वैसे तो नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल बनाने में इंडी वाले और राहुल गांधी कोई कमी नहीं छोड़ते हैं. लेकिन इनकी दिक्कत ये है कि ये लोग अपनी हवाबाजी में फंस जाते हैं और इनका नैरेटिव दो दिन भी नहीं टिकता. क्योंकि आप देखिए कि चुनाव आयोग के मामले को लेकर इंडी वालों ने सीधे पीएम मोदी को घेर लिया. राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी. अखिलेश, ममता, केजरीवाल सब आ गए थे. इन्हें लगा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ अब बड़ा मौका मिल गया है. लगे हाथ इन्होंने इंडी वालों की मीटिंग भी बुला ली. इन्हें लगा कि माहौल अभी गरम है और इसी में हथौड़ा मार दो, लेकिन इनकी हालत आज की डेट में ये है कि हथौड़ा लेकर ये सब एक दूसरे के पीछे दौड़ पड़े.
मीटिंग तो बुला ली, लेकिन कोई आने को तैयार नहीं. सब एक दूसरे से मुंह फुलाए नाराज फूफा बने बैठे हैं. क्या अखिलेश यादव, क्या केजरीवाल और क्या दूसरी पार्टियां, जितने नेता, उतने मुंह और उतनी बातें इंडी के अंदर चल रही है. इतना ही ये सब एक दूसरे को ऐसा कोस रहे हैं कि कोई कह रहा है कि हम क्यों मीटिंग में आएं, कोई कह रहा है कि राहुल गांधी कुछ भी कर लें, पांच पुश्तों तक पीएम नहीं बन पाएंगे. सोचिए ये सब गजब कांड हो रहे हैं इंडी के अंदर.
ये सब आपको बताएंगे और ये भी बताएंगे कि कांड तो राहुल गांधी के साथ भी हो गया क्योंकि राहुल गांधी वोट चोरी का माहौल ही बनाते रहे गए, उधर ऐसे ऐसे सबूत आ गए कि जिसने कांग्रेस के पूरे प्लान को कबाड़ कर दिया. क्योंकि कांग्रेस की पूरी कोशिश तो ये है कि राहुल गांधी के चेहरे को कैसे चमकाया जाए. कैसे राहुल गांधी को उनकी पुरानी इमेज से निकाल कर नई इमेज में लाया जाए इसी वजह से डायरेक्ट मोदी शाह पर ‘आंय बांय सांय’ अटैक किए जा रहे हैं.
ये कहने लगे कि ज्ञानेश कुमार को हटाओ, क्योंकि ज्ञानेश कुमार ही नरेंद्र मोदी को जिता रहे हैं. लेकिन लोग ये पूछने लगे हैं कि नरेंद्र मोदी तो ज्ञानेश कुमार के आने से पहले भी लगातार जीत रहे थे. अगर ज्ञानेश कुमार के आने के बाद से सारी गड़बड़ शुरू हुई तो फिर क्या कांग्रेस वालों ने मान लिया कि ज्ञानेश कुमार के पहले के सारे चुनाव पाक साफ थे. आज हम इसके बारे में आपको बताएंगे कि ज्ञानेश कुमार के आने के पहले कितने चुनाव कांग्रेस हारती थी और ज्ञानेश कुमार के आने के बाद कैसे खुद कांग्रेस ने कई कई चुनाव जीते हैं. आपको ये भी बताएंगे कि कौन सा CEC था जिसके राज में 28 लाख महिलाओं के वोट काट दिए गए थे.
यानी खुद कांग्रेस अपने ही गेम में एक्सपोज होती जा रही है उधर एक्सपोज तो कॉकरोच पार्टी वाले भी हो रहे हैं. और यही वजह है कि अब केजरीवाल खुलकर इनके लिए खेलने लगे हैं. आज हम इसके बारे में भी आपको बताएंगे कि केजरीवाल और कॉकरोच पार्टी का पीएम मोदी के खिलाफ नया प्लान क्या है.
आप देखिए कि इंडी वाले हफ्ते भर से पूरा माहौल बना रहे थे. इधर से राहुल गांधी, उधर से ममता बनर्जी, इनके बीच में अखिलेश और केजरीवाल, ये सारे लोग मिलकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ नया मोर्चा खोलने वाले थे. आज कांग्रेस ने अपनी कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की मीटिंग भी कर ली. कल इंडी वालों की मीटिंग होने वाली है. लेकिन इसी बीच इंडी वालों की कहानी में ऐसा ट्विस्ट आया है कि आप भी हैरान रह जाएंगे. पहले तो सब कह रहे थे कि मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलना है. ज्ञानेश कुमार को हटाना है. क्योंकि ज्ञानेश कुमार ही मोदी को जितवा रहे हैं. लेकिन जो लोग मोदी को हटाने चले हैं, वो अपने मतभेद नहीं हटा पा रहे हैं और खुद ही एक्सपोज हो रहे हैं.
