इस वक्त क्या गजब चल रहा है, वो आप देखिए कि राहुल गांधी और कांग्रेस 1 नवंबर की तैयारी में जुटे हैं. इसके लिए माहौल बना रहे हैं कोई धमकी दे रहा है, कोई घर में ही संसद लगाने की बात कर रहा है. लेकिन उधर इनको झटके पर झटके लग रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में आज जो हुआ, उसके बारे में आपको बताएंगे. क्योंकि कल रात को ही चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था और इस हलफनामे ने राहुल गांधी का पूरा नैरेटिव ही ध्वस्त कर दिया. उधर बाप वाले बयान पर इनके सहयोगी ही इन्हें सुना रहे हैं.
लेकिन पहले ये देख लीजिए कि कांग्रेस और राहुल गांधी कितना ही माहौल बना लें, खरगे ने पीएम मोदी पर जो बयान दिया था, उसमें तो इनको लेने के देने पड़ गए हैं क्योंकि बीजेपी ने पूरा गेम ही पलट दिया है. जैसे राहुल गांधी ने चौकीदार चोर कहा था और बीजेपी ने इसी पर मैं भी चौकीदार का कैंपेन बना दिया था. उसी तरह से इस बार भी बीजेपी ने खरगे के बयान पर ही नया कैंपेन लॉन्च कर दिया और एक तरह से 2029 का नारा भी दे दिया. एक बार देखिए कि बीजेपी किस तरह से अग्रेसिव होकर फ्रंट फुट पर खेल रही है.
कांग्रेस को समझाने में जुटे सहयोगी
इधर बीजेपी ने खरगे के बयान पर पूरे गेम पलट दिया है उधर कांग्रेस के सहयोगी भी उन्हें ये समझा रहे हैं कि ये सब मत बोलो, नुकसान हो जाएगा. भाषा पर संयम रखो. सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के पिता जी के लिए जो कहा है, उससे हम बिल्कुल सहमत नहीं हो सकते. राजनीति में भाषा पर संयम रखना बहुत आवश्यक है. नेताओं को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए, वरना ये स्थिति बिगड़ती ही चली जाएगी. बड़े नेता अगर ऐसा करेंगे, तो छोटे नेताओं को फिर कौन रोकेगा? पता नहीं वे किस-किस तरह की भाषा का प्रयोग करने लगेंगे. तो मेरा खरगे साहब के बयान से कोई ताल्लुक नहीं है.’
खरगे के बयान पर मायावती ने भी आपत्ति जताई. मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘भारतीय राजनीति का स्तर गिर रहा है. ये बहुत ही दुखद है. शीर्ष स्तर के नेता इस तरह की भाषा बोल रहे हैं. राजनीतिक माहौल को और भी अधिक कड़वा और विषैला बना दिया गया है. सभी लोग इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दें तो यह बेहतर होगा.’
SIR-फॉर्म 6 पर नैरेटिव ध्वस्त
इधर ये सब बवाल मचा है. उधर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा देकर ऑन रिकॉर्ड ये कह दिया है कि SIR, फॉर्म 6 और जितने भी फैसले हैं. वो सब आपसी सहमति से लिए गए हैं लेकिन इंडी वाले अभी भी लगे हुए हैं कि इसमें कुछ विवाद निकाल लें. इसमें कुछ मसाला मिल जाए. इसलिए आप देखिए कि चुनाव आयोग कल सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है. उस पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान राहुल गांधी और इंडी के नेताओं की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के सामने कुछ मांग रखी. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ये ऑर्डर पास करे कि चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़ी जो फाइल नोटिंग्स और इंटरनल कॉम्यूनिकेशन है, उन्हें संभाल कर रखने का आदेश दिया जाए, क्योंकि इसी से पता चलेगा कि फैसले एकतरफा लिए गए हैं या सहमति से.
इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि हमें सब पता है, हम हर चीज को देखेंगे. इसके अलावा ममता बनर्जी की पार्टी की सांसद डोला सेन के वकील ने कहा कि चुनाव आयोग ने हलफनामे से तो ये साबित हो जाता है कि आयोग ने फॉर्म 6 से छेड़छाड़ की है. इस पर चुनाव आयोग के वकील ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा ये बाहर जो बयानबाजी की जाती है वैसा ही है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग के हलफनामे को पढ़ने और उस पर जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा. कोर्ट ने सभी पक्षों को 10 दिन में जवाब दाखिल करने को कहा है. अगली सुनवाई अब दिवाली के बाद 17 नवंबर को हो सकती है.
