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oi-Divyansh Rastogi
Tariff Strikes Down Trump Reaction: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए बड़े ग्लोबल टैरिफ को 6-3 के बहुमत से रद्द कर दिया। यह फैसला ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ ट्रेड पॉलिसी के लिए बड़ा झटका है, जिसने दुनिया भर में अनिश्चितता पैदा की थी।
ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत कांग्रेस (US संसद) की मंजूरी बिना ही कनाडा, भारत, चीन समेत कई देशों पर टैरिफ थोपे थे। कोर्ट ने इसे सत्ता का दुरुपयोग माना और कहा कि IEEPA टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं देता।

Donald Trump Reaction On US Supreme Court Tariff Decision: ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया क्या रही?
फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने इसे ‘बहुत निराशाजनक’ (Deeply Disappointing) बताया और कुछ जस्टिसों पर ‘शर्म आती है’ (Ashamed) कहा। उन्होंने कहा कि अदालत के कुछ सदस्यों में ‘देश के लिए सही काम करने का साहस नहीं है’। व्हाइट हाउस में गवर्नर्स के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान ट्रंप भड़क उठे और फैसले को ‘शर्मनाक’ बताया। CNN और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि ‘ये घटिया अदालतें’हैं।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि फैसला ‘विदेशी हितों’ से प्रभावित है और कुछ जस्टिसों को ‘अनपैट्रियॉटिक और डिसलॉयल’ बताया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने उन्हें ‘लाइसेंस देने का अधिकार दिया, लेकिन फीस लेने का नहीं’। ट्रंप ने इसे ‘बेतुका’ बताया। ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ‘कोर्ट ने मुझे हर चीज रोकने का अधिकार दिया, लेकिन $1 भी चार्ज करने का नहीं। यह दूसरे देशों की रक्षा के लिए है, हमारी नहीं।’ उन्होंने कोर्ट के फैसले को ‘अजीब’ बताया और कहा कि यह प्रेसिडेंट की पावर को ‘कम करने के बजाय ज्यादा मजबूत’ बनाता है।
“Effective immediately, all National Security TARIFFS, Section 232 and existing Section 301 TARIFFS, remain in place, and in full force and effect. Today I will sign an Order to impose a 10% GLOBAL TARIFF, under Section 122, over and above our normal TARIFFS already being… pic.twitter.com/B3bv5f5KW1
— The White House (@WhiteHouse) February 20, 2026 “>
What Is Trump Backup Plan: ट्रंप का बैकअप प्लान – क्या टैरिफ अब भी लागू रहेंगे?
ट्रंप ने ‘गेम टू’ का ऐलान किया और तुरंत एक्शन लिया। कहा कि सभी नेशनल सिक्योरिटी टैरिफ, सेक्शन 232 और मौजूदा सेक्शन 301 टैरिफ ‘तुरंत लागू’ और ‘पूरी तरह लागू’ रहेंगे। उन्होंने 21 फरवरी को ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 122 के तहत, पहले से लिए जा रहे नॉर्मल टैरिफ के अलावा 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने के ऑर्डर पर साइन करने की बात कही। कई सेक्शन 301 और अन्य जांचें शुरू की जाएंगी ताकि ‘अनफेयर ट्रेडिंग प्रैक्टिस’ से देश को बचाया जा सके।
ट्रंप ने जस्टिस ब्रेट कावानॉ के डिसेंट का हवाला दिया, जहां उन्होंने कहा कि अन्य कानून (सेक्शन 232, 301, 122 आदि) से टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ट्रंप का दावा कि ‘कोर्ट ने सिर्फ IEEPA के एक खास इस्तेमाल को रद्द किया, टैरिफ को नहीं। अब प्रेसिडेंट की पावर ज्यादा क्लियर और मजबूत हो गई है।’
Tariff Strikes Down India Impact: भारत पर क्या असर?
ट्रंप ने भारत पर टैरिफ 50% से घटाकर 25% किया था (आगे 18% होने वाला था)। कोर्ट के फैसले से IEEPA-बेस्ड टैरिफ का आधार खत्म हो गया, लेकिन सेक्शन 122 या 301 जैसे अन्य कानूनों से कुछ टैरिफ बने रह सकते हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील (मार्च में फाइनल होने वाली) पर असर पड़ सकता है।
Tariff Strikes Down Trump Political Impact: राजनीतिक असर क्या?
