नई दिल्ली: रूस से मिली खुफिया जानकारी ने भारत में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार कर ऐसा खुलासा किया है. इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है. यह मामला सिर्फ अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रोन तकनीक, ट्रेनिंग और म्यांमार के उग्रवादी समूहों से कथित संबंधों तक फैला हुआ है. जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को एक ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल कर रहा था. बताया जा रहा है कि ये सभी आरोपी अलग-अलग समय पर टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और फिर गुवाहाटी होते हुए मिजोरम पहुंचे. वहां से बिना जरूरी अनुमति के म्यांमार में घुस गए. इस पूरी साजिश की खबर रूस को लगी. रूस ने तुरंत इस खुफिया जानकारी को भारत के साथ साझा की. इसके बाद इन सभी का भंडाफोड़ हो गया.
NIA के अनुसार इनका मकसद वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को आधुनिक युद्ध तकनीक सिखाना था. खास बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन का सुराग रूस की ओर से साझा की गई जानकारी से मिला. इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने करीब तीन महीने तक जाल बिछाकर इन आरोपियों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से दबोच लिया.
NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनियों को गिरफ्तार किया.
कौन है मैथ्यू आरोन वैनडाइक और क्या है पूरा मामला?
- NDTV की रिपोर्ट के अनुसार मैथ्यू आरोन वैनडाइक खुद को सुरक्षा विश्लेषक, युद्ध संवाददाता और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर बताता है. वह पहली बार साल 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान चर्चा में आया था, जब उसने विद्रोही लड़ाकों के साथ मिलकर संघर्ष में हिस्सा लिया. उस दौरान उसे कैद भी किया गया था. विश्वविद्यालय की पढ़ाई के बाद उसने उत्तर अफ्रीका और मिडिल ईस्ट की लंबी मोटरसाइकिल यात्रा की थी, जहां उसने स्थानीय लोगों से गहरे संबंध बनाए. लीबिया में क्रांति भड़कने पर उसने सीधे मोर्चे पर उतरने का फैसला किया.
- लीबिया के अनुभव के बाद वैनडाइक ने ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नाम का संगठन बनाया, जो दुनिया के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में स्थानीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने का दावा करता है. जांच एजेंसियों के मुताबिक वह गुरिल्ला युद्ध, ड्रोन ऑपरेशन, जेमिंग तकनीक और आधुनिक युद्ध रणनीतियों में ट्रेनिंग देता रहा है. उसके सोशल मीडिया और डिवाइस से मिले इनपुट्स से संकेत मिलता है कि वह कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से जुड़ा रहा है और खुद को एक तरह का फ्रीलांस मिलिट्री इंस्ट्रक्टर मानता है.
- NIA की जांच में यह भी सामने आया है कि वैनडाइक और उसके साथियों ने कई बार म्यांमार की यात्रा की और वहां सक्रिय समूहों को ट्रेनिंग दी. एजेंसी का दावा है कि ये लोग यूरोप से ड्रोन और अन्य उपकरण लाकर म्यांमार तक पहुंचाने में भी शामिल थे. इस पूरे ऑपरेशन में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को एक अहम कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल किया गया.
- दूसरी ओर यूक्रेनी नागरिकों को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल है. यूक्रेन ने निष्पक्ष जांच और अपने नागरिकों को कानूनी सहायता देने की बात कही है. वहीं अमेरिकी पक्ष ने अभी तक सीमित प्रतिक्रिया दी है. इस केस ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने सीमा पार नेटवर्क और नई तकनीकों के इस्तेमाल की गंभीर चुनौती को उजागर कर दिया है.
क्या यह मामला सिर्फ अवैध घुसपैठ का है या इससे बड़ा खतरा जुड़ा है?
यह मामला साधारण घुसपैठ से कहीं बड़ा है. इसमें ड्रोन युद्ध तकनीक, आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका शामिल है. अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, खासकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में जहां पहले से संवेदनशील हालात हैं.
वैनडाइक का ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ कितना प्रभावशाली संगठन है?
यह संगठन खुद को एक निजी सैन्य प्रशिक्षण इकाई के रूप में प्रस्तुत करता है. हालांकि इसकी गतिविधियां विवादों में रही हैं. कई रिपोर्ट्स में इसे संघर्ष क्षेत्रों में गैर-सरकारी सैन्य हस्तक्षेप से जोड़कर देखा गया है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और मंशा पर सवाल उठते हैं.
रूस की भूमिका इस पूरे मामले में कितनी अहम रही?
रूस की ओर से मिली खुफिया जानकारी इस कार्रवाई की शुरुआत का आधार बनी. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि रूस ने कितनी विस्तृत जानकारी साझा की. लेकिन इतना तय है कि उसी इनपुट के बाद भारतीय एजेंसियां सक्रिय हुईं और ऑपरेशन को अंजाम दिया गया.
क्या इस मामले से भारत-यूक्रेन और भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है?
फिलहाल दोनों देशों ने सावधानी से प्रतिक्रिया दी है. यूक्रेन ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि अमेरिका ने सीमित टिप्पणी की है. हालांकि अगर जांच में गंभीर आरोप साबित होते हैं तो कूटनीतिक स्तर पर कुछ तनाव देखने को मिल सकता है.
NIA की जांच और आगे की कार्रवाई
NIA अब इस पूरे नेटवर्क के भारतीय कनेक्शन की तलाश में जुटी है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर किसने इन विदेशी नागरिकों को भारत के भीतर आवाजाही और म्यांमार तक पहुंचने में मदद की. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस नेटवर्क के और सदस्य अभी भी सक्रिय हैं.