कांग्रेस को झटके पर झटका
राहुल गांधी और कांग्रेस को झटके पर झटके मिल रहे हैं, लेकिन ये लोग लगे है कि 1 नवंबर को दिल्ली में 10 लाख लोग इकट्ठा करेंगे. अब दिल्ली के व्यापारी भी परेशान है क्योंकि बार बार रैली और प्रोटेस्ट वाले ड्रामे को वो आए दिन देख चुके हैं. एक नवंबर को होने वाली रैली को लेकर चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को फिर पत्र लिखा. व्यापारियों ने चिंता जताई की दिवाली-धनतेरस जैसे फेस्टिव सीजन में रैली से पूरी कारोबार चौपट हो जाएगा.
रामलीला रैली टालने की डिमांड
CTI ने रैली को बाद शिफ्ट करने की मांग की और कहा कि अगर रैली में 10 लाख लोग आएंगे तो लगभग 20 हजार गाड़ियां भी आएंगी. CTI का कहना है कि 20 हजार गाड़ियां आएंगी तो पार्किंग कहां होगी. रामलीला मैदान के आसपास 200 गाड़ियों की भी अधिकृत पार्किंग नहीं है. इससे तो रामलीला मैदान और उसके आसपास के 10 किलोमीटर के दायरे में चक्का जाम हो सकता है. व्यापारियों को डर सता रहा कि अगर 31 अक्टूबर को बैरिकेडिंग हो जाएगी तो क्या रास्ते बंद हो जाएंगे? इससे पैनिक माहौल हो जाएगा. रामलीला मैदान के आसपास के 20 बड़े-बड़े होलसेल और रिटेल मार्केट सीधे प्रभावित होंगे.
CTI का तर्क है कि 10 अक्टूबर को तो जंतर-मंतर पर मात्र 3-4 हजार लोगों के प्रोटेस्ट के कारण पूरी सेंट्रल दिल्ली सील कर दी गई थी. रैली में तो 10 लाख लोगों की भीड़ जुटाने की कांग्रेस दावा कर रही. इससे तो पूरा कारोबार ही ठप पड़ जाएगा.
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा, ‘प्रदर्शन जो है, इस त्यौहार के मौसम में नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि इससे व्यापारियों को बहुत नुकसान पहुंचता है. और इसका असर सिर्फ व्यापारियों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और उद्योग पर भी पड़ेगा. इन्होंने तो मानो मंशा बना रखी थी कि देश की अर्थव्यवस्था को, जिसे ये पहले ही ‘डेड’ कह चुके थे, उसे वास्तव में डेड बनाए रखना चाहते हैं.’
लेकिन इसपर कांग्रेस कर रही कि व्यापारियों के नुकसान का फेक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है. कांग्रेस खुद ये दावा कर रही कि रैली में 10 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है. संख्या 10 लाख से ज्यादा भी हो सकती है. रैली में भीड़ से घबराकर BJP व्यापारियों के नुकसान का फेक नैरेटिव गढ़ रही है. कांग्रेस का दावा है कि व्यापारी भी राहुल गांधी के साथ खड़े हैं. लेकिन व्यापारी कुछ और ही कह रहे हैं. पूरा कारोबार ठप पड़ जाता है. प्रोटेस्ट और रैली से माहौल इतना खराब हो जाता है कि सुरक्षा को लेकर शॉपिंग के लिए कोई आता ही नहीं.
उधर, कांग्रेस कह रही कि BJP का डबल स्टैंडर्ड चेहरा भी बेनकाब हुआ है. कांग्रेस कह रही कि एक तरफ BJP ये दावा कर रही कि इंडी वालों की रैली के कारण व्यापारियों को नुकसान हो रहा है. दूसरी ओर BJP अध्यक्ष नितिन नवीन करवाचौथ से पहले एशिया के सबसे बड़े होलसेल मार्केट माने जाने वाले चांदनी चौक पर मार्च और प्रदर्शन करने जा रहे हैं.
