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World Sparrow Day: मेहसाणा की सेवा सजीव सेतु संस्था पिछले आठ साल से गौरैया के घोंसलों का वितरण कर रही है. पिछले सात सालों में संस्था द्वारा 14000 से अधिक घोंसलों का वितरण किया गया है. इस साल भी 2000 घोंसलों का …और पढ़ें

हाइलाइट्स
- मेहसाणा में 14000 से अधिक गौरैया घोंसलों का वितरण हुआ.
- सेवा सजीव सेतु संस्था ने 2000 घोंसलों का वितरण किया.
- गौरैया की संख्या में वृद्धि, 2 लाख नई गौरैया देखी गईं.
मेहसाणा: दुनियाभर में हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है. इस दिन की शुरुआत साल 2010 में हुई थी. आज गौरैया के घोंसलों का वितरण किया गया. गर्मियों की कड़ी धूप में जहां इंसानों का जीवन कठिन हो जाता है, वहां पक्षियों के लिए खुले आसमान और धरती पर जीवन और भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में मेहसाणा की “सेवा सजीव सेतु” संस्था पक्षियों के लिए वरदान बन रही है. संस्था द्वारा विभिन्न सेवाकार्य के साथ सालों से चल रही पक्षी घर वितरण की परंपरा इस साल भी जारी है. इस साल संस्था द्वारा चार बार मुफ्त पक्षी घर का वितरण किया गया, जो पक्षियों के लिए गर्मियों में राहत का काम करेगा.
2000 से अधिक बॉक्स तैयार कराकर उनका वितरण
“सेवा सजीव सेतु” के कार्यकर्ता राजूभाई चौधरी ने बताया कि संस्था पहले गौरैयों के लिए मिट्टी के घोंसलों का वितरण करती थी. लेकिन, अध्ययन के बाद पता चला कि गौरैया गत्ते के बॉक्स में बेहतर तरीके से अंडे देती हैं. तब से, संस्था गत्ते के बॉक्स का वितरण करने लगी. ये बॉक्स उन्हें 8 रुपये में प्रिंट के साथ मिलते हैं. हर साल संस्था 2000 से अधिक बॉक्स तैयार कराकर उनका वितरण करती है.
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“सेवा सजीव सेतु” के 15 सदस्य गर्मियों में हर रविवार को पक्षी प्रेमियों को पक्षी घर का वितरण करते हैं. इस सेवा कार्य के परिणामस्वरूप मेहसाणा में गौरैयों की संख्या में वृद्धि देखी गई है. एक समय जहां गौरैया दुर्लभ हो गई थी, वहां आज इस सेवाकार्य के कारण लगभग 2 लाख गौरैया देखी जा सकती हैं. सामाजिक कार्यकर्ता राजूभाई चौधरी के अनुसार, पिछले 7 साल से गौरैया के घोंसलों का वितरण किया जा रहा है. हर साल 20 मार्च ‘गौरैया दिवस’ पर 2000 घोंसलों का वितरण किया जाता है, और उसके बाद आने वाले रविवार को भी घोंसलों का वितरण जारी रहता है.
14,000 से अधिक गौरैया के घोंसलों का वितरण
कार्यकर्ता राजूभाई चौधरी के अनुसार, पिछले सात सालों में 14,000 से अधिक गौरैया के घोंसलों का वितरण किया गया है. इन सेवाकार्यों के परिणामस्वरूप मेहसाणा और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 2 लाख नई गौरैयों का उद्भव हुआ है, ऐसा स्थानीय लोग मानते हैं. लोग अब गौरैयों को फिर से देखने का आनंद व्यक्त कर रहे हैं. आठ साल से चल रहे इस प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न सेवाकार्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इस बार रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया है, जिसमें लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं और रक्तदान करके खुशी महसूस कर रहे हैं.