आप देखिए कि इंडी गठबंधन की कल बैठक होने वाली है लेकिन इस बैठक का हाल ये है कि अखिलेश यादव नहीं आ रहे हैं, वो यूपी में राज्यसभा चुनाव का हवाला दे रहे हैं. अखिलेश यादव की जगह उनकी पार्टी से कोई नेता आएंगे. अभी देश में सबसे बड़ा चुनाव यूपी में होने वाला है. ऐसे में अखिलेश यादव की मौजूदगी का बड़ा मैसेज जाता. हाल ही में अखिलेश यादव की रथ यात्रा को लेकर भी कांग्रेस और सपा में तनातनी हो गई थी. उस बीच अखिलेश यादव का ना आना इंडी की एकता के लिए बड़ा झटका है. हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे को ये कहकर डाउनप्ले कर रही है कि अखिलेश नहीं आ रहे तो क्या हुआ उनकी पार्टी के नेता तो आ रहे हैं.
अखिलेश यादव आते तो राहुल गांधी से मिलते, यूपी में राहुल-अखिलेश की जोड़ी एकजुट है ये मैसेज जाता, लेकिन शायद अखिलेश यादव ने जता रहे हैं कि गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है. आप देखिए यूपी में कांग्रेस और सपा नेताओं में तगड़ी बयानबाजी चल रही है यूपी में कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि हमें गठबंध में 150 से ज्यादा सीटें चाहिए.
इस पर सपा नेता आईपी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘अखिलेश यादव आते तो राहुल गांधी से मिलते, यूपी में राहुल-अखिलेश की जोड़ी एकजुट है ये मैसेज जाता लेकिन शायद अखिलेश यादव ने जता रहे हैं कि गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है आप देखिए यूपी में कांग्रेस और सपा नेताओं में तगड़ी बयानबाजी चल रही है यूपी में कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि हमें गठबंध में 150 से ज्यादा सीटें चाहिए इस पर सपा नेता आईपी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘लुटियंस कांग्रेसियों यूपी की 403 सीटों पर चुनाव लड़ो. आगे RG क्या अगली 5 पुश्तों से अब कभी कोई तथाकथित गांधी PM नहीं बनेगा. 1989 से गांधी परिवार को PM की कुर्सी नसीब नहीं हुई न आगे कई दशकों तक होगी. सभी कांग्रेसी दिल्ली में बैठकर दिन में मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखते हैं. सिर्फ कैमरे, मंच,और बड़े-बड़े बयान राजनीति में जनाधार नहीं बनाते. और रही कांग्रेस-भाजपा के कथित ‘पैक्ट’ की बात… तो यह आरोप नहीं, जनता के सामने उठ रहा एक राजनीतिक सवाल है. कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी राजनीति वास्तव में किसके लिए और किस दिशा में है.’
इधर अखिलेश यादव नहीं आ रहे, उधर उद्धव ठाकरे भी बिजी हैं, वो भी दिल्ली नहीं जा रहे. वो ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ेंगे. जबकि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के नेता हैं. महाराष्ट्र वो राज्य है जिसमें हार के बाद से ही इंडी वालों ने वोट चोरी का माहौल बनाना शुरू किया था. आप सुनिए इंडी की बैठक में ना जाने को लेकर संजय राउत ने कहा, ‘हां, आज मीटिंग बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन हमको भी जाना था, उद्धव जी ने भी तैयारी की थी लेकिन आपको मालूम है कि अब दो दिन में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए हमारा भी मुंबई में सबसे बड़ा आंदोलन हो रहा है, उसकी तैयारी में हम जुटे हैं. दिल्ली में जाने आने में दो दिन लगते हैं. हम सभी लोग 3 बजे के बाद INDIA ब्लॉक की बैठक में ऑनलाइन, डिजिटल माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा हम उसमें सहभागी होंगे.’