व्यापारी भाइयों का नुकसान रामलीला मैदान में होगा या चांदनी चौक में? पूरी दिल्ली में कहीं किसी को प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं मिलती लेकिन BJP जहां चाहे जिस दिन चाहे प्रदर्शन कर सकती है. किसी भाजपाई पर कोई केस दर्ज नहीं होता. लेकिन कांग्रेस की मेगा रैली वाले प्लान पर बीजेपी कह रही है कि अगर ये लोग पेड़ से उल्टा भी लटक जाए तो कुछ नहीं होगा.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘सार्वजनिक महाभियोग’ की प्लानिंग
उधर 1 नवंबर की मेगा रैली से पहले कांग्रेस ने आज नया बवाल भी खड़ा कर दिया. केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि अमित शाह और पीएम के इशारे पर दिल्ली पुलिस परमिशन रद्द कर रही है. अमित शाह कितने परमिशन रद्द करेंगे? कितने लोगों को रोक सकेंगे. केसी वेणुगोपाल ने लिखा कि रैली से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ‘सार्वजनिक महाभियोग’ यानी ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ की प्लानिंग थी. इसके लिए पहले होटल अशोक में अनुमति मांगी गई, जिसे खारिज कर दिया गया. फिर रामलीला मैदान में कार्यक्रम तय किया गया, जहां परमिशन होने के बावजूद, दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम करने से रोक दिया. लेकिन यह बात बिल्कुल साफ है कि चाहे कुछ भी हो जाए, जब तक मोदी-शाह के कठपुतली ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे. अगर वे हमें यहां रोकते हैं, तो हम अमित शाह के घर और प्रधानमंत्री मोदी के घर जाएंगे और वहां जोरदार धरना देंगे.
इतना ही नहीं केसी वेणुगोपाल कह रहे कि पीएम मोदी और अमित शाह डर गए हैं. केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी और अमित शाह, हमें नहीं पता कि वो एक छोटी सी सभा से भी कितना डरे हुए हैं. हमने कांग्रेस पार्टी की तरफ से ज्ञानेश कुमार के सार्वजनिक महाभियोग की घोषणा की थी. हमने इसके लिए रामलीला मैदान को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक, यानी करीब नौ दिनों के लिए बुक किया था. उन्होंने इसके लिए अनुमति भी दे दी थी. इसलिए हमने तय किया कि हम 30 तारीख को यहीं पर एक समूह के रूप में सार्वजनिक महाभियोग चलाएंगे. पुलिस को क्या समस्या है? सबसे पहले उन्होंने अशोक होटल में अनुमति देने से मना कर दिया, फिर वो यहां आए और बोले कि हम आपको इसकी अनुमति नहीं दे सकते. इसका सीधा सा मतलब ये है कि ये दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं है, बल्कि ये नरेंद्र मोदी और अमित शाह का फैसला है ताकि उनके चहेते ज्ञानेश कुमार को बचाया जा सके.’
मॉक पार्लियामेंट को लेकर जो विवाद है, उसमें इंडी गठबंधन वाले ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वैसा ड्रामा क्रिएट करना चाहते हैं. जिसमें वो ये दिखाएंगे कि कैसे ज्ञानेश कुमार को हटाया जाएगा. कांग्रेस कह रही है कि इसी की इजाजत दिल्ली पुलिस नहीं दे रही है. इसलिए अब ये सब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली आवास में 30 अक्टूबर को किया जाएगा. ये मॉक पॉर्लियामेंट वाला सीन वैसा ही होगा जैसे मॉनसून सत्र में इंडी वालों ने पप्पू यादव को साधु संत के भेष में बिठा दिया था, जिस पर बहुत विवाद हुआ था.
दिल्ली पुलिस ने क्या बताया?
ये इधर आरोप लगा रहे कि दिल्ली पुलिस ने ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ से रोका. परमिशन नहीं दी. लेकिन दिल्ली पुलिस तो कह रही कि उन्होंने तो किसी भी कार्यक्रम के लिए किसी को मना ही नहीं किया. होटल के अंदर कार्यक्रम की जिम्मेदारी तो होटल प्रबंधन की होती है. दिल्ली पुलिस के सूत्रों का दावा है कि सच तो ये है कि होटल अशोक में कांग्रेस पार्टी या उसके किसी भी बड़े नेता का नाम पर कोई बुकिंग ही नहीं थी. दिल्ली पुलिस ने एक नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली के लिए NOC जारी कर दिया है. सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर कई शर्तें रखी गई हैं.
दिल्ली पुलिस ने शर्तों के साथ परमिशन दी है.
- दिल्ली पुलिस ने शर्त रखी है कि हर हाल में शाम 5 बजे तक रैली खत्म करनी होगी. किसी भी हाल में कार्यक्रम के समय को नहीं बढ़ाया जाएगा.
- रैली में हिस्सा लेने वाले किसी भी शख्स को रैली से पहले या बाद में रामलीला मैदान में रात में रुकने की इजाजत नहीं होगी.
- मार्च निकालने की मनाही है. रामलीला मैदान के अलावा किसी भी दूसरे स्थान के लिए कोई मार्च निकालने की अनुमति नहीं है.
- रामलीला मैदान के एंट्री-एग्जिट गेट पर, मंच पर, बैठने की जगह और आसपास के इलाकों में हाई डेफिनिशन वाले CCTV कैमरे लगाने होंगे.