ट्रंप के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि टैरिफ उनकी कोर पॉलिसी थे। कुछ रिपब्लिकन्स ने फैसले की तारीफ की, डेमोक्रेट्स ने इसे ‘ओवररीच’ का अंत बताया। ट्रंप ने कहा कि वे आसानी से हार नहीं मानेंगे और ‘अमेरिका को फिर से महान’ बनाने के लिए आगे बढ़ेंगे।
What Is IEEPA: क्या है टरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट? US प्रेसिडेंट की इमरजेंसी पावर
आसान शब्दों में समझें तो IEEPA एक ऐसा US फेडरल कानून है, जो किसी विदेशी खतरे की स्थिति में प्रेसिडेंट को आर्थिक कार्रवाई करने का अधिकार देता है। लेकिन यह अधिकार कितना बड़ा है और इसकी सीमा कहां तक है, यही असली सवाल है। IEEPA का पूरा नाम है International Emergency Economic Powers Act। इसे 28 दिसंबर 1977 को लागू किया गया था और उस समय के प्रेसिडेंट Jimmy Carter ने इस पर साइन किया था।
- यह कानून 1917 के पुराने Trading with the Enemy Act की जगह सुधार के रूप में लाया गया था। उस पुराने कानून का शांति के समय में भी ज्यादा इस्तेमाल होने लगा था, जिससे विवाद खड़े हो रहे थे। इसलिए कांग्रेस (US संसद) चाहती थी कि प्रेसिडेंट के इमरजेंसी अधिकार सीमित और स्पष्ट हों। IEEPA सिर्फ उन खतरों पर लागू होता है, जिनका सोर्स विदेश में हो। मतलब, अगर कोई ‘असाधारण और असामान्य’ खतरा US की नेशनल सिक्योरिटी, फॉरेन पॉलिसी या इकोनॉमी को बाहर से प्रभावित कर रहा है, तभी इसका इस्तेमाल हो सकता है। जब प्रेसिडेंट नेशनल इमरजेंसी घोषित करते हैं, तो वे फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजैक्शन को रेगुलेट कर सकते हैं, विदेशी एसेट्स फ्रीज कर सकते हैं, पेमेंट ट्रांसफर रोक सकते हैं या किसी देश या संस्था के साथ आर्थिक डील पर पाबंदी लगा सकते हैं।
- इन पावर का असली संचालन US ट्रेजरी के तहत काम करने वाला Office of Foreign Assets Control यानी OFAC करता है। यही एजेंसी सैंक्शन लिस्ट जारी करती है और तय करती है कि किन लोगों, कंपनियों या देशों पर आर्थिक रोक लगेगी।
- 1980 के दशक से IEEPA US की ज्यादातर आर्थिक पाबंदियों का कानूनी आधार बन चुका है। ईरान, रूस, नॉर्थ कोरिया और वेनेजुएला जैसे देशों पर लगे कई सैंक्शन इसी कानून के तहत लागू किए गए हैं। हालांकि, 2025-26 में इस कानून को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ। 2025 की शुरुआत में प्रेसिडेंट Donald Trump ने ट्रेड घाटे को नेशनल इमरजेंसी बताते हुए IEEPA के तहत कई देशों से आने वाले इंपोर्ट पर बड़े टैरिफ लगा दिए। यह कदम इसलिए चौंकाने वाला था, क्योंकि IEEPA का इस्तेमाल पहले कभी सीधे टैरिफ यानी इंपोर्ट टैक्स लगाने के लिए नहीं किया गया था। परंपरागत रूप से इसका उपयोग एसेट फ्रीज करने या फाइनेंशियल सैंक्शन के लिए होता रहा है, न कि टैक्स लगाने के लिए। इस फैसले को कई राज्यों, बिजनेस और इंपोर्टर्स ने कोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क था कि US संविधान के आर्टिकल I, सेक्शन 8 के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को है, न कि प्रेसिडेंट को।
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