उद्धव ठाकरे भले ही बिजी होने का हवाला दे रहे हो लेकिन यही उद्धव ठाकरे हैं जो कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर मंतर गए थे लेकिन इंडी गठबंधन की पार्टी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही निपटा देंगे. इधर अखिलेश यादव नहीं आ रहे हैं, उधर डीएमके ने भी फिर से राहुल गांधी को झटका दे दिया है. डीएमके की भी कांग्रेस से नाराजगी जारी है, डीएमके भी बैठक में नहीं आएगी. डीएमके विपक्ष में तीसरी बड़ी पार्टी है, उसकी गैरमौजूदगी का असर पड़ेगा ही. डीएमके का कहना है कि गठबंधन में कई ऐसी पार्टियां हैं कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहती. डीएमके के मुताबिक इंडी गठबंधन अब मजबूत नहीं है, कई पार्टियां कांग्रेस के खिलाफ है. यानी जिस वक्त विपक्षी एकता की बात हो रही है उस वक्त कांग्रेस की पुरानी सहयोगी. डीएमके ही कांग्रेस को Expose कर रही है. हाल ही में डीएमके नेता कनिमोझी ने ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, और सुप्रिया सुले से भी अलग-अलग मुलाकात की थी. डीएमके का ना आना इसलिए भी विपक्ष के लिए झटका है क्योंकि तमिलनाडु में भी SIR का मुद्दा हावी है. महाराष्ट्र के अलावा इंडी के कुछ नेता तमिलनाडु में भी फिर से चुनाव की मांग कर रहे हैं.
डीएमके के अलावा आम आदमी पार्टी भी अपने पुराने स्टैंड पर कायम है, वो भी इंडी गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होगी. डीएमके की तरह आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस को एक्सपोज़ कर रही है एक इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया था. केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस को जो 3 सीटें मिली थी उस पर जाकर उन्होंने प्रचार किया, लेकिन आम आदमी पार्टी की 4 सीटों पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उनके कार्यकर्ता घर घर जाकर बीजेपी के लिए वोट मांगते हैं. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस बीजेपी को हराना चाहती है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के टॉप नेता जेल जा चुके हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ. अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच कोई सेटिंग है.
यानी कल इंडी गठबंधन की बैठक है और उससे पहले विपक्ष की पार्टियों के नेता कांग्रेस के धागे खोलने में लगे हैं. उधर कांग्रेस इन सबका लोड नहीं ले रही क्योंकि उसका इकलौता एजेंडा ये है कि राहुल गांधी की इमेज को कैसे चमकाया जाए. राहुल गांधी भी ये चाह रहे हैं कि मोदी शाह से टक्कर लेते अगर कोई नेता दिखे तो सिर्फ वही दिखे. ये राहुल गांधी की पुरानी इमेज से छुटकारा पाना का प्रयास दिख रहा है. इसीलिए आप देखिए कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में राहुल गांधी ने जो कहा उसमें ज्ञानेश कुमार की बात तो की साथ में पीएम मोदी का भी जिक्र किया.
सूत्रों के मुताबिक आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि – हमें लगे रहना है, किसको उम्मीद थी कि धर्मेंद प्रधान इस्तीफा देंगे लेकिन 25 जुलाई को इस्तीफा दिया. राहुल गांधी ने दावा किया कि PM हिले हुए हैं हमें दवाब बनाए रखना है. कांग्रेस शुरुआत से इलेक्शन कमीशन को एक्पोज करने में लगी है. जब कोई विपक्षी दल इस बात पर विश्वास नहीं कर रहे थे.
सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं से भी कहा, “आप मुझ में भरोसा नहीं करते, लेकिन पीएम और गृह मंत्री ने एक मीटिंग में मुझसे कहा हमें पता है कि हम जाएंगे तो आप ही आएंगे. आप भी मुझ में वैसे भी भरोसा करिए”
यानी इंडी की कल की मुलाकात से पहले राहुल गांधी ने ये माहौल बना दिया कि चुनाव आयोग का कच्चा चिट्ठा तो उन्होंने ही खोला है. अगर बीजेपी सत्ता से जाएगी तो कांग्रेस ही आएगी. ये एक तरह का विपक्षी दलों को भी मैसेज है कि कांग्रेस के बिना, इंडी गठबंधन का काम नहीं चल सकता.
यानी इंडी की कल की मुलाकात से पहले राहुल गांधी ने ये माहौल बना दिया कि चुनाव आयोग का कच्चा चिट्ठा तो उन्होंने ही खोला है. अगर बीजेपी सत्ता से जाएगी तो कांग्रेस ही आएगी. ये एक तरह का विपक्षी दलों को भी मैसेज है कि कांग्रेस के बिना, इंडी गठबंधन का काम नहीं चल सकता. कल इंडी गठबंधन की मीटिंग है उससे पहले कांग्रेस ने आज CWC की मीटिंग की और कल होने वाली मीटिंग का एजेंडा सेट कर दिया है. कांग्रेस ने CWC मीटिंग के बाद चार डिमांड सामने रखी.
– CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें
– SIR की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए
– वोटर लिस्ट से हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को जोड़ा जाए
– ज्ञानेश कुमार ने PM मोदी के इशारे पर वोट चोरी की है, इसलिए PM मोदी भी इस्तीफा दें
कांग्रेस पार्टी ये कह रही है कि देश में जितने भी चुनाव हो रहे हैं वो फिक्सिंग वाले चुनाव हैं. जयराम रमेश अगर सारे चुनाव को फिक्सिंग मान रहे हैं तो फिर उन्हें ये भी बताना चाहिए कि केरल, तमिलनाडु के चुनाव में उन्होंने किस फिक्सिंग के जरिये सरकार बनाई है. कांग्रेस पार्टी ये डिमांड कर रही है कि SIR के दौरान जो 13 करोड़ 30 लाख नाम हटाए गए हैं उन्हें फिर से जोड़ा जाए. लेकिन आप देखिए कि SIR में जो नाम हटे उसमें ऐसे वोटर भी थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी और जिनके नाम अभी वोटर लिस्ट में थे. क्या कांग्रेस चाहती है कि डेड वोटर्स के नाम भी फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए. इस तरह के करीब 3 करोड़ वोटर थे.
इसकी तरह से करोड़ों डुप्लीकेट वोटर थे, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाकर वोटर लिस्ट को क्लीन किया गया. कांग्रेस क्या चाहती है कि डेड और डुप्लीकेट वोटर्स फिर से वोटर लिस्ट में जुड़ जाएं.
कांग्रेस पार्टी वाले आज SIR के जरिये लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के ही नेता कई बार वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण की डिमांड करते आए हैं.
साल 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण की मांग की थी. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि वोटर लिस्ट में 42 लाख नाम संदिग्ध हैं. साल 2018 में सचिन पायलट ने राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कहा था कि मतदाता सूचियों में उजागर लाखों की तादाद में फर्जी वोटरों को चिन्हित करना, उनके नाम लिस्ट से बाहर करना जरूरी है. चुनाव आयोग को ये भी देखना चाहिए कि इतने फ़र्जी वोटर सूचियों में कैसे जुड़ गए? इसके अलावा एमपी को लेकर भी कांग्रेस ने ये आरोप लगाया था कि वोटर लिस्ट में 65 लाख नाम संदिग्ध हैं. साल 2018 में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया था कि करीब 50 लाख डुप्लीकेट वोटर आंध्र प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं.
यानी राजस्थान और एमपी के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने फर्जी वोटर्स का खूब माहौल बनाया जबकि साल 2018 में राजस्थान और एमपी दोनों का चुनाव कांग्रेस जीती थी. जीतने के बाद ये लोग शांत हो गए. अगर हार जाते तो ये माहौल बनाते है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई है. इस तरह जिस आंध्र प्रदेश में 50 लाख डुप्लीकेट वोटर होने का दावा किया जा रहा था. उस आंध्र प्रदेश में भी 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में….ना कांग्रेस जीती, ना बीजेपी..वहां YSRCP की जीत हुई.
यही बात बीजेपी उठा रही है कि बीजेपी नेता कह रहे हैं कि राजस्थान में 42 लाख फर्जी वोटर कांग्रेस ने बताए थे. अब SIR में 41.58 लाख वोटर हटे हैं, इसी तरह आंध्र प्रदेश में 50 लाख फर्जी वोटर बताए थे अब SIR में 44 लाख 28 हजार नाम under Scrunity है. यानी पहले कांग्रेस खुद हल्ला मचाती है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है, लेकिन जब SIR में गड़बड़ियां ठीक की जाती हैं तो ये फिर सवाल उठाने लगते हैं.
बीजेपी नेता सिद्धार्थ यादव ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी 2018 के अंदर ये कहती थी कि अगर नामों को नहीं हटाया गया, डुप्लिकेट नामों को नहीं हटाया गया, डेड वोटर्स को नहीं हटाया गया, तो ये लोकतंत्र के साथ फर्जी है और जब नाम हटाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी क्या कहती है, ये सब भी हम देख रहे हैं.’
वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी जो माहौल बना रहे हैं उसमें वो खुद ही फंसते जा रहे हैं. आप देखिए कि राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली में यमुना किनारे एक बस्ती में पहुंचे. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बेला एस्टेट नाम की इस बस्ति में 728 लोग रहते हैं, लेकिन SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम बचा, बाकी 727 लोगों के नाम हटा दिए गए. राहुल गांधी ने कहा कि 2023 में इन लोगों के घर तोड़ दिए गए लेकिन मकान ना होने से वोट का अधिकार खत्म नहीं हो जाता. राहुल गांधी ने इसे ही वोट चोरी बताया. राहुल गांधी ने वहां मौके से ही SDM से बात की. उन्हें धमकाया भी कि अपना नाम और डेसिग्नेशन दे दो, आपको मैं दूसरे तरीके से देख लूंगा.
राहुल गांधी ने दिल्ली की जिस बस्ती का मामला उठाया उस पर चुनाव आयोग ने जवाब दिया. अपने जवाब में आयोग ने कहा कि जिस बेला इस्टेट इलाके का मामला राहुल गांधी ने उठाया है. वो यमुना नदी का पश्चिमी तट का हिस्सा है. वहां पर ये सारे लोग खेती का काम करते थे, लेकिन 2021 से एग्रीकल्चर एक्टिविटी बंद हो गई. जो घर वहां बने हुए थे वो 2022-23 में वहां से हटा दिए गए. इसके बाद तय नियमों के मुताबिक BLO ने इन लोगों का नाम ASDD यानी- Absentee, Shifted, Duplicate, and Deceased लिस्ट में डाल दिया, क्योंकि जिन एड्रेस पर इन लोगों का एनरोलमेंट हुआ था वो घर तो तोड़ डाले गए. इसी वजह से 728 वोटर्स के नाम डिलीट हुए. इनमें से कुछ लोग गीता कॉलोनी ब्रिज के नीच टेंट में रह रहे हैं. इन्हें बेघर वोटर मानकर एक स्पेशल कैंप 18 और 20 सितंबर को लगाया गया. स्पेशल कैंप के जरिये फॉर्म 6 से जुड़ी 496 एप्लीकेशन मिली. फॉर्म के वेरिफिकेशन के बाद इन लोगों का नाम नए एड्रेस के मुताबिक जोड़ दिया जाएगा.
यानी ये 728 नाम एक स्पेशल केस की वजह से हटे थे. जो नाम हटे उन्हें फिर से जोड़ने का काम चल रहा है. लेकिन राहुल गांधी ने ऐसा माहौल बना दिया कि वोट चोरी हो रही है. दूसरी बात ये कि ये कौन कंफर्म करेगा कि ये सभी 728 वोटर्स कांग्रेस के ही वोटर्स हैं और इनके नाम हटने से कांग्रेस को नुकसान होगा . बीजेपी को चुनावी नतीजे में फायदा होगा
आप देखिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका डाली गई थी. उस याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते इस मामले की सुनवाई करेगा. CJI ने इस मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. याचिका में दोनों चुनाव आयुक्त की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को रद्द किया जाए. पूरे मामले की जांच के लिए SIT के गठन की मांग की गई है. इसके अलावा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्रिमिनल केस चलाने की मांग की गई है.
आप ये भी देखिए कि आज वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर इतना बवाल मचा है, जबकि 1950 के दशक में कैसे लाखों महिलाओं ने नाम वोटर लिस्ट से डिलीट हो गए थे उसका किस्सा आपको बताता हूं.
देश के पहले लोकसभा चुनाव की तैयारियां चल रही थी. तब भारत के पहले CEC सुकुमार सेन ने वोटर लिस्ट में महिलाओें का नाम शामिल करने को लेकर एक नियम बनाया कि महिलाओं को अपने नाम से रजिस्टर्ड करना होगा लेकिन चुनाव आयोग के सामने तब दिक्कत आ गई. जब देश के कुछ हिस्सों में महिलाएं चुनाव आयोग से जुडे़ लोगों को अपना नाम नहीं बता रही थीं, क्योंकि तब एक चलन था कि महिलाएं अजनबियों को अपना नाम नहीं बताती थीं. महिलाओं से नाम पूछने पर वो पति या पिता का नाम लेती थी. लेकिन CEC सुकुमार सेन को ये सब मंजूर नहीं था. उनका ये मानना था कि एक नागरिक के तौर पर कागजों पर भी महिलाओं की अपनी पहचान हो. इस वजह से 28 लाख महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए क्योंकि उन्होंने अपना नाम नहीं बताया.
हालांकि बाद के चुनाव में ये स्थिति धीरे धीरे बदली, चुनाव आयोग ने इसके लिए बड़ा कैंपेन चलाया. जिस वजह से अगले लोकसभा चुनाव में महिला वोटरों की संख्या 5 करोड़ 60 लाख से बढ़कर करीब 9 करोड़ पहुंच गई थी.

