Last Updated:
Tamil Nadu chunav: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर आए तमाम ओपिनियन पोल में एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को बढ़त दिखाई जा रही है, लेकिन एआईएडीएमके-बीजेपी (एनडीए) गठबंधन कड़ी टक्कर दे रहा है। इस चुनाव में अभिनेता थलापति विजय की पार्टी टीवीके एक्स फैक्टर बनकर उभरी है। तमिलनाडु चुनाव में इस बार एंटी-इंकम्बेंसी वोटर किस प्रकार से निर्णायक रोल निभा सकते हैं आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं. इसके अलावा यह भी जानते हैं कि तमिलनाडु चुनाव में राहुल गांधी और एमके स्टालिन की जोड़ी किस प्रकार से पीएम मोदी और पलानीस्वामी का सामना कर रहे हैं.

तमिलनाडु चुनाव में एमके स्टालिन और राहुल गांधी की जोड़ी को बड़ी जीत का अनुमान है.
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है. सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे. तमिलनाडु चुनाव को लेकर अब तक सामने आए तमाम ओपिनियन पोल में मौजूदा एमके स्टालिन सरकार को बढ़त को दिखाया जा रहा है, लेकिन एनडीए की अगवाई कर रहे AIADMK एडप्पादी के. पलानीस्वामी भी उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं. इस पूरे राजनीतिक खेल में एक और नाम थलापति विजय और उनकी उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) भी लोगों का ध्यान खींच रहा है. एमके स्टालिन और पलानीस्वामी के बीच सीधी जंग में थलापति विजय का क्या रोल है. विजय पर अगर तमिलनाडु की जनता भरोसा करती है तो इसका किसे फायदा होगा किसे नुकसान होगा, आइए इन तमाम सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.
तमिलनाडु चुनाव में विजय के परफॉर्मेंस पर टिकी है इंडिया गठबंधन की जीत!
तमिलनाडु चुनाव को लेकर अभी तक जितने भी ओपिनियन पोल आए हैं उसमें थलापति विजय को लगभग 15 से 20 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है. अगर इसे ही आधार मानें तो थलपति विजय शहरी क्षेत्र के एंटी इंकम्बेंसी वोटरों को अपने पाले में कर सकते हैं. वहीं ग्रामीण इलाकों में सरकार से नाराज वोटर एनडीए के साथ जा सकता है.
अभिनेता से राजनीति में आए थलापति विजय मजबूती से तमिलनाडु चुनाव में लड़ते दिख रहे हैं.
इस पूरे राजनीतिक खेल में यह भी ध्यान देने वाली बात है कि थलापति विजय अपनी पार्टी बनाने के बाद अब तक केवल पार्टी मुख्यालय या सोशल मीडिया के जरिए ही अपनी बात रख रहे थे. इस बार का चुनाव पहला मौका है जब विजय जमीन पर उतरे हैं. देखना दिलचस्प होगा कि वह तमिलनाडु के वोटरों के दिल में अपनी कितनी जगह बना पाते हैं.
तमिलनाडु में क्या रहा है वोटों का गणित?
तमिलनाडु में पिछले पांच चुनावों के वोटिंग पैटर्न में एक बात गौर करने लायक है. इस राज्य में जब एमके करुणानिधि और और जयललिता राजनीति करते रहे तब दोनों ने अपना-अपना वोट बैंक बना लिया था. इसे आसान भाषा में समझें तो अगर तमिलनाडु में सौ वोटर हैं तो उसमें से 40-40 वोटर जयललिता और करुणानिधि के चेहरे के साथ हमेशा इंटैक्ट रहे. तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में देखा गया है कि पूरे राज्य में महज 10 फीसदी वोटर न्यूट्रल होते हैं. जिस चुनाव में यही 10 फीसदी वोटर करुणानिधि या जयललिता को सपोर्ट कर देते उनकी पार्टी जीतती रही. राजनीति के जानकार मानते हैं कि DMK और AIADMK के अधिकतम वोटर करीब-करीब हर चुनाव में इंटैक्ट रहते हैं. इसी वोटिंग पैटर्न को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर थलापति विजय के जरिए एंटी इनकंबेंसी वोटों का बंटवारा होता है तब राहुल गांधी और एमके स्टालिन की जोड़ी वाले इंडिया गठबंधन को फायदा हो सकता है.
तमिलनाडु में बीजेपी डीएमके को कैसे डैमेज करेगी?
इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एक बात और गौर करने लायक है. AIADMK के साथ बीजेपी खड़ी है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के चलते देश के किसी भी हिस्से में वोटरों के कुछ हिस्से के स्विंग से इनकार नहीं किया जा सकता है. इसके अलाव बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पूरी तरह से तमिलनाडु चुनाव की देखरेख करने की ड्यूटी पर लगा दी है. दूसरी तरफ यह भी देखना होगा कि इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय चेहरा राहुल गांधी तमिलनाडु में अपने इंडिया गठबंधन को कितना फायदा पहुंचा सकते हैं. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की रणनीति और पीएम मोदी की लोकप्रियता का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को कितना फायदा होता है.
About the Author
अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें

