीटिंग’
ने
फिलहाल
सरकार
को
बचा
लिया।
सिद्धारमैया
ने
भरोसा
जताया
कि
पार्टी
हाईकमान
उनके
पूरे
कार्यकाल
के
साथ
है।
वहीं
BJP
ने
विधानसभा
में
इस
मुद्दे
को
उठाकर
सरकार
को
अस्थिर
बताया
और
कहा
कि
राजनीतिक
अनिश्चितता
विकास
को
प्रभावित
कर
रही
है।
4.
आतंक
पर
जवाब
और
सीमा
पर
तनाव
2025
सुरक्षा
के
लिहाज
से
भी
आसान
नहीं
रहा।
अप्रैल
में
पहलगाम
आतंकी
हमले
में
26
नागरिकों
की
मौत
के
बाद
भारत
ने
मई
में
ऑपरेशन
सिंदूर
के
तहत
पाकिस्तान
और
PoK
में
आतंकी
ठिकानों
पर
सटीक
कार्रवाई
की।
इसके
बाद
सीमा
पर
तनाव
बढ़ा,
जो
10
मई
को
सीजफायर
के
बाद
थमा।
हालांकि
विपक्ष
को
मुद्दा
तब
मिला,
जब
अमेरिका
के
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
ने
दावा
किया
कि
उन्होंने
व्यापार
रोकने
की
धमकी
देकर
भारत-पाक
सीजफायर
कराया।
5.
संसद
में
कानून,
सियासत
और
इस्तीफा
साल
2025
में
संसद
भी
लगातार
सुर्खियों
में
रही।
वक्फ
संशोधन
कानून
और
VB-G
RAM
G
कानून
ने
तीखी
बहस
को
जन्म
दिया।
सरकार
ने
वक्फ
कानून
को
पारदर्शिता
और
मुस्लिम
महिलाओं
के
सशक्तिकरण
से
जोड़ा,
जबकि
विपक्ष
ने
इसे
अधिकारों
पर
हमला
बताया।
VB-G
RAM
G
कानून
के
जरिए
मनरेगा
की
जगह
नया
ढांचा
लाया
गया,
जिसमें
हर
साल
125
दिन
रोजगार
की
गारंटी
दी
गई।
लेकिन
महात्मा
गांधी
का
नाम
हटाए
जाने
और
राज्यों
पर
आर्थिक
बोझ
को
लेकर
विपक्ष
ने
विरोध
किया।
इसी
साल
जुलाई
में
उपराष्ट्रपति
जगदीप
धनखड़
का
अचानक
इस्तीफा
भी
चर्चा
में
रहा।
सितंबर
में
सीपी
राधाकृष्णन
ने
नए
उपराष्ट्रपति
के
रूप
में
शपथ
ली।
6.
तमिलनाडु
में
राज्यपाल
बनाम
सरकार
तमिलनाडु
में
मुख्यमंत्री
एमके
स्टालिन
और
राज्यपाल
आरएन
रवि
के
बीच
टकराव
पूरे
साल
जारी
रहा।
सुप्रीम
कोर्ट
के
फैसले
के
बाद
राज्य
सरकार
ने
10
विधेयकों
को
अधिसूचित
किया,
लेकिन
बाद
में
अदालत
की
सलाह
ने
‘डीम्ड
असेंट’
पर
सवाल
खड़े
कर
दिए।
7.
2026
की
ओर
बढ़ता
सियासी
भारत
2026
में
पश्चिम
बंगाल,
केरल,
तमिलनाडु,
असम
और
पुडुचेरी
में
चुनाव
होने
हैं।
SIR
को
लेकर
विवाद
अभी
थमा
नहीं
है।
बड़ा
सवाल
यही
है
कि
क्या
विपक्ष
2025
की
हार
से
उबर
पाएगा
या
BJP
अपनी
पकड़
और
मजबूत
करेगी।
लेकिन
चुनावी
जीत-हार
से
ऊपर,
लोकतांत्रिक
संस्थाओं
पर
भरोसे
की
बहाली
और
संघीय
संतुलन
की
चिंता
2025
की
सबसे
बड़ी
विरासत
बनकर
रह
गई
है।
-

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