- HD CCTV कैमरे से रिकॉर्डिंग के साथ-साथ कम से कम 5 मॉनिटर वाला कंट्रोल रूम भी बनाना होगा.
- रैली सही ढंग से हो. इसके लिए कांग्रेस को पर्याप्त संख्या में अपने वॉलंटियर्स तैनात करने होंगे, जो एक जैसी ड्रेस या बैज पहनेंगे ताकि उनकी पहचान हो सके.
इसके साथ ही दिल्ली पुलिस ने और भी कई शर्तें रखी हैं…
- रैली में हिंसा और हंगामे पर रोक रहेगी. किसी भी तरह की हिंसा, हंगामा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
- मंच से ऐसा कोई भाषण नहीं दिया जा सकेगा, जिससे जाति, धर्म या रंग के आधार पर लोगों के बीच तनाव पैदा हो या सामाजिक सौहार्द बिगड़े.
- अगर कोई वक्ता भड़काऊ या धमकी भरा भाषण देता है, तो आयोजकों को तुरंत माइक बंद करना होगा और उस वक्ता को मंच से हटाना होगा.
- आयोजकों को दिल्ली पुलिस के साथ पूरा सहयोग करना होगा. सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करना होगा.
- रैली में आने वाली बस, कार और दूसरी किसी भी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस की ओर से तय जगह पर ही पार्क करना होगा.
- रैली में आमंत्रित लोगों और वॉलंटियर्स की लिस्ट, मिनट-दर-मिनट कार्यक्रम, बसों की संख्या और उनके रजिस्ट्रेशन नंबर पुलिस को देने होंगे.
- नियम तोड़ने पर ऐक्शन होगा. शर्तों का उल्लंघन करने पर आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
- रैली में शामिल होने वाले लोगों के लिए पानी के टैंकर और टॉयलेट की व्यवस्था करनी होगी. महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग टॉयलेट ब्लॉक बनाने होंगे.
1 नवंबर की रैली से पहले आज राहुल गांधी फिर सड़क पर उतर गए. उनके साथ प्रशांत भूषण भी दिखे. योगेंद्र यादव भी दिखे. प्रशांत भूषण के रिजीम चेंज वाले बयान पर विवाद हो गया था. प्रशांत भूषण के साथ आज राहुल गांधी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में दिखे. वहां एक जनसुनवाई चल रही है. जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटा है. वो लोग राहुल गांधी से मिले. अपना बात बताई. कांग्रेस ने दावा किया कि त्रिलोकपुरी में चार बूथों में ही 416 वोट काट दिए गए. राहुल गंधी ने ऐसे लोगों से मुलाकात की है.
राहुल गांधी 1 नवंबर की रैली के लिए माहौल बिल्ट अप कर रहे हैं. राहुल गांधी कह रहे हैं कि जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता. तब तक विपक्ष रूकेगा नहीं. राहुल गांधी ने कहा, ‘वोट हिंदुस्तान के हर नागरिक का अधिकार है. पूरे देश को बात समझ आ रही है कि टॉप लेवल से वोट चोरी की जा रही है. गरीब लोगों को वोटर लिस्ट से निकाला जा रहा है और उनका जो हक है उनका अधिकार है वो उनसे छीना जा रहा है. ज्ञानेश कुमार जी से हमने सवाल पूछे, ज्ञानेश कुमार जी जवाब नहीं देते हैं, छिप जाते हैं, मगर हम रुकेंगे नहीं. जब तक ज्ञानेश कुमार जी अपना इस्तीफा नहीं देंगे, जब तक नरेंद्र मोदी जी ज्ञानेश कुमार को नहीं हटाएंगे, तब तक विपक्ष नहीं रुकेगा.’
रैली को लेकर काफी सीरियस कांग्रेस
रैली को लेकर कांग्रेस काफी सीरियस है. बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोड़ लगा दिया है. आज कांग्रेस के कई बड़े नेता महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ रामलीला मैदान भी पहुंचे. वहां उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया. कांग्रेस बड़ा टारगेट लेकर चल रही है. कह रही है कि दिल्ली में 10 लाख लोगों की भीड़ इकट्ठा होने जा रही है.
कांग्रेस फुल कॉन्फिडेंस में है. बड़े ही जोर-शोर के साथ रैली की तैयारी कर रही है. JCB की मदद से रामलीला मैदान को प्लेन किया जा रहा है. हजारों कुर्सियां लगाई गई हैं. बड़ा मंच बनाया जा रहा है.

